हर हफ्ते ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर नई फिल्में और वेब सीरीज़ रिलीज़ होती हैं, लेकिन कभी-कभी कोई पुरानी फिल्म अचानक सुर्खियों में लौट आती है और नए कंटेंट को भी पीछे छोड़ देती है। इन दिनों ऐसा ही कुछ हिंदी फिल्म मर्दानी के साथ देखने को मिल रहा है। रानी मुखर्जी की मर्दानी 3 बहुत जल्द सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है। लेकिन उससे पहले ही 11 साल पुरानी फिल्म ‘मर्दानी’ एक बार फिर दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है और ओटीटी पर शानदार प्रदर्शन कर रही है।
करीब 1 घंटा 53 मिनट की यह फिल्म शुरू से ही दर्शक को अपनी गंभीर और बेचैन कर देने वाली दुनिया में खींच लेती है। कहानी एक साधारण पुलिस जांच की तरह शुरू होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह एक ऐसी साइकोलॉजिकल थ्रिलर का रूप ले लेती है, जो अंत तक पकड़ बनाए रखती है। मर्दानी किसी आम पुलिस ड्रामा से कहीं आगे जाकर समाज के अंधेरे पहलुओं को बेबाकी से सामने रखती है।
फिल्म की कहानी शिवानी शिवाजी रॉय के इर्द-गिर्द घूमती है, जो क्राइम ब्रांच की एक सख्त और जिम्मेदार अधिकारी हैं। इस किरदार को रानी मुखर्जी ने निभाया है। शिवानी का जीवन पूरी तरह उसके पेशे के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है। उसकी जिंदगी तब हिल जाती है जब उससे जुड़ी एक अनाथ बच्ची अचानक लापता हो जाती है। शुरुआत में यह मामला एक सामान्य गुमशुदगी जैसा लगता है, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह मुंबई और दिल्ली के बीच एक्टिव एक खतरनाक मानव तस्करी गिरोह तक पहुंच जाता है।
जैसे-जैसे जांच तेज होती है, शिवानी का सामना इस रैकेट के मास्टरमाइंड वॉल्ट से होता है, जिसका किरदार ताहिर राज भसीन ने निभाया है। फोन कॉल्स के जरिए पुलिस को उकसाने वाला यह खलनायक हर कदम पर कानून से आगे निकलता नजर आता है। फिल्म का माहौल शुरू से अंत तक डर और बेचैनी से भरा रहता है। हर मिनट के साथ सस्पेंस बढ़ता जाता है और क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते तनाव अपने चरम पर पहुंच जाता है।
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर, कसाव भरी कहानी और नैतिक सवालों से भरा अंत इसे खास बनाते हैं। शायद यही वजह है कि दर्शक एक बार फिर इसे बड़े पैमाने पर देख रहे हैं। फिलहाल मर्दानी नेटफ्लिक्स की टॉप 10 लिस्ट में छठे नंबर पर ट्रेंड कर रही है और IMDb पर इसे 7.3 की रेटिंग मिली हुई है। यह साबित करता है कि कुछ कहानियां समय के साथ पुरानी नहीं होतीं, बल्कि और भी ज्यादा असरदार हो जाती हैं।