OTT के दौर में जहां दर्शकों के पास क्राइम, सस्पेंस और डार्क थीम वाली वेब सीरीज की भरमार है, वहीं हल्की-फुल्की कॉमेडी का मजा आज भी अलग ही सुकून देता है। पुरानी हिंदी फिल्मों की बात ही कुछ और थी। साधारण कहानियां, यादगार किरदार और ऐसे गाने जो वर्षों बाद भी लोगों की जुबान पर बने रहते हैं। इसी नॉस्टैल्जिया को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए OTT प्लेटफॉर्म अल्ट्रा प्ले ने डेविड धवन स्पेशल फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत की है।
90 के दशक में डेविड धवन ने कॉमेडी फिल्मों की एक अलग पहचान बनाई। उनका मनोरंजन का फॉर्मूला उस समय जितना सफल था, आज भी उतना ही पसंद किया जाता है। आइए जानते हैं उनकी पांच ऐसी फिल्मों के बारे में, जिन्हें कॉमेडी लवर्स जरूर देखना चाहेंगे।
1999 में आई यह फिल्म दो नटखट भाइयों की कहानी पर आधारित है, जिनकी भूमिकाएं संजय दत्त और गोविंदा ने निभाई थीं। दोनों अपने सख्त मिजाज पिता, यानी कादर खान, को परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। अपनी प्रेम कहानियों को सफल बनाने के लिए दोनों कई तरह के झूठ और मजेदार प्लान बनाते हैं। खास तौर पर वह हिस्सा, जिसमें गोविंदा संजय दत्त के चाचा बनते हैं, दर्शकों को खूब गुदगुदाता है। वहीं, सतीश कौशिक का ‘पप्पू पेजर’ वाला किरदार आज भी फिल्म की पहचान माना जाता है।
फैमिली एंटरटेनमेंट से भरपूर फिल्मों की बात हो और ‘राजा बाबू’ का नाम न आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। इस फिल्म में गोविंदा ने एक भोले-भाले गांव के युवक का किरदार निभाया था, जिसे फिल्मों का खास शौक रहता है। फिल्म में गोविंदा और शक्ति कपूर की जोड़ी ने जबरदस्त मनोरंजन किया। शक्ति कपूर का ‘नंदू’ वाला किरदार आज भी दर्शकों को याद है। भावनात्मक दृश्यों और हास्य का संतुलन इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत रहा।
डेविड धवन की सबसे लोकप्रिय कॉमेडी फिल्मों में ‘कुली नंबर 1’ का नाम खासतौर से लिया जाता है। कहानी एक ऐसे कुली की है, जिसे एक चतुर मैचमेकर, जिसकी भूमिका सदाशिव अमरापुरकर ने निभाई, अमीर कारोबारी बनाकर पेश करता है। इसके पीछे उद्देश्य एक अपमान का बदला लेना होता है। आगे चलकर वह अमीर परिवार की लड़की, यानी करिश्मा कपूर के किरदार से शादी कर लेता है। गोविंदा, कादर खान और शक्ति कपूर की कॉमिक टाइमिंग ने फिल्म को यादगार बना दिया। ‘हुस्न है सुहाना’ और ‘मैं तो रस्ते से जा रहा था’ जैसे गाने आज भी फंक्शन्स और पार्टियों में सुनाई देते हैं।
‘कुली नंबर 1’ की सफलता के बाद आई ‘हीरो नंबर 1’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। फिल्म की कहानी कुछ हद तक हॉलीवुड फिल्मों और बॉलीवुड क्लासिक ‘बावर्ची’ से प्रेरित थी, लेकिन डेविड धवन ने इसे अपने खास अंदाज में पेश किया। कहानी में गोविंदा एक अमीर परिवार के बेटे का किरदार निभाते हैं, जो अपनी गर्लफ्रेंड के रूढ़िवादी परिवार का विश्वास जीतने के लिए नौकर बनकर उनके घर में रहने लगता है। परेश रावल परिवार के मुखिया की भूमिका में नजर आते हैं। गलतफहमियों और हास्य से भरी घटनाएं फिल्म को बेहद मनोरंजक बनाती हैं।
1998 में रिलीज हुई इस फिल्म ने दर्शकों को एक अनोखा कॉमिक अनुभव दिया। इसमें अमिताभ बच्चन और गोविंदा दोनों ने डबल रोल निभाए थे। एक तरफ वे पुलिस अधिकारियों के रूप में दिखाई देते हैं, तो दूसरी तरफ उनके हमशक्ल चोरों के रूप में। अमिताभ बच्चन के गंभीर अंदाज और गोविंदा की चुलबुली कॉमेडी का मेल दर्शकों को खूब पसंद आया। फिल्म में रवीना टंडन और राम्या कृष्णन ने अहम भूमिकाएं निभाईं, जबकि परेश रावल विलेन के रूप में नजर आए। यही वजह रही कि यह फिल्म अपने समय की सबसे चर्चित एंटरटेनर फिल्मों में शामिल हो गई।
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