कुछ हफ्ते पहले मुझे एक ऐसे शख्स से बात करने का मौका मिला जो पिछले कई सालों से भारत के Telecom Data को एक अलग नजरिए से देख रहे हैं। Parag Kar एक टेलीकॉम विश्लेषक हैं जो TRAI के सभी के लिए उपलब्ध डेटा को कुछ इस तरह से देखते हैं कि जो बात लाखों स्प्रेडशीट आदि में छिपी होती है, एक ही झटके में सामने आ जाती है। जब उन्होंने अपनी एक वीडियो के माध्यम से अपना विश्लेषण मेरे साथ शेयर किया तो एक ही पल में मेरे सामने एक नई तस्वीर बनकर खड़ी हो गई, जो मुझे कुछ सवाल करने के लिए मजबूर और बाध्य कर रही है। हालांकि, डेटा के माध्यम से यह जानकारी पहले भी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध थी, लेकिन मुझे आश्चर्य है कि आजतक किसी ने भी इस मुद्दे को लेकर कुछ कहा नहीं, कुछ खुलकर बोला नहीं? ऐसा भी हो सकता है कि इस तरह के डेटा को अभी तक किसी ने इस तरह से देखा ही न हो! मामला उस समय तूल पकड़ गया जिस समय TRAI की ओर से यह प्रस्ताव रखा गया कि वॉयस और एसएमएस के साथ आने वाले सभी प्लांस को उतनी ही वैलिडीटी के साथ उतारना चाहिए, जितना कि डेटा प्लांस आते हैं। अब इस बात को सुनते ही टेलीकॉम कंपनियों के मानो होश उड़ गए और वह सभी इस प्रस्ताव का विरोध करने पर उतर आईं। अब जाहिर है कि जब आप किसी की इंकम को कम करने के प्रस्ताव लाएंगे को उसे मिर्ची लगनी ही है। लेकिन एक बड़ा सवाल यह भी है कि जब किसी को इंटरनेट डेटा वाले प्लान की जरूरत ही नहीं है, तो उसे उसके लिए भुगतान क्यों करना पड़ रहा है?
अब यह सवाल तो बड़ा ही सीधा सा है लेकिन इसका उत्तर अभी तक मिला नहीं है। हालांकि, जो सकता है कि आने वाले समय में इसे लेकर ज्यादा बातें हों और कुछ समाधान सामने आए! खैर, हम विस्तृत चर्चा तो करने ही वाले हैं। उससे पहले आंकड़ों पर नजर डाल लेते हैं। असल में, भारत में करीब 20 करोड़ लोग ऐसे हैं जो 2G फीचर फोन का इस्तेमाल करते हैं। उनके लिए मोबाइल का मतलब है अपने किसी करीबी का फोन सुनना, बैंक से आए OTP को प्राप्त करना, पेंशन क्रेडिट होने के मैसेज का मिला आदि आदि। इसका इंटरनेट डेटा से कोई लेना देना नहीं है। लेकिन इसके बाद भी जब उन्हें रिचार्ज कराना होता है तो उसी प्लान को खरीदना पड़ता है जो एक स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले यूजर को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इस प्लान में इंटरनेट डेटा बंडल होता है। अब सवाल फिर से वही है कि जिस सेवा का इस्तेमाल कोई कर नहीं रहा है, इसके लिए पैसे क्यों दिए जाएं।
