WhatsApp के यूजरनेम फीचर को लेकर भारत सरकार और Meta के बीच चर्चा अभी जारी है। इसी बीच सरकार ने Meta को जवाब देने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय दे दिया है। कंपनी ने भी स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार की ओर से उठाई गई चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक इस फीचर को रोलआउट नहीं किया जाएगा। पिछले सप्ताह इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों से Meta की बैठक हुई थी। इस दौरान सरकार ने डिजिटल सुरक्षा, साइबर धोखाधड़ी और संभावित जोखिमों से जुड़े कई सवाल उठाए थे। इसके बाद कंपनी को आधिकारिक नोटिस जारी किया गया था।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूजरनेम फीचर आने के बाद साइबर अपराधी किसी सेलिब्रिटी, सरकारी अधिकारी या अन्य प्रसिद्ध व्यक्ति जैसा यूजरनेम बनाकर लोगों को आसानी से निशाना बना सकते हैं। इससे ऑनलाइन ठगी और पहचान की नकल के मामलों में बढ़ोतरी होने की आशंका जताई गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में डिजिटल अरेस्ट और साइबर चोरी जैसी घटनाओं से भारतीय नागरिकों को लगभग 22,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। ऐसे में सरकार का मानना है कि अधिक गुमनामी देने वाला यह फीचर साइबर अपराधियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।
Meta का कहना है कि यूजरनेम फीचर को सुरक्षित बनाने के लिए कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है। कंपनी के अनुसार, ऐसे एल्गोरिदम विकसित किए गए हैं जो डिजिटल फ्रॉड से जुड़े संदिग्ध पैटर्न की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करने में सक्षम होंगे।
इसके अलावा सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थाओं और सेलिब्रिटीज से जुड़े प्रमुख यूजरनेम पहले से ही रिजर्व रखे गए हैं, ताकि केवल उनके असली मालिक ही उनका इस्तेमाल कर सकें। Meta ने यह भी बताया कि जो अकाउंट कम समय में बड़ी संख्या में लोगों से संपर्क करने की कोशिश करेंगे, उन पर भी सिस्टम ऑटोमैटिक तौर पर सीमाएं लागू करेगा।
Meta ने पहले घोषणा की थी कि यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी बढ़ाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। फिलहाल WhatsApp पर संपर्क करने के लिए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन नया फीचर आने के बाद यूजरनेम के जरिए भी बातचीत शुरू की जा सकेगी।
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