देशभर में लगातार बढ़ती गर्मी के बीच एयर कंडीशनर (AC) में आग लगने की घटनाएं तेजी से सामने आ रही हैं। घरों और दफ्तरों दोनों जगह ऐसे मामलों में इजाफा देखा जा रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन घटनाओं के पीछे मुख्य कारण एसी की सही तरीके से देखभाल न होना, इलेक्ट्रिकल खराबी, लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल, बिजली आपूर्ति में उतार-चढ़ाव और ओवरहीटिंग जैसी चीज़ें होती हैं। हालांकि, गर्मियों में कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर और शुरुआती संकेतों को समझकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
तेज गर्मी के दौरान लोग एसी को लंबे समय तक लगातार चलाते हैं, जिससे उसके अंदर मौजूद तारों, फिल्टर और कंप्रेसर जैसे हिस्सों पर दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा, सिस्टम में जमा धूल और खराब वेंटिलेशन भी नुकसान को बढ़ाते हैं, जिससे खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। यही कारण है कि छोटी-छोटी तकनीकी दिक्कतें गर्मी के चरम मौसम में बड़ी समस्या का रूप ले सकती हैं।
अक्सर एसी खराब होने से पहले कुछ संकेत देता है, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर एसी से जलने जैसी बदबू या धुआं निकलता है, तो यह ओवरहीटिंग या इलेक्ट्रिकल समस्या का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, मशीन से आने वाली असामान्य आवाजें ढीले या खराब पुर्जों की ओर इशारा करती हैं। बार-बार एसी को ऑन-ऑफ करना भी नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि इससे अंदरूनी सिस्टम पर असर पड़ता है। वहीं, अगर कूलिंग कम हो रही है या असमान रूप से ठंडक मिल रही है, तो यह एयरफ्लो में रुकावट या गैस लीकेज का संकेत हो सकता है।
गर्मियों की शुरुआत के साथ ही एसी की सफाई और सर्विसिंग बेहद जरूरी हो जाती है। धूल से भरे फिल्टर एयरफ्लो को बाधित करते हैं, जिससे एसी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और कूलिंग क्षमता घट जाती है। इससे बिजली की खपत भी करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इसलिए समय-समय पर फिल्टर की सफाई जरूरी है।
आधुनिक एसी में कई स्मार्ट फीचर्स दिए जाते हैं, जो बिजली बचाने में मददगार साबित होते हैं। स्लीप मोड, टाइमर और इको मोड जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करके एसी को जरूरत के अनुसार चलाया जा सकता है और तय तापमान मिलने पर यह खुद बंद भी हो सकता है।
अगर कमरा अच्छी तरह से सील रहेगा, तो बाहर की गर्म हवा अंदर नहीं आएगी। इससे एसी पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा और यह ज्यादा सुरक्षित तरीके से काम करेगा।
एसी को बेहतर कंडीशन में बनाए रखने के लिए साल में कम से कम एक बार सर्विसिंग जरूर करानी चाहिए। इसमें गैस लेवल की जांच, कंडेंसर कॉइल की सफाई, फैन और ब्लोअर की जांच के साथ-साथ इलेक्ट्रिकल कनेक्शन की भी जांच शामिल होनी चाहिए।
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