पैसे के लेनदेन के लिए UPI काफी पॉपुलर सर्विस है. लेकिन, 15 फरवरी से इसमें एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. UPI के इस बदलाव को लेकर NPCI ने एक नया निर्देश जारी कर दिया है. खासतौर पर इस बदलाव से चार्जबैक पर असर पड़ेगा. यह बदलाव ट्रांजैक्शन क्रेडिट कंफर्मेशन (TCC) और रिटर्न्स को लेकर है. जिससे विवादित लेनदेन के प्रोसेस को आसान बनाया जा सके.
आपको बता दें कि TCC का मतलब होता है कि बेनिफिशियरी बैंक ने कन्फर्म कर दिया है कि ट्रांसफर्ड अमाउंट को सक्सेसफुली रिसिपिएंट के अकाउंट में क्रेडिट कर दिया गया है. जबकि रिफंड मतलब ट्रांजैक्शन फेल होने या रिवर्सल रिक्वेस्ट पर अमाउंट को रिसिपिएंट अकाउंट में रिफंड करना है.
चार्जबैक तब दिया जाता है जब UPI ट्रांजैक्शन को इश्यू करने वाले, बैंक, या NPCI के द्वारा बेनिफिशियरी बैंक के पूरा प्रोसेसस करने से पहले ही कर दिया जाता है. कई बार बेनिफिशियरी बैंक के वेरिफाई करने और रिटर्न प्रोसेस को रिक्वेस्ट करने से पहले ही चार्जबैक को रेज कर दिया जाता है. इससे कई बार मामला काफी पेचीदा हो जाता है.
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आगे बढ़ने से पहले आपको चार्जबैक और रिफंड के बीच अंतर समझा देते हैं. चार्जबैक और रिफंड एक जैसे लग सकते हैं लेकिन इसमें काफी बारीक अंतर है. रिफंड को मर्चेंट या सर्विस प्रोवाइडर कस्टमर से रिक्वेस्ट प्राप्त करने पर जारी करते हैं. जबकि चार्जबैक के केस में कस्टमर इशू को बैंक के साथ रेज करता है. जिसकी फिर बैंक जांच करता है और क्लेम के प्रोसेस को शुरू करता है.
अभी चार्जबैक को ट्रांजैक्शन वाले दिन ही रेज किया जा सकता है. इस वजह से कई बार बेनिफिशियरी बैंक के पास रिटर्न को जल्द से जल्द प्रोसेस करने के लिए ट्रांजैक्शन को वेरिफाई करने और प्रोसेस रिटर्न के लिए ज्यादा टाइम नहीं मिल पाता है. इस वजह से चार्जबैक को लेकर काफी विवाद आते रहते हैं.
कई बार बैंक बिना चार्जबैक प्रोसेस चेक किए ही रिफंड के लिए रिक्वेस्ट रेज कर देते हैं. इससे चार्जबैक ऑटोमैटिकली बंद हो जाता है और आरबीआई गाइडलाइ के अनुसार, पेनल्टी देना होता है.
नए रूल आने से यह सुनिश्चित हो पाएगा कि बेनिफिशियरी बैंक ऑटोमैटिकली चार्जबैक को एक्सेप्ट या रिजेक्ट TCC-रिटर्न के रेज होने के केस में चार्जबैक जारी होने कर सकता है. TCC या रिटर्न के लिए बेनिफिशियरी बैंक के कदम से निर्धारित हो जाएगा कि चार्जबैक को स्वीकार करना है या रिजेक्ट करना है. इससे मैनुअल हस्तक्षेप की जरूरत खत्म हो जाती है.
खासतौर पर नया UPI चार्जबैक नियम बल्क अपलोड ऑप्शन और यूनिफाइड डिस्प्यूट एंड इशू रेजोल्यूशन (UDIR) के लिए लागू होगा. लेकिन फ़्रंट एंड ऑप्शन में नहीं होगा. इसका मतलब है कि यह बैंकिंग ऐप्स में कस्टमर्स को सीधे विजिबल नहीं होगा.
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