‘PM फ्री मोबाइल योजना’ से महिलाओं और छात्राओं को मुफ्त स्मार्टफोन! जान लें पूरी बात, PIB ने बताई सच्चाई

“मुफ्त का चंदन, घिस मेरे नंदन” यह कहावत पुरानी है, लेकिन ऑनलाइन ठगों ने इसे नया रूप दे दिया है. क्या आपके WhatsApp या Facebook पर भी कोई ऐसा मैसेज आया है जिसमें दावा किया गया है कि मोदी सरकार ‘प्रधानमंत्री फ्री मोबाइल योजना’ के तहत सबको मुफ्त स्मार्टफोन बांट रही है? अगर हां, तो सावधान हो जाइए.

यह कोई सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि आपकी मेहनत की कमाई और पर्सनल डेटा चुराने का एक नया डिजिटल जाल है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बस एक फॉर्म भरिए और घर बैठे मोबाइल पाइए. लेकिन सच यह है कि ऐसा कोई फॉर्म भरने से मोबाइल तो नहीं आएगा, लेकिन आपका बैंक खाता जरूर खाली हो सकता है.

क्या है वायरल दावा?

सोशल मीडिया (खासकर YouTube और Facebook) पर ऐसे वीडियो की बाढ़ आ गई है जिनमें कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार ने एक नई योजना शुरू की है. इसमें कहा जा रहा है कि सरकार महिलाओं और छात्राओं को प्राथमिकता देते हुए मुफ्त स्मार्टफोन दे रही है.

आपको बस एक ऑनलाइन फॉर्म भरना है, अपना नाम और पता देना है, और फोन आपके घर पहुंच जाएगा. वीडियो में “सीमित समय के लिए ऑफर” और “जल्दी करें” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि लोग बिना सोचे-समझे क्लिक कर दें.

ठगी का तरीका

ये स्कैमर्स तकनीक के साथ अपग्रेड हो गए हैं. इनका तरीका बहुत ही व्यवस्थित होता है.

  • स्टेप 1: एक लुभावना वीडियो या पोस्ट वायरल किया जाता है.
  • स्टेप 2: उसमें एक फर्जी लिंक (Link) दिया जाता है जो दिखने में सरकारी वेबसाइट जैसा लग सकता है.
  • स्टेप 3: जैसे ही आप लिंक पर क्लिक करते हैं, आपसे आपका आधार नंबर, मोबाइल नंबर और कभी-कभी बैंक डिटेल्स मांगी जाती हैं.
  • स्टेप 4: स्कैमर्स कहते हैं कि “रजिस्ट्रेशन फीस” के नाम पर छोटा सा अमाउंट (जैसे 10-20 रुपये) दें या बस अपना डेटा सबमिट करें.

एक बार डेटा मिलने के बाद, वे आपके बैंक खाते में सेंध लगा सकते हैं या आपकी पहचान चोरी कर सकते हैं.

PIB ने किया खंडन

इस भ्रम को तोड़ने के लिए प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने सामने आकर सच्चाई बताई है. PIB फैक्ट चेक ने साफ शब्दों में कहा है कि “प्रधानमंत्री फ्री मोबाइल योजना” नाम की कोई भी योजना केंद्र सरकार द्वारा नहीं चलाई जा रही है. सरकार ने अभी तक नागरिकों को मुफ्त स्मार्टफोन बांटने के लिए कोई नेशनवाइड प्रोग्राम घोषित नहीं किया है. PIB ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर चेतावनी दी है कि ऐसे फर्जी लिंक पर क्लिक न करें.

असली और नकली में फर्क कैसे करें?

आम आदमी अक्सर सरकारी लोगो देखकर धोखा खा जाता है. असली सरकारी वेबसाइट्स के अंत में हमेशा ‘.gov.in’ या ‘.nic.in’ होता है. अगर लिंक ‘.com’, ‘.xyz’ या ‘.org’ पर खत्म हो रहा है, तो वह 100% फर्जी है. आपको बता दें कि कोई भी असली सरकारी योजना रजिस्ट्रेशन के लिए आपसे OTP या बैंक खाते का पासवर्ड नहीं मांगती.

अगर मैसेज आए तो क्या करें?

  • इग्नोर करें: ऐसे किसी भी मैसेज को फॉरवर्ड न करें और लिंक पर क्लिक न करें.
  • वेरीफाई करें: हमेशा आधिकारिक वेबसाइट (जैसे india.gov.in) पर जाकर स्कीम की जांच करें.
  • शिकायत करें: अगर आपको लगता है कि यह साइबर फ्रॉड है, तो तुरंत cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें.

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Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम (Sudhanshu Shubham) डिजिटल मीडिया में पिछले 6 साल से सक्रिय हैं. टाइम्स ग्रुप (Times Group) में आने से पहले वह न्यूज18 (News18) और आजतक (Aaj Tak) जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक के अलावा इन्होंने हाइपर लोकल बीट, डेटा एनालिसिस का भी काम किया है.

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