पिछले कुछ महीनों से जब भी किसी फोन ब्रांड की नई प्राइस लिस्ट सामने आती है, एक ही रिएक्शन मिलता है, ‘फिर से महंगा हो गया!’ और सच कहूं तो यह रिएक्शन गलत भी नहीं है। 2026 की शुरुआत से लेकर अब तक Samsung, Vivo, iQOO, OnePlus, Nothing, Xiaomi जैसे लगभग लगभग हर बड़े ब्रांड में अपने फोन्स की कीमत बढ़ा दी है। कहीं यह बढ़ोतरी 1,000 रुपये की सीमित रही तो कहीं 8,000 रुपये तक भी जा पहुंची। OnePlus 15R की अगर बात की जाए तो यह फोन पिछले पांच महीनों में तीन बार नई कीमत के साथ देखा जा चुका है, इस समय यह अपने लॉन्च प्राइस से लगभग लगभग 7,000 रुपये ज्यादा प्राइस में सेल क्या जा रहा है। अब जब हर तरफ से यही खबरें आ रही हों, तो सवाल उठना लाजमी है, क्या अब लोग नए फोन की जगह रिफर्बिश्ड यानी सेकंड हैंड फोन तो खरीदने नहीं वाले? क्या आने वाले समय में स्मार्टफोन का बाजार एक बड़ी करवट तो लेने नहीं वाला? इस सवाल का जवाब जितना सीधा लगता है, असल में उतना है नहीं। इसे समझने के लिए हमने Counterpoint Research के तरुण पाठक और CyberMedia Research (CMR) के प्रभु राम आदि से बार की है, दोनों की राय सुनने के बाद तस्वीर कहीं ज्यादा दिलचस्प हो जाती है, आइए जानते है कि आखिर भविष्य में क्या हो सकता है?
इससे पहले कि हम एक्सपर्ट्स की राय पर आएं, यह समझना जरूरी है कि आखिर यह प्राइस हाइक हो क्यों रही है। इस पूरे मसले की जड़ किसी एक कंपनी की स्ट्रैटेजी में नहीं, बल्कि दुनिया भर में AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती डिमांड में छिपी है। Google, Microsoft, Meta, Amazon जैसी कंपनियां अपने AI सर्वर्स के लिए भारी मात्रा में हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और हाई-एंड DRAM खरीद रही हैं, अब आप सोच रहे होंगे कि चिप से स्मार्टफोन के प्राइस का क्या लेना देना? असल में, जब प्रीमियम रेट पर चिप्स पहले ही खरीदे जा रहे हैं तो उन्हें सस्ते में बेचने का सवाल ही नहीं उठता है, और उस प्रीमियम प्राइस पर स्मार्टफोन्स कंपनी अगर चिप खरीदेंगी तो जाहिर है कि स्मार्टफोन के प्राइस में उसे ऐड करेंगी। अब बेशक यह सीधा नजर ना आ रहा हो लेकिन असर स्मार्टफोन्स के प्राइस पर पड़ने वाला है। अभी की स्थिति को देखते हैं तो यह साफ हो जाता है कि Samsung, SK Hynix और Micron जैसी चिप बनाने वाली कंपनियों ने अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी फोन्स के बजाय AI चिप्स की तरफ मोड़ दी, क्योंकि वहां मार्जिन कहीं ज्यादा है।
— Carl Pei (@getpeid) January 14, 2026
Nothing के CEO कार्ल पेई (Carl Pei) ने तो जनवरी में ही चेतावनी दे दी थी कि साल के अंत तक मेमोरी मॉड्यूल की कीमत पांच गुना तक बढ़ सकती है, और ब्रांड्स के पास सिर्फ दो रास्ते बचेंगे, या तो कीमत 30 फीसदी तक बढ़ाओ, या स्पेसिफिकेशन आदि में कटौती करो। यह सिर्फ बजट और मिड-रेंज फोन्स की कहानी नहीं है, Apple भी इससे नहीं बच पाया।
