जिस देश से AI की शुरुआत मानी जाती है, उस देश यानि अमेरिका ने AI यानि आर्टिफ़िशियल इन्टेलिजेन्स को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। असल में, अमेरिका की ओर से जो कदम उठाया गया है, उसके अनुसार गैर अमेरिकियों यानि अमेरिका के अलावा किसी भी देश में रहने वालों के लिए अब एंथ्रोपिक के दो AI मॉडल्स काम नहीं करेंगे। इसका असर दिख रहा है, मेरे सिस्टम पर भी इसका एक्सेस बंद हो गया है। इन दोनों मॉडल को एंथ्रोपिक के सबसे अड्वान्स मॉडल्स के तौर पर देखा जाता है और इन्हें हम सभी Claude Fable 5 और Mythos 5 के तौर पर जानते हैं। अब यह दोनों ही गैर अमेरिकियों के लिए बैन किये जा चुके हैं। जानकारी के अनुसार अमेरिका की ओर से एंथ्रोपिक को यह निर्देश दिए गए हैं कि वह इसके एक्सपर्ट पर कंट्रोल करे, यह कंट्रोल इन दोनों ही AI मॉडल्स पर काम करेगा।
जानकारी मिल रही है कि अमेरिका की ओर से ऐसा कह सकते हैं कि अमेरिका की सरकार की ओर से इन दोनों ही AI मॉडल्स को तुरंत प्रभाव से अमेरिका के बाहर सभी के लिए बैन करने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद से यह अमेरिका के बाहर सभी के लिए बंद हैं। इसके अलावा आपको जानकारी के लिए बता देते हैं कि यह एंथ्रोपिक के कर्मचारियों के लिए भी बंद हो चुके हैं जो अमेरिका के बाहर हैं।
अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स की ओर से ऐसा माना जा रहा है कि इन दोनों ही मॉडल्स में कुछ खामी है, जिनका इस्तेमाल अमेरिका के बाहर अमेरिका को कमजोर करने के लिए किया जा सकता है। हैकर्स इसका गलत फायदा उठा सकते हैं, ऐसे में बड़े साइबर हमलों से बचने के लिए इस कदम को उठाया गया है। अब अगर अमेरिका के बाहर खासकर भारत जैसे देश में अगर यह मॉडल इस्तेमाल के लिए नहीं मिलते हैं तो इसके भारतीयों के लिए क्या मायने हैं, आइए समझते हैं।
एंथ्रोपिक के इन दोनों ही मॉडल को बंद कर देने से भारत के अलावा दुनिया भर के कुछ देशों को या ऐसा भी कह सकते हैं कि बहुत से देशों को कई फायदे और नुकसान हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि भारत के लिए और यहाँ रहने वाले यूजर्स के लिए इसके क्या फायदे नुकसान हो सकते हैं।
भारत जैसे देश में जहां लोग इस समय AI को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं, वहाँ इन मॉडल्स के बंद हो जाने से बड़े नुकसान देखे जा रहे हैं। असल में, इस समय लोग Claude Fable 5 जैसे अड्वान्स मॉडल से कोडिंग, ऑटोनोमस रिसर्च के अलावा बड़े बड़े कामों को आसानी से कर रहे हैं। ऐसे में अगर यह बैन हो जाता है तो इसका बड़ा नुकसान है। दरअसल, अब इन सभी कामों को करने के लिए एक नए मॉडल को तलाश करना होगा। ऐसा करना बिल्कुल भी आसान नहीं होता है और इस तरह के अड्वान्स मॉडल मिलते भी कम हैं, जो इस तरह के कामों को कर पाते हैं।
इसी तरह की समस्या दुनिया के लगभग लगभग हर देश के लिए होने वाली है, और यूजर्स जो इस अड्वान्स मॉडल का इस्तेमाल कर रहे थे, निराशा ही हाथ लगने वाली है। इसके अलावा सॉफ्टवेयर कंपनियों को बड़ा झटका भी लगने वाला है, इसके अलावा टेक्नॉलजी गैप भी बड़े पैमाने पर बढ़ जाने वाला है। हालांकि, इसके अलावा भारत में इसके बैन होने से घरेलू AI को बढ़ावा मिल सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर इस बैक का सकारात्मक असर भारत और यहाँ के यूजर्स पर कैसा होने वाला है।
अमेरिका के इस फैसले से भारत के लिए संभावनाओं के कई नए दरवाज़े खुल सकते हैं, आइए जानते हैं कि आखिर कैसे इसका भारत को बड़े पैमाने पर फायदा मिल सकता है।
अब हम जानते हैं कि अमेरिका ने Claude Fable 5 और Mythos 5 पर बैन लगा दिया है, तो ऐसे में भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स के पास अपना खुद का स्वदेशी AI इकोसिस्टम खड़ा करने का सुनहरा मौका होने वाला है, अगर हम सही दिशा में बढ़ते हैं तो अम्मे खुद के AI मॉडल को विकसित किया जा सकता है, जो Claude को टक्कर दे सके!
अभी तक हम देखते हैं कि भारत के सबसे दिमाग वाले लोग अमेरिका में जाकर वहाँ की कंपनियों के लिए AI निर्मित कर रहे हैं, अब जब यह हमारे देश के ये दोनों मॉडल बंद हो चुके हैं तो हो सकता है कि इन्हें निर्मित करने वाले भारतीय वापिस भारत का रुख करें और यहाँ आकर एक नए ही AI मॉडल को विकसित कर लें। एक्सपर्ट्स भी ऐसा ही कुछ देख रहे हैं।
अगर अमेरिका अपनी टेक्नोलॉजी को सीमित करता है, तो दुनिया की नज़र भारत जैसे बड़े बाज़ार और टैलेंट पूल पर होगी। भारत एक न्यूट्रल ग्राउंड बनकर पूरी दुनिया को AI सर्विस दे सकता है।
हालांकि, टेक की दुनिया में कोई भी बदलाव रातों-रात नहीं आता। अमेरिका का यह बैन भारत के लिए एक वेक-अप कॉल की तरह हो सकता है। हमें यह समझना होगा कि दूसरों की बैसाखियों के सहारे हम लंबी दौड़ नहीं जीत सकते। ऐसे में अगर हम समय रहते अपनी खुद की AI पॉलिसी और मजबूत स्वदेशी टूल्स बना लेते हैं, तो अमेरिका का यह बैन हमारे लिए समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ा मौका हो सकता है।
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