भारत में एयर कंडीशनर (AC) अब केवल लग्जरी प्रोडक्ट नहीं रह गया है, बल्कि गर्मियों में यह ज्यादातर घरों की जरूरत बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में एसी बाजार तेजी से बढ़ा है और इसके साथ ही ग्राहकों के सामने विकल्पों की संख्या भी काफी बढ़ गई है। आज बाजार में सिंगल इन्वर्टर, डुअल इन्वर्टर, 5-स्टार और अलग-अलग एनर्जी एफिशिएंसी वाले कई मॉडल उपलब्ध हैं, जिनमें से सही विकल्प चुनना कई बार मुश्किल हो जाता है।
नया एसी खरीदने वाले ज्यादातर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या डुअल इन्वर्टर एसी पर अतिरिक्त पैसा खर्च करना वाकई फायदे का सौदा है या फिर सिंगल इन्वर्टर एसी ही काफी है। आइए समझते हैं कि दोनों तकनीकों में क्या अंतर है और यह आपके बिजली बिल और आराम पर किस तरह असर डालता है।
सिंगल इन्वर्टर एसी में कंप्रेसर के अंदर एक रोटरी सिलेंडर होता है। यह पारंपरिक नॉन-इन्वर्टर एसी की तरह बार-बार ऑन और ऑफ नहीं होता, बल्कि लगातार चलता रहता है और कमरे में कूलिंग की जरूरत के अनुसार अपनी स्पीड को कम या ज्यादा करता है।
वहीं डुअल इन्वर्टर एसी में दो रोटरी सिलेंडर लगाए जाते हैं, जो 180 डिग्री के एंगल पर स्थित होते हैं। इस व्यवस्था के कारण कंप्रेशन का भार दोनों सिलेंडरों में संतुलित रूप से बंट जाता है और कंपन कम होता है। साथ ही यह कंप्रेसर को ज्यादा व्यापक स्पीड रेंज में काम करने की क्षमता देता है। आमतौर पर डुअल इन्वर्टर कंप्रेसर 10 से 120 हर्ट्ज तक की स्पीड पर काम कर सकता है, जबकि सिंगल इन्वर्टर की कार्य सीमा इसकी तुलना में कम होती है। यही अंतर इसके कई प्रैक्टिकल फायदों की वजह बनता है।
डुअल इन्वर्टर तकनीक का सबसे बड़ा लाभ इसकी बेहतर एनर्जी एफिशिएंसी है। जब कमरा पर्याप्त ठंडा हो जाता है, तब इसका कंप्रेसर बेहद कम स्पीड पर भी काम कर सकता है, जिससे बिजली की खपत घट जाती है।
इसी वजह से डुअल इन्वर्टर एसी में अक्सर हाई ISEER और बेहतर BEE स्टार रेटिंग देखने को मिलती है। अगर किसी घर में एसी का इस्तेमाल रोजाना पांच घंटे या उससे ज्यादा समय तक किया जाता है, तो पूरे सीजन में डुअल इन्वर्टर एसी बिजली खर्च को कम करने में मदद कर सकता है। रातभर एसी चलाने वाले परिवारों को इसका लाभ और ज्यादा मिलता है।
डुअल इन्वर्टर एसी का आउटडोर यूनिट तुलनात्मक रूप से कम आवाज करता है। इसका कारण यह है कि दो सिलेंडर एक-दूसरे के कंपन को संतुलित कर देते हैं। ऐसे में ऑपरेशन ज्यादा स्मूथ और शांत रहता है। इसके अलावा डुअल इन्वर्टर मॉडल कमरे को तेजी से ठंडा करने में सक्षम होते हैं और निर्धारित तापमान को ज्यादा स्थिर बनाए रखते हैं। इससे रात के समय तापमान में बार-बार बदलाव महसूस नहीं होता और आरामदायक नींद मिलती है।
हालांकि, सिंगल इन्वर्टर एसी भी नॉन-इन्वर्टर मॉडल की तुलना में काफी बेहतर अनुभव देता है और शोर और तापमान नियंत्रण दोनों मामलों में सुधार देखने को मिलता है।
अगर आपका एसी इस्तेमाल ज्यादा है और आप रोजाना पांच घंटे या उससे ज्यादा समय तक, खासकर रात में, एसी चलाते हैं तो डुअल इन्वर्टर एसी बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। इसकी कम बिजली खपत, कम शोर और कंप्रेसर पर कम दबाव इसे लंबे समय के लिए फायदे का निवेश बनाते हैं। पांच से दस वर्षों की अवधि में इसकी अतिरिक्त कीमत की भरपाई बिजली बचत के जरिए हो सकती है।
दूसरी ओर, अगर आपका इस्तेमाल सीमित है और एसी रोज़ाना केवल तीन से चार घंटे ही चलता है, तो सिंगल इन्वर्टर एसी ज्यादा प्रैक्टिकल ऑप्शन हो सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि एसी चुनते समय केवल इन्वर्टर तकनीक पर ध्यान देना काफी नहीं है। BEE स्टार रेटिंग और ISEER स्कोर को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। कई बार एक 5-स्टार सिंगल इन्वर्टर एसी वास्तविक उपयोग में 3-स्टार डुअल इन्वर्टर मॉडल से बेहतर बिजली बचत दे सकता है।
इसलिए खरीदारी के समय तकनीक के साथ-साथ एनर्जी एफिशिएंसी संबंधी लेबल की जानकारी भी जरूर चेक करें। सही चुनाव वही होगा जो आपकी उपयोग की आदतों, बजट और बिजली बचत की जरूरतों के अनुरूप हो।
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