इस समय के Apple के CEO टिम कुक ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि प्राइस हाइक अब ‘टाला नहीं जा सकता’, और इसे अपने 40 साल के सप्लाई चेन करियर में देखी सबसे बड़ी उथल-पुथल बताते हुए ‘सौ साल में एक बार आने वाली बाढ़’ जैसा करार दिया। TechInsights के मुताबिक iPhone 17 Pro में मेमोरी और स्टोरेज की लागत पिछले साल करीब 50 डॉलर थी, जो आने वाले iPhone 18 Pro में बढ़कर लगभग 200 डॉलर तक पहुंच सकती है।
जब iPhone जैसे प्रीमियम प्रोडक्ट पर भी यह असर दिख रहा है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि बजट और मिड-रेंज सेगमेंट, जहां मार्जिन पहले से ही कम होता है, वहां यह दबाव कहीं ज्यादा महसूस होगा।
Counterpoint Research के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक के मुताबिक भारत में बिक रहे 85 फीसदी से ज्यादा मौजूदा स्मार्टफोन मॉडल्स की कीमतें पहले ही बढ़ाई जा चुकी हैं, और औसतन यह बढ़ोतरी लगभग 15 फीसदी की रही है। कुछ डिवाइसेज तो आने वाले महीनों में करीब 20 फीसदी तक और महंगे हो सकते हैं। सबसे ज्यादा असर नए लॉन्च हुए मॉडल्स पर दिख रहा है, जो अपने पुराने वर्जन के मुकाबले 30 से 40 फीसदी तक महंगे में लॉन्च किए जा रहे हैं, या किए जाएंगे।
इसी वजह से पाठक का मानना है कि यह प्राइस हाइक भारत जैसे प्राइस-सेंसिटिव मार्केट में रिफर्बिश्ड और सेकंड हैंड फोन्स की तरफ शिफ्ट को और तेज करने वाला है। पाठक ने बताया, “जैसे-जैसे नए स्मार्टफोन की कीमत बढ़ती जा रही है, रिफर्बिश्ड डिवाइस एक कहीं ज्यादा आकर्षक वैल्यू प्रपोजिशन बनते जा रहे हैं। कुछ कंज्यूमर जो नया Android स्मार्टफोन लेने की सोच रहे थे, वे उसी बजट में रिफर्बिश्ड iPhone चुन सकते हैं, जबकि कुछ ऐसा रिफर्बिश्ड Android डिवाइस चुनेंगे जो उसी बजट में बेहतर स्पेसिफिकेशन या फीचर्स के साथ आता है।”
पाठक के मुताबिक इसका फायदा Apple और Android को मिलेगा, बस यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन बायर को कितनी बेहतर वैल्यू दे पाता है। उन्होंने बताया कि Counterpoint Research का अनुमान है कि 2026 में भारत का रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन मार्केट सालाना आधार पर करीब 12 फीसदी बढ़ सकता है, जबकि नए फोन का मार्केट करीब 11 फीसदी की गिरावट आ सकती है। उनके हिसाब से यह साल भारत के सेकेंडरी स्मार्टफोन मार्केट के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। पाठक यह भी बताते हैं कि प्रीमियम Android फोन्स की कीमतें अब iPhone लाइनअप के काफी करीब पहुंच चुकी हैं, और जैसे-जैसे यह गैप कम होगा, Apple को अपनी ब्रांड इमेज और एस्पिरेशनल अपील की वजह से बढ़त मिलती रहेगी।
यह ट्रेड डाउन है, ट्रेड आउट नहीं!
