Ton Meaning in AC: गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है और राहत पाने के लिए अब कूलर के साथ-साथ AC भी चलने लगे हैं. हालांकि, कई लोग मार्च-अप्रैल तक पंखा और कूलर से काम चला लेते हैं. लेकिन मई-जून की तेज गर्मी में सिर्फ AC ही राहत देता है. अप्रैल में ही तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंचने लगा है, इसलिए घर से लेकर ऑफिस तक AC का इस्तेमाल बढ़ गया है.
AC खरीदते समय एक सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है कि आपके घर में कितने टन का AC लगा है या आप कितने टन का AC खरीद रहे हैं. लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं समझते कि जब AC का वजन इतना कम होता है तो उसमें टन का क्या मतलब है.
सबसे पहले यह समझ लेना जरूरी है कि AC में इस्तेमाल होने वाला Ton उसके वजन से जुड़ा नहीं होता. आम तौर पर 1 टन का मतलब 1000 किलोग्राम होता है, लेकिन AC में इसका मतलब बिल्कुल अलग होता है. AC में Ton का सीधा संबंध उसकी कुलिंग कैपिसिटी से होता है. यानी आपका AC एक घंटे में कितनी गर्मी बाहर निकाल सकता है, यही उसकी टन क्षमता तय करती है.
जब भी आप नया AC खरीदते हैं, तो सबसे ज्यादा चर्चा 1 टन, 1.5 टन या 2 टन AC को लेकर होती है. इसका कारण यह है कि AC की कूलिंग कैपिसिटी ही तय करती है कि वह कितने बड़े कमरे को ठंडा कर पाएगा. सीधी भाषा में समझें तो जितना ज्यादा Ton होगा, उतना ज्यादा एरिया AC आराम से ठंडा कर पाएगा.
एयर कंडीशनर में 1 टन कूलिंग कैपिसिटी का मतलब होता है कि वह एक घंटे में 12,000 British Thermal Units यानी BTU जितनी गर्मी को बाहर निकाल सकता है. इसे आसान भाषा में समझें तो यह उतनी गर्मी होती है जितनी एक दिन में 1 टन बर्फ को पिघलाने में लगती है.
एक जगह ध्यान देने वाली बात यह है कि अलग-अलग टन के AC की Cooling Capacity भी अलग होती है:
अगर आपका कमरा छोटा है, तो 1 टन या उससे कम क्षमता वाला AC पर्याप्त रहेगा. लेकिन अगर कमरा बड़ा है या हॉल है, तो 1.5 टन या 2 टन AC लेना ज्यादा सही रहेगा.
गलत Ton का AC लेने से या तो कमरा सही से ठंडा नहीं होगा या फिर बिजली का बिल बेवजह बढ़ जाएगा. ज्यादातर लोग AC खरीदते वक्त सिर्फ कीमत और ब्रांड देखते हैं, लेकिन Ton समझे बिना खरीदना सीधी गलती है. अगर आपने गलत कैपेसिटी चुन ली तो या तो कूलिंग बेकार मिलेगी या बिजली का खर्च बढ़ेगा, इसलिए खरीदने से पहले यह बेसिक चीज साफ होनी चाहिए.
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