प्रतीकात्मक फोटो
बहुत से लोग पासपोर्ट को एक वैध पहचान दस्तावेज़ के रूप में तब तक गंभीरता से नहीं लेते, जब तक उन्हें अचानक उसकी ज़रूरत न पड़ जाए, चाहे वो यूरोप ट्रिप हो, विदेश में नौकरी का ऑफर या फिर कोई इमरजेंसी ट्रैवल प्लान हो. लेकिन अगर आपने पासपोर्ट आवेदन में ज़रा सी भी लापरवाही की, तो ये अनुभव परेशानीभरा भी हो सकता है.
24 जून 2025 को 13वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यह मुद्दा उठाते हुए Passport Seva Programme (PSP) 2.0 की शुरुआत की घोषणा की. यह नया वर्जन उभरती तकनीकों, ज्यादा ट्रांसपेरेंसी और तेज़ प्रोसेसिंग टाइम के साथ भारत के पासपोर्ट सिस्टम को अपग्रेड करता है.
PSP 2.0 का वैश्विक स्तर पर विस्तार भारतीय एम्बेसी और कॉन्सुलेट्स में भी शुरू हो चुका है, जिससे विदेश में बसे भारतीय नागरिकों को भी ePassport का लाभ मिलने लगा है.
ePassport, सामान्य पासपोर्ट का ही एक स्मार्ट वर्जन है. यह दिखने में आम पासपोर्ट जैसा ही होता है, लेकिन इसमें Radio Frequency Identification (RFID) चिप और एंटीना लगा होता है, जो पासपोर्ट के पिछले कवर में इनले के रूप में डाले जाते हैं. इसके फ्रंट कवर पर एक छोटा गोल्डन चिप सिंबल छपा होता है, जो इसे पहचानने योग्य बनाता है. इस RFID चिप में पासपोर्ट धारक की पर्सनल डिटेल्स और बायोमेट्रिक डेटा (फोटो और फिंगरप्रिंट) डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित रहते हैं.
अगर आपके पास पहले से वैध भारतीय पासपोर्ट है, तो चिंता की कोई बात नहीं. वो अपने एक्सपायरी डेट तक वैध रहेगा. फिलहाल ePassport सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, और जिन पासपोर्ट ऑफिसेज में यह सेवा शुरू हो गई है, वहां से नया अप्लाई करने वालों को सीधे ePassport मिलना शुरू हो गया है.
ePassport के लिए अप्लाई करने का प्रोसेस काफी आसान है और यह सामान्य पासपोर्ट की प्रक्रिया जैसी ही है, बस कुछ डिजिटल अपग्रेड्स के साथ:
विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि कई फर्जी वेबसाइटें सरकारी पासपोर्ट सेवाओं के नाम पर लोगों को ठगने की कोशिश कर रही हैं. ये वेबसाइटें आमतौर पर *.org, *.in या *.com डोमेन पर चलती हैं और या तो ज्यादा फीस वसूलती हैं या यूजर का डेटा चुरा सकती हैं.
कुछ जानी-पहचानी फर्जी वेबसाइट्स ये हैं:
सुरक्षित रहने के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट www.passportindia.gov.in का ही इस्तेमाल करें.