आंखें नम कर देगी 2 घंटे और 9 मिनट की ये कोर्टरूम ड्राम, थिएटर रिलीज़ के 14 साल बाद ओटीटी पर मचाया हुड़दंग

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14 साल पुरानी एक फिल्म हाल ही में ओटीटी पर आई है।

फिल्म की कहानी एक बायोग्राफिकल कोर्टरूम ड्रामा पर बेस्ड है।

IMDb पर इस फिल्म को 8 से भी ज़्यादा रेटिंग्स प्राप्त हुई हैं।

अगर आपको असली घटनाओं पर आधारित कहानियों वाली फिल्में देखना बेहद पसंद है, और आप ऐसी ही कोई फिल्म देखने के लिए ढूंढ रहे हैं, तो आज आपकी खोज यही खत्म होती है, क्योंकि आज हम आपके लिए एक ऐसी ही फिल्म लेकर आए हैं। ओटीटी पर हाल ही में रिलीज़ हुई ये फिल्म 14 सालों बाद फैंस के बीच फिर से सुर्ख़ियों में आ चुकी है। इस फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग भी 8 से ज्यादा है, यकीनन ये फिल्म आपको ज़रूर देखनी चाहिए। अब आप भी सोच रहे होंगे की भला हम ऐसी कौन सी मूवी की बात कर रहे हैं, तो ज़रा अपने दिल को थाम कर बैठिये और इस आर्टिकल में हमारे साथ अंत तक बने रहिये। आइए जानते हैं इस फिल्म की कहानी और तगड़े प्लाट ट्विस्ट के बारे में।

क्या है इस फिल्म का नाम?

इतने हिंट्स देने के बाद अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि हम कौन सी फिल्म के बारे में आपसे बात कर रहे हैं, फिर भी आपकी जानकारी के लिए बता दें की यहां बात ‘ शाहिद ‘ (Shahid) की हो रही है। यह मूवी एक बायोग्राफिकल ड्रामा मूवी है। इस फिल्म में राजकुमार राव ने मुख्य किरदार की भूमिका निभाई है। यह मूवी सिनेमाघरों में साल 2013 में रिलीज़ हुई थी। अपनी रिलीज़ के दशक बाद अब 2026 में ये सीरीज़ ओटीटी पर तहलका मचा रही है। ये फिल्म हाल ही में प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई है।

किसके जीवन पर आधारित है फिल्म?

राजकुमार राव की ये फिल्म वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहिद आजमी के जीवन पर आधारित फिल्म है। शाहिद आजमी की साल 2011 में मुंबई में उनके ही ऑफिस में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस फिल्म में राजकुमार राव ने शहीद आज़मी का किरदार निभाया है।

क्या है फिल्म की कहानी?

हंसल मेहता द्वारा निर्देशित शहीद एक बायोग्राफिकल कोर्टरूम ड्रामा फिल्म है। इस फिल्म की कहानी मुंबई के एक गरीब मुस्लिम परिवार के युवक शाहिद आज़मी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो 1992 के मुंबई दंगों का खौफनाक मंजर देखने के बाद कुछ समय के लिए भटक जाता है, लेकिन बाद में उसे आतंकवाद के झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाता है और टाडा (TADA) कानून के तहत 7 साल के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया जाता है। जेल में बिताए समय के दौरान वह पढ़ाई करने और कानून सीखने के लिए प्रेरित होता है, और रिहा होने के बाद एक वकील बनकर बेकसूर और गरीब लोगों के हक की लड़ाई लड़ता है जिन्हें समाज और कानून बिना किसी पुख्ता सबूत के पहले ही दोषी मान चुके होते हैं। कई बेगुनाह लोगों को न्याय दिलाने के सफर में उसे लगातार जान से मारने की धमकियां मिलती हैं, और आखिर में न्याय की इस लड़ाई को लड़ते हुए साल 2010 में शहीद की गोली मारकर हत्या कर दी जाती है। यह फिल्म अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले एक आम इंसान के साहस की कहानी है।

शाहिद ने जीते थे दो नेशनल अवॉर्ड

आपकी जानकारी के लिए बता दें की राजकुमार राव की इस फिल्म ने दो नेशनल अवॉर्ड जीते थे। 2014 में हंसल मेहता को बेस्ट डायरेक्शन के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था। वहीं, राजकुमार राव को बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला था। राजकुमार राव के अलावा फिल्म में प्रभलीन संधू और मोहम्मद जीशान अयूब जैसे कलाकार नजर आए थे। शहीद को IMDb पर 8.2 की दमदार रेटिंग प्राप्त हुई है।

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Faiza

फाईज़ा परवीन डिजिट हिंदी में एक कॉपी एडिटर हैं। वह 2023 से डिजिट में काम कर रही हैं और इससे पहले वह 6 महीने डिजिट में फ्रीलांसर जर्नलिस्ट के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं, और उनके पसंदीदा तकनीकी विषयों में स्मार्टफोन, टेलिकॉम और ओटीटी शामिल हैं। उन्हें हमारे हिंदी पाठकों को वेब पर किसी डिवाइस या सेवा का उपयोग करने का तरीका सीखने में मदद करने के लिए लेख लिखने में आनंद आता है। सोशल मीडिया की दीवानी फाईज़ा को अक्सर अपने छोटे वीडियो की लत के कारण स्क्रॉलिंग करते हुए देखा जाता है। वह थ्रिलर फ्लिक्स देखना भी काफी पसंद करती हैं।

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