भारत सरकार ने सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने SUNtosh नाम का एक AI-पावर्ड चैटबॉट लॉन्च किया है, जो WhatsApp के जरिए लोगों को रूफटॉप सोलर से जुड़ी जानकारी और सलाह देगा. यह चैटबॉट प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत शुरू किया गया है और इसका मकसद लोगों के लिए सोलर सिस्टम लगाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है.
अब उपभोक्ताओं को यह समझने के लिए अलग-अलग वेबसाइट्स, कैलकुलेटर या एजेंसियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे कि उनके घर पर कितने किलोवाट का सोलर प्लांट लग सकता है, कितनी सब्सिडी मिलेगी और बिजली बिल में कितनी बचत होगी. SUNtosh यह सारी जानकारी कुछ ही सेकंड में उपलब्ध कराएगा.
SUNtosh को इस्तेमाल करना बेहद आसान है. यूजर्स QR कोड स्कैन करके सीधे WhatsApp पर इस चैटबॉट तक पहुंच सकते हैं.
चैटबॉट को केवल दो जानकारियों की जरूरत होती है:
आपके घर का स्वीकृत बिजली लोड (Sanctioned Load)
आपका हालिया बिजली बिल
इन दोनों जानकारियों के आधार पर SUNtosh तुरंत विश्लेषण करके बताता है कि आपके घर के लिए कितनी क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम उपयुक्त रहेगा.
प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना का लक्ष्य देश के 1 करोड़ घरों तक रूफटॉप सोलर सिस्टम पहुंचाना है. हालांकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी सोलर सिस्टम की लागत, सब्सिडी और संभावित बचत को लेकर भ्रम में रहते हैं.
कई परिवार यह तय नहीं कर पाते कि उनके लिए कौन सा सोलर प्लांट सही रहेगा या फिर निवेश के बाद वास्तव में कितनी बचत होगी.
SUNtosh इसी समस्या का समाधान करने के लिए बनाया गया है. यह लोगों को तकनीकी गणनाओं और जटिल प्रक्रियाओं से बचाते हुए आसान भाषा में जरूरी जानकारी उपलब्ध कराता है.
चूंकि WhatsApp भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म्स में से एक है, इसलिए सरकार ने SUNtosh को इसी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया है. यूजर्स सीधे WhatsApp चैट के जरिए सोलर सिस्टम से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं और तुरंत जवाब प्राप्त कर सकते हैं. इससे लोगों को अलग-अलग पोर्टल्स पर जाने या विशेषज्ञों की तलाश करने की जरूरत कम होगी.
रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के दौरान लोगों को अक्सर सिस्टम की क्षमता, अनुमानित लागत, सब्सिडी और संभावित बचत का आकलन करने में परेशानी होती है. SUNtosh इन सभी जानकारियों को एक ही जगह उपलब्ध कराकर निर्णय लेने की प्रक्रिया को आसान बनाता है. इससे अधिक परिवार सोलर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिल सकता है.
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