एक वक्त था जब ‘मेड इन चाइना’ लिखे फोन्स का इस्तेमाल पूरे भारत में किया जा रहा था, आज भी ऐसा ही कुछ चल रहा है, हर भारतीय की जेब में एक चीनी निर्मित फोन है। हालांकि, धीरे धीरे ही सही अब यह तस्वीर बदल रही है। अब जैसे जैसे समय बीत रहा है, यह तस्वीर बदलती ही जा रही है। अब ऐसा लग रहा है कि भारत सरकार की नज़र एक बड़े लक्ष्य पर है। एक नई स्कीम को देखकर तो ऐसा ही कहा जा सकता है। असल में, सरकार की ओर से एक नई स्कीम को लाया जाने वाला है, जो साफ तौर पर दिखा रही है कि भारत को दुनिया का मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर आगे बढ़ रहा है। अभी तक यह सपना मात्र लग रहा था लेकिन अब सरकार के नए कदम के बाद इसे हल्द ही हकीकत बनने में समय नहीं लगने वाला है। आइए जानते है कि क्या बदलने जा रहा है और भारत की ओर से जल्द ही लाई जाने वाली PLI Scheme क्या है।
अगर सूत्रों की मानें तो सरकार जल्द ही मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के लिए PLI 2.0 यानि Production-Linked Incentive Scheme का दूसरा राउंड लाने वाली है। इस स्कीम का बजट होगा 5 अरब डॉलर यानी करीब 47,000 करोड़ रुपये का होने वाला है। ऐसा भी माना जा रहा है कि इस स्कीम को सरकार मई 2026 तक लागू कर सकती है। इस पूरी स्कीम का मुख्य फोकस एक ही है, सरकार इस स्कीम को लाकर यह चाहती है कि मोबाइल फोन के एक्सपोर्ट को दोगुना कर दिया जाए। Electronics और IT मंत्रालय इस वक्त वित्त मंत्री के साथ इस स्कीम पर बातचीत कर रहा है। इसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए Cabinet के सामने पेश किया जाएगा।
अब सभी जानते हैं कि यह पहले PLI Scheme नहीं है, इसके पहले भी इस तरह की स्कीम को लाया जा चुका है। जानकारी के लिए बताते चलें कि पहली स्कीम 2020 में शुरू की गई थी, जिसे Large Scale Electronics Manufacturing यानि LSEM के नाम से जाना जाता था। उस वक्त इसका बजट लगभग 40,995 करोड़ रुपये यानि लगभग लगभग (5.7 अरब डॉलर) का था। इसके अलावा इस स्कीम का मकसद देश में मोबाइल फोन की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना था। इसका नतीजा हमारे सामने है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2025 में अकेले 2.62 लाख करोड़ रुपये यानी करीब 28 अरब डॉलर के स्मार्टफोन भारत से एक्सपोर्ट हुए। फरवरी 2026 तक इस स्कीम के तहत कुल एक्सपोर्ट 6.2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुँच गया, अगर इस आँकड़े को देखा जाए तो यह तय लक्ष्य से 27 प्रतिशत ज़्यादा है। इस पूरी कामयाबी में Apple सबसे आगे रहा। भारत में iPhone का निर्माण अब कोई सपना नहीं बल्कि हकीकत हो चुका है।
असल में, यह स्कीम सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है। इस समय दुनिया भर में सप्लाई चेन का नक्शा बदल रहा है। बड़ी-बड़ी कंपनियाँ चीन से बाहर निकलकर नए मैन्युफैक्चरिंग ठिकाने ढूंढ रही हैं और भारत इस रेस में सबसे आगे है। ऐसे में PLI 2.0 का आना भारत के लिए एक बड़े मौके की तरह है। जाहिर है, अगर यह स्कीम तय वक्त पर आती है और सही तरीके से लागू होती है, तो आने वाले कुछ सालों में ‘मेड इन इंडिया’ लिखा स्मार्टफोन दुनिया के हर कोने में नजर आने वाला है।
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