गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका है और यह किसी पर भी रहम नहीं खा रहा है. दिल्ली, नोएडा, लखनऊ और अन्य जैसे शहरों में तो तापमान अभी से 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है और ऐसे में दोपहर के समय किसी तरह की ठंडक के बिना रहना लगभग नामुमकिन सा लगने लगता है. यह तो हम सभी जानते हैं कि एयर कंडीशनर से अच्छी कूलिंग कोई नहीं दे सकता, लेकिन सच्चाई यह भी है कि हर कोई उसके महंगे बिजली के बिलों को नहीं झेल सकता और पर्मानेंट इंस्टॉलेशन नहीं करवा सकता। और यहीं से शुरू होती है ज्यादातर ग्राहकों के लिए कन्फ्यूज़न, कि उन्हें एयर कूलर की तरफ जाना चाहिए या फिर पोर्टेबल एसी पर ज्यादा खर्चा करना बेहतर होगा? वैसे तो ये दोनों ही कमरे को ठंडा करते हैं, दोनों को ही चलाकर एक जगह से दूसरी जगह रखा जा सकता है और दोनों ही पहली नज़र में प्रैक्टिकल लगते हैं, लेकिन असलियत में दोनों का अनुभव बेहद अलग होता है. आइए जानें कैसे…
एयर कूलर हवा को ठंडा करने के लिए वाष्पीकरण प्रक्रिया का इस्तेमाल करता है. एयर कूलर गर्म हवा को अपनी तरफ खींचकर पानी से गीले किए गए कूलिंग पैड्स से गुज़ारता है जिससे हवा ठंडी होकर पूरे कमरे में फ़ैल जाती है.
खूबी: कूलर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एसी के मुकाबले बहुत कम बिजली खपत करता है और उससे काफी सस्ता भी आता है. एयर कूलर सूखे मौसम और ऐसे कमरों के लिए अच्छे होते हैं जहां वेंटिलेशन अच्छा हो.
खामी: हालांकि, इनमें एक कमी ज़रूर होती है. नमी वाले मौसम में, खासकर बरसात के सीज़न में, अक्सर ऐसा लगता है जैसे कूलर चिपचिपी हवा फेंक रहा हो. इसके अलावा आपको इसकी पानी की टंकी भी बार-बार भरनी पड़ती है.
पोर्टेबल एसी दरअसल कूलर की तरह पहियों के साथ आने वाला एक कॉम्पैक्ट एयर कंडीशनर होता है. यह एक साधारण स्प्लिट या विंडो एसी की तरह कम्प्रेसर और रेफ्रिजरेंट का इस्तेमाल करके हवा को ठंडा करता है.
खूबी: पोर्टेबल एसी ज्यादातर दमदार और नमी वाले मौसम में भी लगातार कूलिंग देता है. ये एसी किरायदारों के लिए और उन लोगों के लिए बढ़िया होते हैं जो पर्मानेंट इंस्टॉलेशन नहीं चाहते।
खामी: पोर्टेबल एसी लेने के लिए ज्यादा सोचना इसलिए पड़ता है क्योंकि यह काफी महंगा आता है. साथ ही यह ज्यादा बिजली खपत भी करता है और आमतौर पर थोड़ा शोर भी करता है. इसके अलावा गर्म हवा को बाहर निकालने के लिए इसे एक एग्ज़ॉस्ट पाइप की ज़रूरत पड़ती है जिसे खिड़की के पास रखना पड़ता है.
अगर आपकी पहली प्राथमिकता बिजली और पैसों की बचत करता है, तो एयर कूलर बेहतर रहेगा। वहीं अगर आप इस तपती गर्मी में दमदार कूलिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं, तो यहां पोर्टेबल एसी की जीत होती है.
एयर कूलर खरीदने में सस्ते और चलाने में आसान ज़रूर होते हैं, लेकिन उन्हें वेंटिलेशन की ज़रूरत होती है और सूखी हवा में ही ज्यादा अच्छा काम करते हैं. जबकि दूसरी और पोर्टेबल एसी ज्यादा तेज़ी से ठंडक करता है, सभी मौसमों में काम करता है और पूरी तरह एसी वाला अनुभव देता है, लेकिन बिजली का बिल ज्यादा आता है.
अगर दिल्ली की गर्मी ने आपके घर को अभी से ओवन बना दिया है और ऐसे में आप इंस्टेंट राहत चाहते हैं, तो ऐसे में पोर्टेबल एसी आपको जन्नत वाला एहसास दे सकता है. लेकिन अगर आप अपनी जेब पर बोझ डाले बिना ठंडा रहना चाहते हैं, तो एयर कूलर भी एक स्मार्ट और प्रैक्टिकल चॉइस हो सकता है. आखिर में सही विकल्प आपके कमरे के साइज़, बजट और इस बात पर निर्भर करता है कि आप गर्मी से कितने परेशान हैं.