Parag Kar से बात करते हुए उन्होंने पहली बात यह कही कि भारत को एक बाजार मानकर चलना ही सबसे बड़ी गलती है। उनके अनुसार भारत दो बिल्कुल अलग किस्म के टेलीकॉम यूजर्स का देश है। एक तरफ है वो स्मार्टफोन यूजर्स हैं, जो रोजाना अपना ज्यादा से ज्यादा समय YouTube देखने में बिताते हैं, रील्स को स्क्रॉल करते हैं और ऑनलाइन गेमिंग खेलते रहते हैं, इसके अलावा 5G की रफ्तार के साथ ऐप्स को अपने फोन में डाउनलोड कर उनका इस्तेमाल करते हैं। दूसरी तरफ है वो दूर दराज के इलाकों में रहने वाले लोग और वो दिहाड़ी मजदूर हैं, जिनके पास एक 2G नेटवर्क पर चलने वाला फीचर फोन है, इसके अलावा उनका मोबाइल नंबर ही उनकी डिजिटल पहचान भी है। उनका Bank account उसी नंबर से जुड़ा है, आधार कार्ड लिंक है, पेंशन के अलावा सरकारी सेवाओं के लाभ वाले मैसेज भी इसी नंबर पर आते हैं। दोनों यूजर्स की जरूरत और सेवाओं को इस्तेमाल करने का तरीका अलग अलग है, लेकिन दोनों को एक ही डेटा प्लान खरीदना पड़ता है, पर ऐसा क्यों है? यह एक बड़ा सवाल है, लेकिन पराग कर इसे ही एक बड़ी समस्या मानते हैं, वो कहते हैं कि, “इस मुद्दे पर न तो टेलीकॉम कंपनी ध्यान दे रही हैं, और न ही नीति निर्माताओं की ओर से इसे लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया है।”
Parag Kar ने अपनी इसी वीडियो के माध्यम से TRAI के कुछ डेटा को भी शेयर किया है, जो काफी कुछ बोल रहा है। TRAI के दिसंबर 2025 क्वार्टर के आँकड़े अगर देखें जाएँ तो काफी कुछ साफ हो जाता है। भारत में उस क्वार्टर में कुल वायरलेस डेटा खपत को देखा जाए तो यह 73,324 Petabyte के आसपास है। इसमें 4G के हिस्से को देखा जाए तो यह लगभग 44,087 PB और 5G को देखा जाए तो यह लगभग लगभग 29,094 PB के आसपास था। इसका मतलब है कि 4G और 5G मिलाकर लगभग पूरी डेटा ईकानमी को चला रहे हैं। इसमें अगर 2G के हिस्से को देखा जाए तो यह मात्र 48 Petabyte है। इसे अगर प्रतिशत में देखा जाए तो केवल 0.07 प्रतिशत। यानि अगर 4G और 5G डेटा का पहाड़ हैं तो यहाँ 2G डेटा को एक छोटा पत्थर भी नहीं कहा जा सकता है। मतलब हर एक यूनिट जो 2G यूजर्स खपत करते हैं उसके बदले 4G और 5G यूजर्स की खपत 1528 यूनिट के आसपास है।
FY-26 में एक सब्स्क्राइबर के डेटा इस्तेमाल को अगर देखा जाए तो यह लगभग लगभग 25.70 GB प्रति महीना के आसपास का है। लेकिन यह औसत उन 73 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स की भारी भरकम खपत से बनता है। अगर केवल 2G यूजर्स को देखा जाए तो यह तो 1MB डेटा भी मुश्किल से ही खर्च करते होंगे। अब अगर कुछ यूजर्स का डेटा खपत का आंकड़ा ही 0.07 प्रतिशत है तो उन्हें डेटा के लिए पैसे क्यों देने चाहिए?
Parag Kar की एक बात और बहुत अच्छी है। वह कहते हैं कि, मान लीजिए कि कोई व्यक्ति एक ढाबे पर सिर्फ चाय और टोस्ट लेने गया है। लेकिन ढाबे वाले की ओर से उसे एक बफै ही ऑफर कर दिया जाता है जो उसे चाहिए भी नहीं। अब मात्र एक चाय और टोस्ट खाने के लिए, पूरे बफै के पैसे क्यों दिए जाएँ?
