भारत में हर दिन करोड़ों लोग UPI ऐप्स के जरिए अपने मोबाइल नंबर पर रिचार्ज कराते हैं. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि रिचार्ज सफल नहीं होता, जबकि बैंक अकाउंट से पैसे कट जाते हैं. यह डिजिटल पेमेंट से जुड़ी सबसे आम शिकायतों में से एक है. अच्छी बात यह है कि ऐसे मामलों में रिफंड मिलने की पूरी संभावना होती है, बशर्ते आप सही समय पर सही कदम उठाएं.
भारत का UPI नेटवर्क हर महीने 19 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है. यानी रोजाना लगभग 60 से 70 करोड़ ट्रांजैक्शन होते हैं. इतने बड़े नेटवर्क में कभी-कभी सर्वर की समस्या, नेटवर्क कनेक्टिविटी में रुकावट, टाइम-आउट या तकनीकी गड़बड़ियां हो सकती हैं.
ऐसी स्थिति में आपका पेमेंट बैंक से डेबिट हो जाता है, लेकिन रिचार्ज पूरा नहीं हो पाता है. विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की विफल ट्रांजैक्शन आमतौर पर ग्राहक की गलती नहीं होती है.
अगर रिचार्ज फेल हो जाए और पैसे कट जाएं तो तुरंत दोबारा पेमेंट करने की गलती न करें. सबसे पहले अपने बैंक और UPI ऐप से मिले SMS या नोटिफिकेशन की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि पैसे वास्तव में कटे हैं या नहीं.
ये सभी जानकारी आगे शिकायत दर्ज कराने में काम आएंगी.
NPCI ने UDIR (Unified Dispute and Issue Resolution) सिस्टम भी शुरू किया है. कई UPI ऐप्स में मौजूद “Check Status” विकल्प के जरिए ट्रांजैक्शन की स्थिति रियल टाइम में जांची जा सकती है और कई मामलों में रिफंड अपने आप शुरू हो जाता है.
बहुत कम लोगों को पता है कि रिजर्व बैंक ने ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट नियम बनाए हैं. यदि Person-to-Person ट्रांसफर फेल होता है तो रिफंड अगले कार्य दिवस यानी T+1 Working Day के भीतर मिल जाना चाहिए. वहीं मोबाइल रिचार्ज जैसे Person-to-Merchant ट्रांजैक्शन के मामलों में रिफंड की समय सीमा T+5 Working Days है.
अगर बैंक तय समय के भीतर रिफंड नहीं करता, तो RBI के नियमों के अनुसार उसे ग्राहक को हर दिन 100 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देना पड़ सकता है. शिकायत करते समय RBI Circular DPSS.CO.PD No.629/02.01.014/2019-20 का उल्लेख करना आपके पक्ष को मजबूत बना सकता है.
अगर निर्धारित समय के भीतर पैसा वापस नहीं आता है तो सबसे पहले उसी UPI ऐप में शिकायत दर्ज करें जिससे आपने रिचार्ज किया था. PhonePe, Google Pay, Paytm या BHIM जैसे ऐप्स में Help या Support सेक्शन के जरिए शिकायत की जा सकती है.
शिकायत दर्ज होने के बाद मिले Reference Number को सुरक्षित रखें और उसकी स्थिति ट्रैक करते रहें. यदि समस्या बनी रहती है, तो अपने बैंक के Customer Care से संपर्क करें और ट्रांजैक्शन ID साझा करें.
अगर T+5 Working Days के बाद भी रिफंड नहीं मिलता है तो मामला NPCI तक पहुंचाया जा सकता है. NPCI सीधे रिफंड जारी नहीं करता, लेकिन बैंकों पर नियामकीय दबाव बनाकर समस्या के समाधान की प्रक्रिया तेज कर सकता है. यदि इसके बाद भी समाधान नहीं मिलता, तो RBI CMS Portal के जरिए RBI Ombudsman के पास शिकायत दर्ज की जा सकती है. यह एक आधिकारिक शिकायत तंत्र है, जिसके तहत बैंकों को जवाब देना अनिवार्य होता है.
रिचार्ज फेल होने के बाद पैसे कट जाना परेशान करने वाला अनुभव हो सकता है, लेकिन पूरी व्यवस्था उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए बनाई गई है. अधिकांश मामलों में रिफंड अपने आप मिल जाता है. यदि ऐसा नहीं होता, तो RBI और NPCI के नियम आपके अधिकारों की रक्षा करते हैं. बस ट्रांजैक्शन ID संभालकर रखें, जल्दबाजी में दोबारा भुगतान न करें और जरूरत पड़ने पर सही प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज करें.
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