हालांकि हर एक्सपर्ट इसे ‘रिफर्बिश्ड बूम’ के तौर पर नहीं देखता है। वाइस प्रेसिडेंट (VP)- इंडस्ट्री रिसर्च ग्रुप, साइबरमीडिया रिसर्च (CMR) के प्रभु राम की राय इससे थोड़ी अलग और काफी यूनीक है। उनका कहना है कि बढ़ती कीमतें डिमांड को तोड़ नहीं रहीं, बल्कि उसे शहर के हिसाब से नए सिरे से गढ़ रही हैं। प्रभु राम बताते हैं, “हमारे चैनल और मार्केट चेक्स यह बताते हैं कि टियर-1 शहरों के कंज्यूमर अब भी प्रीमियम डिवाइसेज की तरफ अपग्रेड करना जारी रखेंगे, जबकि टियर-2 और टियर-3 से आगे के बायर प्राइस को लेकर ज्यादा सतर्क हो रहे हैं, वे अपग्रेड टालकर EMI, एक्सचेंज ऑफर्स और फेस्टिव स्कीम्स पर निर्भर हो रहे हैं। आने वाले समय में भी यह डायनेमिक बना रह सकता है, और छोटे शहर ही ग्रोथ का मुख्य इंजन बने रहेंगे।”
CMR के अनुमान के हिसाब से 7,000 से 25,000 रुपये वाला वैल्यू सेगमेंट अभी भी सबसे ज्यादा वॉल्यूम वाला माना जा सकता है, जबकि 25,000 से 50,000 रुपये वाला प्रीमियम सेगमेंट एस्पिरेशनल 5G अपग्रेड्स की वजह से Android के भीतर सबसे तेज ग्रोथ दिखा रहा है। प्रभु राम के मुताबिक भारत का ओवरऑल स्मार्टफोन मार्केट कैलेंडर ईयर 2026 में करीब 10 फीसदी तक सिकुड़ सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह साल रिफर्बिश्ड डिवाइसेज के लिए किसी ब्रेकआउट जैसा होगा।
उन्होंने इसे साफ शब्दों में कहा है कि, “EMI, एक्सचेंज और ऑफर्स ही असल में इस दबाव को सोख रहे हैं, सेकंड हैंड खरीद नहीं। रिफर्बिश्ड डिमांड में मामूली बढ़त जरूर आएगी, लेकिन असली कहानी यह है कि भारत नए फोन मार्केट से बाहर नहीं जा रहा, बल्कि उसी के भीतर ट्रेड डाउन कर रहा है।”
तरुण पाठक और प्रभु राम की राय भले ही अलग-अलग दिशाओं में जाती दिखे, लेकिन एक बात पर दोनों पूरी तरह एकमत नजर आते हैं, मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों की वजह से स्मार्टफोन की कीमतों पर दबाव 2026 भर बना रहेगा, और भारत का नया स्मार्टफोन मार्केट इस साल सुस्ती की तरफ जाएगा, चाहे इसका आंकड़ा 10 फीसदी हो या 11 फीसदी, गिरावट देखने को मिलने वाली ही है। दोनों यह भी मानते हैं कि कंज्यूमर अब खरीदारी से पहले पहले से कहीं ज्यादा सोच-समझकर फैसला लेगा, चाहे वह वैल्यू रिफर्बिश्ड फोन से मिले, एक्सचेंज ऑफर से, EMI प्लान से, या फिर सीधे डिस्काउंट से।
फर्क सिर्फ इतना है कि पाठक इसे रिफर्बिश्ड मार्केट के उभरने के मौके के तौर पर देखते हैं, जबकि प्रभु राम इसे नए फोन मार्केट के भीतर ही एक री-अरेंजमेंट मानते हैं। दोनों नजरिए गलत नहीं हैं, बस अलग-अलग शहरों और अलग-अलग बायर सेगमेंट पर लागू होते हैं।
अगर इसे एक लाइन में समेटना हो, तो यही कहा जा सकता है कि स्मार्टफोन महंगे जरूर हो रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूरा बाजार एक ही रफ्तार से सेकंड हैंड फोन्स की तरफ शिफ्ट हो जाएगा। बड़े शहरों का बायर अब भी नए और प्रीमियम फोन की तरफ जाता रहेगा, जबकि छोटे शहरों और बजट-सेंसिटिव बायर्स के लिए रिफर्बिश्ड फोन, EMI और एक्सचेंज ऑफर्स, तीनों ही रास्ते खुले रहेंगे। असल में यह किसी एक ट्रेंड की कहानी नहीं, बल्कि हर शहर और हर बजट के हिसाब से अलग-अलग रणनीति की कहानी है।
अगली बार जब आप कोई नया फोन खरीदने का प्लान बनाएं, तो सिर्फ लॉन्च प्राइस मत देखिए, थोड़ा एक्सचेंज ऑफर्स, EMI स्कीम्स और भरोसेमंद रिफर्बिश्ड ऑप्शंस पर भी नजर डाली जा सकती है, शायद वहीं आपका असली फायदा छिपा हो।
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