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तिरुमला मंदिर नगर अब भोजन की जांच और क्वालिटी टेस्टिंग की प्रक्रिया में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है. आंध्र प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि वहां जल्द ही एक अत्याधुनिक फूड लैब शुरू की जाएगी. इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालुओं को दिया जाने वाला प्रसाद सख्त सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरे.
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री Y Satya Kumar Yadav ने बताया कि इस सुविधा में “इलेक्ट्रॉनिक नोज” और “इलेक्ट्रॉनिक टंग” नाम की उन्नत मशीनों का उपयोग किया जाएगा. ये उपकरण प्रसिद्ध तिरुमला लड्डू और अन्य प्रसाद बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों की जांच में मदद करेंगे.
नई फूड टेस्टिंग लैब तिरुपति जिले के तिरुमला में स्थापित की जा रही है. इसके अगले महीने से संचालन शुरू होने की उम्मीद है. यह परियोजना आंध्र प्रदेश सरकार और Food Safety and Standards Authority of India के बीच अक्टूबर 2024 में हुए समझौते के बाद विकसित की जा रही है. इस लैब के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं.
स्वास्थ्य मंत्री यादव ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि अधिकांश काम पूरा हो चुका है. उन्होंने कहा कि लैब में की जाने वाली जांच से यह सुनिश्चित होगा कि श्रद्धालुओं को दिए जाने वाले लड्डू और अन्य प्रसाद सर्वोच्च गुणवत्ता के हों. लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और अगले महीने से संचालन शुरू हो सकता है.
यह लैब पुराने आटा मिल भवन में स्थापित की जा रही है, जिसे नवीनीकृत कर लगभग 12,000 वर्ग फुट का क्षेत्र उपलब्ध कराया गया है. इस सुविधा का संचालन लगभग 40 लोगों की टीम करेगी, जिसमें Tirumala Tirupati Devasthanams के स्वास्थ्य विभाग और राज्य स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी शामिल होंगे.
नई लैब का मुख्य आकर्षण इलेक्ट्रॉनिक नोज और इलेक्ट्रॉनिक टंग मशीनें होंगी. इन्हें फ्रांस से लगभग 3.5 करोड़ रुपये की लागत से आयात किया जा रहा है.
इलेक्ट्रॉनिक नोज गंध में होने वाले बदलाव को पहचानने के लिए डिजाइन की गई है. यह खुशबू में बहुत छोटे अंतर को भी महसूस कर सकती है और बता सकती है कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं है.
इलेक्ट्रॉनिक टंग स्वाद और शुद्धता की जांच करती है. यह स्वाद और बनावट में होने वाले हल्के बदलावों का अध्ययन कर सकती है, जिन्हें सामान्य तौर पर इंसान आसानी से नहीं पहचान पाते.
अधिकारियों का कहना है कि ये मशीनें खासकर घी की गुणवत्ता जांचने में बेहद उपयोगी होंगी, जो तिरुमला लड्डू का प्रमुख घटक है. ये उपकरण घी की शुद्धता, स्वाद, गंध और बनावट में मामूली बदलाव तक का पता लगा सकते हैं.
इन दो मशीनों के अलावा लैब में कई अन्य उपकरण भी होंगे. इनमें कच्चे माल की ताजगी जांचने के लिए सेंसर और माइक्रोबायोलॉजी परीक्षण उपकरण शामिल हैं. साथ ही धातु संदूषण और कीटनाशक अवशेषों का पता लगाने वाली मशीनें भी लगाई जाएंगी.
लैब में 60 से अधिक प्रकार के कच्चे माल की जांच की जाएगी. इनमें घी, काजू, इलायची, चीनी, बादाम, जीरा, पानी, सूखे मेवे, चावल, किशमिश और चना शामिल हैं.
इलेक्ट्रॉनिक नोज और टंग सिस्टम खाद्य उद्योग में नई तकनीक नहीं हैं. कई देश इन्हें खाद्य और पेय पदार्थों की जांच में इस्तेमाल करते हैं. दूध उत्पाद, तेल, मसाले, चाय, कॉफी और पैकेज्ड फूड की गुणवत्ता जांच में इनका उपयोग किया जाता है. ये उपकरण गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं, अनुसंधान केंद्रों और खाद्य सुरक्षा विभागों में भी इस्तेमाल होते हैं. कुछ फार्मास्युटिकल और पर्यावरण प्रयोगशालाएं भी रासायनिक बदलाव और संदूषण का पता लगाने के लिए इसी तरह की तकनीक का उपयोग करती हैं.
तिरुमला में इस तकनीक को लाने का उद्देश्य परीक्षण प्रक्रिया को तेज और अधिक सटीक बनाना है, ताकि प्रसाद बनाने से पहले ही किसी भी संभावित समस्या का पता लगाया जा सके.
मजबूत लैब स्थापित करने का निर्णय मिलावटी घी से जुड़े गंभीर आरोपों के बाद लिया गया है. नवंबर 2025 में विशेष जांच दल ने बताया था कि उत्तराखंड स्थित एक कंपनी ने 2019 से 2024 के बीच Tirumala Tirupati Devasthanams को लगभग 60 लाख किलोग्राम मिलावटी घी की आपूर्ति की. इस आपूर्ति की कीमत लगभग 240 करोड़ रुपये बताई गई थी. इस विवाद के बाद सरकार ने गुणवत्ता नियंत्रण को और सख्त करने का फैसला किया, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति से बचा जा सके.
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