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गर्मी का मौसम आ गया है. ऐसे में लगो ठंडक पाने के लिए नए-नए जुगाड़ की तलाश में रहते हैं. कई लोग कूलर या एसी की मदद से गर्मी को मात देते हैं. लेकिन, कई बार बजट की वजह से लोगों को महंगे कूलर या एसी खरीदने की हिम्मत नहीं होती है. अब एक बढ़िया जुगाड़ सामने आया है. जिससे काफी कम कीमत पर आप घर में ही कूलर बना सकते हैं. इसको बनाने के लिए ज्यादा मेहनत की भी जरूरत नहीं है.
न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक ऐसा इनोवेशन सामने आया है, जो “आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है” कहावत को सही साबित करता है. यहां मिथिलेश नाम के व्यक्ति ने पुराने पानी के टैंक को इस्तेमाल करके एक सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल कूलर बना दिया. तेज गर्मी के बीच जहां लोग महंगे AC और कूलर की तरफ जाते हैं, वहीं यह जुगाड़ तकनीक कम खर्च में राहत देने का काम कर रही है.
मिथिलेश कुमार ने एक बेकार पड़े प्लास्टिक पानी के टैंक को देखकर उसे कूलर में बदलने का आइडिया तैयार किया. उन्होंने इस कूलर को बनाने के लिए उन्होंने कुछ सामान्य चीजों का इस्तेमाल किया. इनमें एग्जॉस्ट फैन, कटिंग टूल, खस घास मैट, वायर मेश और रेगुलेटर का उपयोग किया. इन सभी चीजों की मदद से करीब 1,000 से 1,200 रुपये में यह कूलर तैयार हो गया. इसे बनाने में सिर्फ 3 से 4 घंटे का समय लगा.
इस कूलर की सबसे खास बात इसका यूनिक कूलिंग सिस्टम है. इसके अंदर एक मिट्टी का घड़ा रखा गया है, जिसमें नीचे एक छोटा छेद किया गया है. इस घड़े से धीरे-धीरे पानी खस की मैट पर गिरता है, जिससे हवा और ठंडी हो जाती है. मिथिलेश के अनुसार इस तकनीक से कूलिंग में करीब 2 प्रतिशत तक सुधार देखा गया है.
यह कूलर 5 से 7 लीटर पानी स्टोर कर सकता है, जो लगभग एक हफ्ते तक चल जाता है. प्लास्टिक टैंक होने की वजह से इसमें जंग लगने की समस्या नहीं होती, जो आम कूलर में देखने को मिलती है. इससे इसकी लाइफ भी ज्यादा हो जाती है.
यह कूलर न सिर्फ सस्ता है, बल्कि बिजली और पानी की भी बचत करता है. कम लागत में बेहतर कूलिंग देना इसकी सबसे बड़ी खासियत है. यह उन लोगों के लिए खासतौर पर उपयोगी है, जो कम बजट में गर्मी से राहत चाहते हैं.
इस जुगाड़ ने दिखाया कि अगर सही से इस्तेमाल किया जाए तो बढ़िया कूलर घर पर ही तैयार किया जा सकता है.
मिथिलेश सिर्फ यह कूलर बनाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वह लोगों को पानी बचाने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं. वह गांवों में परकोलेशन पिट बनाने और ग्राउंड वॉटर रिचार्ज जैसे उपाय अपनाने की सलाह देते हैं. यह जुगाड़ तकनीक सिर्फ ठंडक देने का काम नहीं कर रही, बल्कि लोगों को “Reuse और Save Water” का मैसेज भी दे रही है.
आज के दौर में लोग अक्सर महंगे गैजेट्स के पीछे भागते हैं, जबकि ऐसे देसी इनोवेशन दिखाते हैं कि कम संसाधनों में भी बड़ा समाधान निकाला जा सकता है. अगर इस तरह के आइडियाज को सही सपोर्ट मिले, तो ये बड़े स्तर पर लोगों की जिंदगी आसान बना सकते हैं.
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