ऐसी धारण आज के समय में बन चुकी है कि बिना बिजली के कूलिंग मिलना संभव नहीं है! अब सोचकर देखिए आज से हजारों सालों पहले लोग कैसे कूलिंग प्राप्त करते होंगे। इस समय तो बिजली थी ही नहीं। इसी कारण से बहुत से आविष्कार भी हुए होंगे, जो लोगों को कहीं न कहीं घरों को कूल करने और राहत देने से संबंधित भी होंगे। ऐसा ही कुछ आज से करीब करीब 3000 साल पहले Iran में भी हुआ था, वहाँ के लोगों ने इस समय एक ऐसी तकनीकी का इजात किया था जो बिना पैसे खर्च किए और बिना बिजली के ही घर को कूल रखती थी। आज भी Iran के पुराने शहरों में Yazd जैसी जगहों पर यह तकनीक उन इमारतों में काम कर रही है जो सैकड़ों साल पुरानी हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये तकनीकी है क्या जिसके बारे में आने अभी तक सुना ही नहीं है। असल में, इस तकनीक को Windcatcher या फारसी में Badgir के तौर पर जाना जाता है। जिसका मतलब है हवा को पकड़ने वाला। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे आप अपने घर पर ही बना सकते हैं, इसमें समय कम लगता है और पैसे भी बच जाता है। इसके पहले कि आप इस तकनीक को बनाने जाएँ, आइए यह जानते हैं कि आखिर यह काम कैसे करती है।
इसके पीछे का विज्ञान बहुत सीधा है। गर्म हवा हमेशा ऊपर जाती है और ठंडी हवा नीचे रहती है। जमीन के करीब वाली हवा ऊपर की हवा से हमेशा ठंडी होती है। रात को तो यह फर्क और भी ज्यादा हो जाता है। Windcatcher इसी सिद्धांत का फायदा उठाता है। यह एक ऐसा स्ट्रक्चर होता है जो छत के ऊपर लगाया जाता है। इसमें एक तरफ खुला हिस्सा होता है जो बाहर की हवा को अंदर खींचता है। यह हवा एक एक लंबे चैनल से गुजरती है जो जमीन के नजदीक या दीवार के अंदर से होकर निकलती है। जब हवा इस लंबी और संकरी चैनल से गुजरती है तो यह ठंडी हो जाती है और नीचे कमरे में ठंडी हवा के रूप में पहुँचती है। दूसरी तरफ कमरे की गर्म हवा बाहर निकलने के लिए एक और ओपनिंग होती है जिससे नेचुरल वेंटिलेशन बनती है। एक तरफ से ठंडी हवा अंदर और दूसरी तरफ से गर्म हवा बाहर आती जाती रहती है। यह साइकिल चलती रहती है और कमरा ठंडा बना रहता है। आइए अब जानते हैं कि आखिर आप इस तकनीक को कैसे अपने घर पर इस्तेमाल कर सकते हैं और अपने घर में कूलिंग ले सकते हैं।
अब आप सोच रहे होंगे कि यह तो बड़ी इमारत वाली बात है। लेकिन इसका एक छोटा और प्रेक्टिकल वर्जन भी घर पर बनाया जा सकता है। इसके लिए आपको एक बड़ी PVC pipe चाहिए जो hardware की दुकान पर आसानी से मिल जाती है। 4 से 6 inch diameter की pipe ठीक रहेगी। इसे खिड़की या दरवाजे के ऊपर से बाहर निकालिए। Pipe का बाहरी सिरा ऊपर की तरफ खुला रखिए जहाँ हवा ज्यादा चलती हो। और अंदर वाला सिरा कमरे में नीचे की तरफ रखिए। अब एक जरूरी step यह है कि pipe के बाहरी हिस्से को गीले कपड़े या खस से रैप कर दीजिए। जब बाहर की हवा इस गीले कपड़े से होकर pipe में घुसेगी तो पहले से ठंडी होकर आएगी। इस तरह हवा की प्री-कूलिंग हो जाने वाली है।
अगर पाइप को जमीन के करीब से या दीवार के अंदर से गुजारा जाए तो हवा और भी ज्यादा ठंडी होकर आएगी। जमीन की मिट्टी का तापमान ऊपर की हवा से 10 से 15 डिग्री तक कम होता है। इसीलिए Iran के पुराने Windcatchers इतने लंबे होते थे ताकि हवा ज्यादा देर तक ठंडी दीवारों के संपर्क में रहे। घर पर इसे प्रेक्टिकल बनाने के लिए पाइप को छाया वाली दीवार से होकर निकालिए। अगर घर में अंडरग्राउन्ड स्पेस है तो pipe को वहाँ से निकालने पर सबसे ज्यादा ठंडक मिलेगी।
रात को बाहर का तापमान दिन के मुकाबले 8 से 12 डिग्री तक कम हो जाता है। ऊपर से रात की हवा में नमी भी ज्यादा होती है। ऐसे में Windcatcher टेकनीक रात को सोते वक्त सबसे ज्यादा फायदेमंद है। जब बाकी लोग AC या cooler चला रहे हों तब आप इस फ्री कूलिंग का मज़ा ले रहे होंगे।
इसे और बेहतर बनाने के लिए रात को पाइप के बाहरी हिस्से पर गीला कपड़ा लपेट दें। सुबह तक कमरे में ऐसी ठंडक होगी जो किसी कीमत के नहीं आ सकती है, कोई AC ऐसी कूलिंग नहीं कर सकता है और न ही किसी कूलर से आपको ये वाली कूलिंग मिल सकती है। ये फ्री जा जुगाड़ आपको शिमला वाली कूलिंग आपके घर पर ही दे सकता है।
जो तकनीक आज से लगभग लगभग 3000 साल पहले Iran के रेगिस्तान में काम करती थी वो आज भी उतनी ही प्रभावी और रेलेवेंट है। हालांकि, आज तो इसे ज्यादा ही प्रभावी माना जा सकता है क्योंकि जो कूलिंग आपको AC पर हजारों रुपये खर्च करने और बिजली हजारों रुपये का बिल देने के बाद मिलती है, उससे कहीं ज्यादा कूलिंग आपको कुछ रुपयों में मिल सकती है। बस आपको अपने घर में इस तकनीकी का इस्तेमाल करना है।
आर्टिकल में AI से निर्मित इमेज इस्तेमाल हुई है।
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