स्मार्टफोन और मोबाइल नंबर आज हमारी डिजिटल पहचान का अहम हिस्सा बन चुके हैं. बैंकिंग ऐप्स, UPI, ईमेल, सोशल मीडिया और कई जरूरी सेवाएं मोबाइल नंबर से जुड़ी होती हैं. ऐसे में साइबर अपराधी अब एक खतरनाक तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे SIM Swap Fraud या SIM Cloning कहा जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में भी यह धोखाधड़ी तेजी से लोगों को निशाना बना रही है.
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार SIM Swap Fraud का सबसे शुरुआती संकेत अचानक मोबाइल नेटवर्क का गायब हो जाना है. यदि आपका फोन बिना किसी स्पष्ट कारण के “No Service”, “Emergency Calls Only” या लंबे समय तक नेटवर्क न दिखाए, जबकि आसपास के अन्य लोगों के फोन सामान्य रूप से काम कर रहे हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
कई मामलों में पीड़ितों को कॉल, SMS और OTP मिलना भी बंद हो जाता है. यह संकेत हो सकता है कि किसी ने आपके मोबाइल नंबर पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की है.
इस धोखाधड़ी में अपराधी पहले पीड़ित की व्यक्तिगत जानकारी जुटाते हैं. इसके बाद वे मोबाइल सेवा प्रदाता को धोखे में डालकर नया SIM जारी करवाने की कोशिश करते हैं. जैसे ही नया SIM सक्रिय होता है, पीड़ित के पास मौजूद पुराना SIM काम करना बंद कर देता है. इसके बाद आने वाली कॉल और SMS सीधे अपराधियों के पास पहुंचने लगते हैं.
यही वजह है कि कई लोगों को तब तक पता नहीं चलता जब तक उनके बैंक खाते से पैसे निकलने या अकाउंट हैक होने की सूचना नहीं मिलती.
मोबाइल नंबर पर नियंत्रण मिलने के बाद अपराधी तेजी से कार्रवाई करते हैं. वे ईमेल अकाउंट, बैंकिंग ऐप्स, डिजिटल वॉलेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के पासवर्ड रीसेट करने की कोशिश करते हैं. चूंकि कई सेवाएं अभी भी SMS आधारित OTP का इस्तेमाल करती हैं, इसलिए मोबाइल नंबर पर कब्जा मिलते ही ठगों के लिए कई खातों तक पहुंच आसान हो जाती है.
कुछ पीड़ितों को अनधिकृत बैंक ट्रांजैक्शन, पासवर्ड रीसेट अलर्ट या अनजान डिवाइस से लॉगिन नोटिफिकेशन मिलने के बाद ही धोखाधड़ी का पता चलता है.
विशेषज्ञ SMS आधारित OTP पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय App-Based Authentication का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.
इसके अलावा कभी भी OTP, आधार नंबर, बैंकिंग जानकारी या SIM से जुड़ा कोई भी सत्यापन कोड फोन, SMS या ईमेल के जरिए किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहिए.
यदि कोई व्यक्ति खुद को टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी बताकर SIM सत्यापन की जानकारी मांगता है तो सतर्क रहें.
फोन में SIM PIN सक्रिय करना भी सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत प्रदान कर सकता है. साथ ही बैंक और ईमेल खातों की गतिविधियों की नियमित जांच करते रहना चाहिए.
यदि आपके फोन का नेटवर्क अचानक गायब हो जाए और काफी देर तक वापस न आए, तो तुरंत किसी दूसरे फोन से अपने मोबाइल सेवा प्रदाता से संपर्क करें.
यह पता करें कि आपके नंबर पर हाल ही में कोई SIM Replacement Request तो नहीं डाली गई है. इसके साथ ही अपने Google अकाउंट, ईमेल, बैंकिंग ऐप्स और सोशल मीडिया खातों के पासवर्ड तुरंत बदल दें. अपने बैंक को सूचित करें और सभी लेनदेन पर नजर रखें. समय रहते उठाया गया कदम बड़े वित्तीय नुकसान को रोक सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ SIM Swap Fraud का खतरा भी बढ़ रहा है. ऐसे में नेटवर्क गायब होने जैसे छोटे संकेतों को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है.
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