महाराष्ट्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने मुंबई, पुणे और रायगढ़ समेत कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया. भूस्खलन, हाईवे पर जलभराव और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था प्रभावित होने के बीच राज्य सरकार को नासिक के लिए एक और बड़े खतरे की चेतावनी मिली. इस बार प्रशासन तैयार था, क्योंकि उसे Bharat Forecast System (BharatFS) से लगभग 24 घंटे पहले संभावित क्लाउडबर्स्ट जैसी बारिश का अलर्ट मिल चुका था.
इस शुरुआती चेतावनी की बदौलत प्रशासन ने समय रहते आपदा प्रबंधन की तैयारियां शुरू कर दीं. अधिकारियों का कहना है कि यह भारत में AI आधारित मौसम पूर्वानुमान तकनीक के सफल इस्तेमाल का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है.
Bharat Forecast System (BharatFS) भारत की सबसे उन्नत स्वदेशी मौसम पूर्वानुमान प्रणाली है. इसे Indian Institute of Tropical Meteorology (IITM), पुणे ने Ministry of Earth Sciences के तहत विकसित किया है.
पहले जहां मौसम का पूर्वानुमान लगभग 12 किलोमीटर के ग्रिड पर तैयार किया जाता था, वहीं BharatFS करीब 6 किलोमीटर रिजॉल्यूशन पर मौसम का विश्लेषण करता है. इससे किसी छोटे इलाके में होने वाली अत्यधिक बारिश, क्लाउडबर्स्ट, फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और तेज हवाओं जैसी घटनाओं का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है.
यह सिस्टम भारत के हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटर Arka (पुणे) और Arunika (नोएडा) की मदद से काम करता है. सुपरकंप्यूटिंग, एडवांस्ड न्यूमेरिकल वेदर मॉडलिंग और AI आधारित निर्णय सहायता प्रणाली मिलकर तेजी से और अधिक सटीक पूर्वानुमान तैयार करती हैं.
जब मुंबई, पुणे और रायगढ़ पहले से ही भारी बारिश की मार झेल रहे थे, उसी दौरान BharatFS ने नासिक में अत्यधिक स्थानीय स्तर की बारिश की संभावना का अनुमान लगभग एक दिन पहले ही लगा लिया.
अलर्ट मिलते ही महाराष्ट्र सरकार और जिला प्रशासन ने कई एहतियाती कदम उठाए. राज्य आपदा प्रबंधन तंत्र सक्रिय किया गया, NDRF, SDRF और स्थानीय बचाव दलों को तैनात किया गया. संवेदनशील नदियों और बांधों की निगरानी शुरू हुई, संभावित निकासी योजना तैयार की गई और लोगों के लिए सार्वजनिक चेतावनी जारी की गई.
मई 2026 में महाराष्ट्र, BharatFS को अपने आपदा प्रबंधन तंत्र में शामिल करने वाला देश का पहला राज्य बना. इसके लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और IITM के बीच समझौता हुआ था.
अब BharatFS से मिलने वाले मौसम पूर्वानुमान सीधे State Emergency Operations Centre (SEOC) और राज्य के Geo-Spatial Decision Support System (GeoDSS) से जुड़े हैं. इससे जिला प्रशासन को हर तीन घंटे में अपडेटेड मौसम संबंधी जानकारी मिलती है, जिसमें बारिश, हवा की गति, तापमान, बादल और वायुदाब जैसे आंकड़े शामिल होते हैं.
क्लाउडबर्स्ट जैसी घटनाओं का सटीक अनुमान लगाना दुनिया की सबसे कठिन मौसम संबंधी चुनौतियों में माना जाता है, क्योंकि ये बहुत छोटे क्षेत्र में और बेहद कम समय में विकसित होती हैं.
BharatFS अपने हाई-रिजॉल्यूशन मॉडल की वजह से पश्चिमी घाट जैसे जटिल भौगोलिक क्षेत्रों का अधिक सटीक विश्लेषण कर सकता है. यही वजह है कि प्रशासन को पहले से तैयारी का समय मिल जाता है और आपदा आने से पहले ही राहत कार्य शुरू किए जा सकते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि BharatFS भारत के आपदा प्रबंधन को Reactive से Predictive मॉडल की ओर ले जा रहा है, जहां तकनीक और AI की मदद से प्राकृतिक आपदाओं का पहले से अनुमान लगाकर जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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