बिना मोबाइल टावर के भी चलेगा नेटवर्क? सैटेलाइट से कनेक्ट होंगे फोन, देखें क्या है TRAI का प्रस्ताव
TRAI ने सैटेलाइट नेटवर्क कंपनियों के लिए अलग ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क की सिफारिश की है।
नए प्रस्ताव में Direct-to-Device कनेक्टिविटी को भी बल मिलेगा?
TRAI ने सैटेलाइट नेटवर्क ऑथराइजेशन की अवधि 20 साल रखने का सुझाव दिया है।

जरा सोचिए, आप किसी पहाड़ी इलाके में घूमने गए हैं और अचानक मोबाइल से नेटवर्क गायब हो जाता है। आसपास कोई मोबाइल टावर भी नहीं है। ऐसे में किसी को कॉल करना या इंटरनेट का इस्तेमाल करना नामुमकिन सा हो जाता है। लेकिन आने वाले समय में ऐसी परेशानी कम हो सकती है। असल में, Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव के अंतर्गत टेलीकॉम कंपनियों को सैटेलाइट नेटवर्क इस्तेमाल करने की सुविधा देने और स्मार्टफोन को सीधे सैटेलाइट से जोड़ने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। हालांकि, यह तकनीक अभी सभी मोबाइल यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं हुई है। आइए जानते और समझते हैं कि आखिर TRAI का नया प्रस्ताव क्या है और इससे आम लोगों को कुछ फायदा होने वाला भी है या नहीं।
TRAI ने सैटेलाइट नेटवर्क को लेकर क्या प्रस्ताव दिया है?
TRAI ने 5 नवंबर 2026 को Satellite Communication Network Provider Authorisation नाम से एक नया फ्रेमवर्क बनाने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य सैटेलाइट नेटवर्क तैयार करने वाली कंपनियों और ग्राहकों को टेलीकॉम सेवाएं देने वाली कंपनियों के बीच सहयोग को आसान बनाना है। अगर इस प्रस्ताव को देखा जाए तो इसके अनुसार, सैटेलाइट नेटवर्क कंपनियां अपना इंफ्रास्ट्रक्चर दूसरे टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को उपलब्ध करा सकेंगी। इसके लिए Satellite Communication Network as a Service यानी SCNaaS मॉडल अपनाने की सिफारिश की गई है।
आसान भाषा में समझें तो किसी टेलीकॉम कंपनी को सैटेलाइट नेटवर्क का फायदा देने के लिए जरूरी नहीं होगा कि वह पूरा सैटेलाइट सिस्टम खुद तैयार करे। वह किसी अन्य नेटवर्क प्रोवाइडर के साथ साझेदारी करके इसे अपने ग्राहकों को उपलब्ध करा सकती है। हालांकि, इस नए ऑथराइजेशन के तहत काम करने वाली नेटवर्क कंपनियों को सीधे आम ग्राहकों को टेलीकॉम सेवाएं बेचने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए संबंधित सर्विस ऑथराइजेशन जरूरी होगा।
Direct-to-Device तकनीक से क्या बदलेगा?
TRAI के प्रस्ताव का सबसे दिलचस्प हिस्सा Direct-to-Device यानी D2D कनेक्टिविटी है। आमतौर पर देखा जाए तो मोबाइल फोन आसपास के टेलीकॉम टावर से जुड़कर कॉलिंग और इंटरनेट की सुविधा हासिल करते हैं। लेकिन D2D तकनीक में कम्पैटिबल मोबाइल डिवाइस सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से कनेक्ट हो सकते हैं। इसका फायदा उन इलाकों में मिल सकता है जहां मोबाइल टावर लगाना मुश्किल है। जैसे पहाड़ी क्षेत्र, जंगल, दूरदराज के गांव या ऐसे स्थान जहां सामान्य नेटवर्क अभी तक भी नहीं पहुँच पाया है।
आम मोबाइल और इंटरनेट यूजर्स को कब मिलेगा फायदा?
अगर इन सिफारिशों को सरकार मंजूरी देती है और कंपनियां जरूरी तकनीक विकसित करती हैं, तो भविष्य में दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है। इसका फायदा खासतौर पर उन लोगों को मिल सकता है, जिन्हें कमजोर मोबाइल कवरेज की वजह से लगातार परेशानी होती है। हालांकि, TRAI ने अभी D2D सेवा शुरू होने की डेट , ग्राहकों से ली जाने वाली कीमत या उपलब्ध इंटरनेट स्पीड को लेकर अभी तक के लिए कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि शुरुआती सेवाएं केवल मैसेजिंग और आपातकालीन संपर्क तक सीमित रहेंगी या सामान्य इंटरनेट इस्तेमाल की सुविधा भी देंगी।
अभी के लिए TRAI की सिफारिशों पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग यानी DoT को लेना है। इसके बाद नियम, स्पेक्ट्रम आवंटन और कंपनियों की तैयारियों के आधार पर सेवाएं आगे बढ़ेंगी।
