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भारत में टीवी और मोबाइल कंटेंट देखने का तरीका जल्द बदल सकता है. Direct-to-Mobile यानी D2M प्रसारण को लेकर बड़ी प्रगति हुई है. सरकार द्वारा गठित सचिवों की समिति ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. इससे देश में बिना मोबाइल डेटा के सीधे फोन पर कंटेंट देखने का रास्ता साफ हो सकता है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले हफ्ते समिति ने इस योजना को हरी झंडी दी. हालांकि, दूरसंचार कंपनियों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने की बात भी कही गई है.
Direct-to-Mobile प्रसारण का मतलब है कि यूजर्स बिना इंटरनेट डेटा के भी वीडियो कंटेंट देख सकेंगे. यानी क्रिकेट मैच जैसे लाइव इवेंट भी मोबाइल डेटा खर्च किए बिना स्ट्रीम किए जा सकेंगे. यह तकनीक पारंपरिक ब्रॉडकास्ट सिग्नल के जरिए कंटेंट सीधे मोबाइल तक पहुंचाएगी. यही वजह है कि टेलीकॉम कंपनियां शुरू से इस योजना का विरोध करती रही हैं. अगर यूजर्स डेटा के बिना वीडियो देख पाएंगे, तो डेटा खपत कम हो सकती है और इससे टेलीकॉम कंपनियों के बिजनेस पर असर पड़ सकता है.
सरकार ने इस प्रस्ताव की समीक्षा के लिए सचिवों की समिति बनाई थी. अब इस समिति ने D2M को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है. एक वरिष्ठ उद्योग अधिकारी के अनुसार, समिति ने नीति की दिशा को आगे बढ़ाने की अनुमति दी है, लेकिन मंत्रालयों और उद्योग से जुड़े मुद्दों का समाधान तय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा.
इसका मतलब यह है कि योजना को रोकने की बजाय व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि सभी पक्षों की चिंताओं का समाधान हो सके.
D2M तकनीक पर फिलहाल परीक्षण चल रहे हैं. प्रसार भारती, आईआईटी कानपुर और Saankhya Labs मिलकर इस तकनीक के ट्रायल कर रहे हैं. Saankhya Labs अब Tejas Networks का हिस्सा है. इन संस्थानों द्वारा देश के 19 से ज्यादा शहरों में D2M तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है. इसका मकसद यह समझना है कि बड़े पैमाने पर इस सेवा को लागू करने में तकनीकी और प्रैक्टिकल चुनौतियां क्या होंगी.
अगर D2M को पूरी तरह मंजूरी मिलती है और यह व्यावसायिक रूप से शुरू होता है, तो मोबाइल कंटेंट इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. खासकर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में, जहां इंटरनेट की स्पीड या डेटा की लागत बड़ी समस्या है, वहां यह तकनीक फायदेमंद साबित हो सकती है. हालांकि, टेलीकॉम कंपनियों और ब्रॉडकास्ट सेक्टर के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. आने वाले महीनों में इस दिशा में और स्पष्टता आने की उम्मीद है.
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