यही हाल 2G फीचर फोन यूजर्स का भी भी है। उन्हें केवल वॉयस और कॉलिंग के साथ वैलिडीटी मात्र चाहिए, लेकिन उन्हें इसके साथ महंगा डेटा भी खरीदना होगा! अब उदाहरण के लिए मानकर चलिए कि जब किसी 2G फीचर फोन पर डेटा से जुड़ा कोई काम किया ही नहीं जा सकता है तो क्या इसे इस्तेमाल करने वाले यूजर को उसके लिए पैसे खर्च करने चाहिए? हाँ, अगर आप 4G Feature Phone को लेकर यह सब कहते तो एक बार के लिए माना जा सकता था कि डेटा वाले प्लांस इसपर काम कर सकते हैं, लेकिन 2G Feature Phone को टेक्निकल तौर पर डेटा से जुड़े कामों को कर ही नहीं सकता है। ऐसे में मुझे लगता है कि इन फोन्स के लिए डेटा प्लान जरूरत नहीं, टेलीकॉम कंपनियों की ओर से की जा रही जबरदस्ती है।
अगर आधिकारिक आंकड़ों को देखा जाए तो FY-26 में डेटा ARPU यानि डेटा से प्रति subscriber औसत कमाई 171.57 रुपये के आसपास की है। इसी तरह अगर कॉल्स को देखा जाए तो इसका ARPU 14.84 रुपये के आसपास का है। SMS के मामले में यह आकंडा 0.35 रुपये है। अगर कुल ARPU को देखा जाए तो यह 194.56 रुपये है। इस आँकड़े से साफ जाहिर होता है कि एक सब्स्क्राइबर से जो भी कमाई होती है उसका सबसे बड़ा हिस्सा इंटरनेट डेटा से आता है। Rental सिर्फ 1.00 रुपया। VAS 1.27 रुपया। Call revenue 14.84 रुपये। लेकिन data 171.57 रुपये के आसपास है। इसका मतलब है कि टेलीकॉम कंपनियों का रेविन्यू मॉडल ही डेटा का आधारित है।
अब सोचिए कि जब एक 2G यूजर जब भी अपने फोन में रिचार्ज कर रहा है तो वह इसके लिए पैसे दे रहा है? वह यूजर कॉल कर रहा है, एसएमएस का लाभ ले रहा है, लेकिन डेटा की खपत है ही नहीं। लेकिन जब वो डेटा के साथ आने वाले प्लान को खरीदता है तो प्लान की डेटा की वैल्यू भी शामिल होती है, इससे कंपनी का सीधा फायदा जुड़ा है, शायद इसी कारण TRAI के प्रस्ताव का विरोध किया जा रहा है?
अगर आप एयरटेल और Vi के डेटा कवरेज को देखने के लिए आधिकारिक वेबसाइटों पर जाते हैं तो आपको जानकारी मिलती है कि Airtel और Vi दोनों का 2G coverage और 4G coverage area भारत में लगभग एक समान है। यानि जहाँ 2G है वहाँ 4G नेटवर्क भी है। हालांकि, इन जगहों पर आपको 3G कहीं भी देखने को नहीं मिलने वाला है। अब यहाँ सवाल उठता है कि जब कंपनियों की ओर से 3G network को पूरी तरह से बंद कर दिया गया तो 2G Network के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है?
Airtel Network Coverage 2G/4G in India
Vi Network Coverage 4G/2G in India
असल में, मुझे तो यह सब एक चाल जैसी लगती है। टेलीकॉम कंपनियां जानती हैं कि देश में लगभग लगभग 20 करोड़ के आसपास 2G Feature Phone इस्तेमाल करने वाले लोग हैं, अब अगर इतने लोगों के लिए नेटवर्क को बंद कर दिया जाता है तो क्या होने वाला है आप जान ही चुके हैं। कंपनियां एक ही दिन में अर्श से फर्श पर आ जाने वाली हैं। इसके अलावा वह यह भी जानती हैं कि वो डेटा का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, ऐसे में कंपनियों को अपनी सेवा न देने के लिए भी पैसे मिल रहा है। इससे अच्छा और क्या ही हो सकता है? दूसरी तरफ टेलीकॉम कंपनियां यह भी जानती हैं कि 2G फीचर फोन इस्तेमाल करने वाले या तो बुजुर्ग लोग हैं, या देहात और दूर दराज के इलाकों में रहने वाले लेबर क्लास लोग हैं जो स्मार्टफोन पर स्विच नहीं कर सकते हैं। लेकिन वह कभी यह सवाल नहीं करने वाले हैं कि जो सेवा वह इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, उसके लिए पैसे क्यों दिए जाएं। ऐसे में यह सब चल रहा है और कंपनियों को इसका मोटा फायदा हो रहा है।
मेरे यहाँ कुछ सवाल भी हैं! वॉयस और एसएमएस के प्लांस को सभी वैलिडीटी के साथ पेश करने का प्रस्ताव टेलीकॉम कंपनियों को सही नहीं लग रहा है तो उन्होंने पूरे देश में अभी तक 2G नेटवर्क को जिंदा क्यों रखा हुआ है? अगर आपको डेटा को साथ में देना ही है तो आप केवल और केवल 4G नेटवर्क को ही चलाएं, 2G को 3G की तरह पूरी तरह से बंद ही कर दें। इसके लिए एक ही बात कही जा सकती है कि अपने पेट पर लात कौन ही मारता है? अब आगे आप समझदार हैं। सब समझते ही हैं।
आर्टिकल में AI से निर्मित इमेज इस्तेमाल हुई हैं।