Factory Reset करने के बाद भी चोरी हो रहा पर्सनल डेटा! सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली खबर

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भारत में सेकेंड-हैंड स्मार्टफोन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और पुराने फोन को बेचने या एक्सचेंज करने का चलन भी लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, इसके साथ यूजर्स के मन में डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता भी बनी हुई है। कई लोगों को डर है कि फैक्ट्री रीसेट करने के बाद भी उनके फोन का निजी डेटा दोबारा रिकवर किया जा सकता है। अब एक नए सर्वे ने इन आशंकाओं को काफी हद तक सही साबित किया है।

The Indian Express के अनुसार, भारतीय री-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Cashify ने 18 जून को जारी अपनी कंज्यूमर सर्वे रिपोर्ट में बताया कि 83.3 प्रतिशत लोगों ने स्मार्टफोन बेचने से पहले फैक्ट्री रीसेट किया था। इसके बावजूद 31 प्रतिशत यूज़र्स ने कहा कि वे किसी फोन से डिलीट किया गया डेटा सफलतापूर्वक रिकवर करने में सक्षम रहे हैं।

8,000 लोगों पर किया गया सर्वे

यह सर्वे 8,000 लोगों के बीच किया गया, जिसमें स्मार्टफोन रीसेल और डेटा प्राइवेसी से जुड़े सवाल पूछे गए। रिपोर्ट के मुताबिक, 41.1 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि फैक्ट्री रीसेट करने से फोन का पूरा डेटा हमेशा के लिए डिलीट नहीं होता।

वहीं 74 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें स्मार्टफोन बेचने के बाद अपने निजी डेटा के गलत इस्तेमाल की चिंता रहती है।

बढ़ती रीसेल के साथ बढ़ी डेटा सुरक्षा की चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्मार्टफोन रीसेल बाजार में लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सर्वे में शामिल 56.6 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे पहले अपना स्मार्टफोन बेच या एक्सचेंज कर चुके हैं।

Cashify के को-फाउंडर नकुल कुमार ने कहा, “आज के समय में स्मार्टफोन में कई वर्षों का निजी, वित्तीय और पहचान से जुड़ा डेटा मौजूद होता है। जैसे-जैसे रीसेल का बाजार बढ़ रहा है, डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल यूज़र्स पर नहीं छोड़ी जा सकती। इसे संगठित प्लेटफॉर्म और री-कॉमर्स सिस्टम की डिफॉल्ट जिम्मेदारी माना जाना चाहिए, जिसे स्पष्ट नीतिगत ढांचे का भी समर्थन मिले।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया, “डेटा डिलीट करने के सामान्य तरीके व्यापक तौर पर अपनाए जा रहे हैं, लेकिन लोगों का भरोसा अभी भी सीमित है क्योंकि आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके डेटा को पूरी तरह मिटाने की गारंटी नहीं देते। जैसे-जैसे डेटा रिकवरी के जोखिम को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, वैसे-वैसे अनौपचारिक या अधूरे सुरक्षा उपायों की पर्याप्तता को लेकर अनिश्चितता भी यूज़र्स की सोच को प्रभावित कर रही है।”

सर्वे में सामने आए अन्य अहम निष्कर्ष

Cashify के सर्वे के मुताबिक, स्मार्टफोन रीसेल अब आम होता जा रहा है, लेकिन इसके साथ डेटा सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता भी बढ़ रही है।

45.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि स्मार्टफोन बेचने के लिए किसी प्लेटफॉर्म का चयन करते समय वे सबसे ज्यादा डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा को महत्व देते हैं। वहीं 29.5 प्रतिशत लोगों ने कीमत को सबसे ज़रूरी फैक्टर बताया।

सर्वे में 68.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर कोई रीसेल प्लेटफॉर्म प्रमाणित सुरक्षित डेटा डिलीशन की सुविधा देता है तो उस पर उनका भरोसा बढ़ेगा। इसके अलावा 83.3 प्रतिशत लोगों का मानना है कि स्मार्टफोन बेचते समय डेटा डिलीशन सर्टिफिकेट मिलना बेहद जरूरी है।

सर्वे में शामिल 87.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने यह भी कहा कि स्मार्टफोन दोबारा बेचे जाने से पहले डेटा डिलीट करने को लेकर और ज्यादा सख्त कानून बनाए जाने चाहिए।

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Faiza

फाईज़ा परवीन डिजिट हिंदी में एक कॉपी एडिटर हैं। वह 2023 से डिजिट में काम कर रही हैं और इससे पहले वह 6 महीने डिजिट में फ्रीलांसर जर्नलिस्ट के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं, और उनके पसंदीदा तकनीकी विषयों में स्मार्टफोन, टेलिकॉम और ओटीटी शामिल हैं। उन्हें हमारे हिंदी पाठकों को वेब पर किसी डिवाइस या सेवा का उपयोग करने का तरीका सीखने में मदद करने के लिए लेख लिखने में आनंद आता है। सोशल मीडिया की दीवानी फाईज़ा को अक्सर अपने छोटे वीडियो की लत के कारण स्क्रॉलिंग करते हुए देखा जाता है। वह थ्रिलर फ्लिक्स देखना भी काफी पसंद करती हैं।

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