खेती से जुड़ी जानकारी के लिए अब अलग-अलग दफ्तरों और वेबसाइटों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। केंद्र सरकार ने किसानों के लिए एक नया AI आधारित डिजिटल टूल Bharat-VISTAAR लॉन्च कर दिया है, इसकी घोषणा अभी यूनियन बजट में देश की वित्त मंत्री ने की थी। Bharat-Vistaar का लॉन्च केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने किया है। जानकारी के लिए आपको बताते चलते हैं कि इसके लिए सरकार की ओर से 150 रुपये देने की भी बात कही गई थी, आइए जानते है कि आखिर यह क्या है और कैसे रियल टाइम में देश के किसानों की मदद करने वाला है।
Bharat-VISTAAR (Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources) एक AI-पावर्ड, कई भाषाओं में काम करने वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो किसानों को उनकी भाषा में खेती से जुड़ी जरूरी सभी जानकारी देने वाला है। यह AgriStack पोर्टल और ICAR की वैज्ञानिक सलाह को एक साथ जोड़कर एक ही डिजिटल दरवाजा उपलब्ध कराता है।
असल में, इस प्लेटफॉर्म की मदद से किसानों को अलग अलग जगहों, दफ्तरों और इंटरनेट पर जाने की जरूरत नहीं है, एक ही जगह पर किसानों को फसल योजना, कीट-रोग सलाह, मौसम पूर्वानुमान, मंडी भाव, सरकारी योजनाओं की पात्रता, आवेदन और शिकायत स्थिति के अलावा अन्य बहुत कुछ एक ही छत के तले मिल जाने वाला है। अभी तक के लिए इन सभी चीजों के लिए किसानों को अलग अलग जगहों पर जाना पड़ता था, लेकिन अब इस समस्या का निवारण सरकार की ओर से Bharat Vistaar के तौर पर दे दिया गया है।
अभी तक किसान को अलग-अलग जगह से जानकारी लेनी पड़ती थी, हालांकि, अब सभी जानकारी एक ही जगह पर मिल जाने वाली है। जैसे अभी तक किसानों को PM-KISAN की स्थिति अलग से लेनी पड़ती थी, अलावा फसल बीमा के लिए भी अलग अलग प्लेटफॉर्म पर जाना पड़ता था, मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड अलग से लेना पड़ता था, मौसम और मंडी के भाव के लिए अलग अलग जगहों पर जाना पड़ता था।
कई बार तो ऐसा भी होता था कि पात्र होने के बावजूद भी किसानों को किसान योजना का लाभ नहीं मिल पाता था। हालांकि, Bharat-VISTAAR इस बिखरी जानकारी को एक प्लेटफॉर्म पर पर सभी किसानों को उनकी भाषा में उपलब्ध कराने का बेहतरीन साधन है।
लॉन्च के समय ये प्रमुख केंद्रीय योजनाएं जुड़ी हैं, जैसे:
शुरुआत में हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध रहेगा। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि अगले 3 महीनों में यह तमिल, बंगाली, असमिया, कन्नड़, और छह महीनों में कुल 11 भाषाओं में सेवा देने की योजना है।
अगर यह सिस्टम सही तरीके से काम करता है, तो यह खेती के लिए UPI जैसा बदलाव साबित हो सकता है। जहां जानकारी और सहायता एक कॉल दूर होगी।