जब भी पंजाब का नाम आता है, आंखों के सामने हरे-भरे खेत, भांगड़ा और खुशमिजाज लोग नजर आते हैं। लेकिन इस चमक के पीछे एक ऐसा दौर भी रहा है जिसने गांवों को भीतर तक झकझोर दिया है। आजादी के बाद का विभाजन, 1980 का उथल-पुथल भरा दौर, 1984 की त्रासदी और फिर नशे का फैलता जाल, ग्रामीण पंजाब की कहानी सिर्फ रंगों की नहीं, जख्मों की भी है। अगर आप पंजाब के गांवों की असली, कच्ची और सिहराने वाली कहानियां देखना चाहते हैं, तो ये 7 फिल्में और सीरीज आपको जरूर पसंद आने वाली हैं। इस लिस्ट में हमने ना तो पंचायत और ना ही दुपहिया को शामिल किया है, इसके बाद भी आपको गांवों की सादगी इन कहानियों में देखने को मिलने वाली है। अगर आप थ्रिलर और क्राइम से लबालब भरी सस्पेंसफुल फिल्में देखना पसंद करते हैं तो यह लिस्ट आपके लिए ही है। आइए इस लिस्ट की पहली और इसके बाद एक एक करके आखिरी मूवी पर नजर डालते हैं।
एक पुलिस ड्रामा जो गांव में हुई एक हत्या की जांच से शुरू होता है, लेकिन धीरे-धीरे कहानी एक अलग ही मोड़ लेती नजर आती है, इस कहानी में आपको अलग तरह का कंटेन्ट देखने को मिलने वाला है, इसके साथ सती इस कहानी में पारिवारिक दबाव और पीढ़ियों के दर्द को भी दिखाया गया है। इस सीरीज का अब दूसरा भाग भी आ चुका है, जिसे आप जरूर देखना चाहिए, आप OTT पर आसानी से इस कहानी के दोनों ही भाग देख सकते हैं। इस कहानी में आपको केवल धुंध वाला मौसम ही नहीं बल्कि हर दिन सामने आ रहे छिपे राज नजर आते हैं।
रणदीप हुड्डा एक पूर्व मुखबिर के किरदार में इस कहानी में देखे जा सकते हैं, जिसे फिर से ड्रग माफिया की दुनिया में धकेल दिया जाता है। सीरीज दिखाती है कि कैसे सीमा पार तस्करी और 80 के दशक की बगावत के घाव आज भी गांवों में जिंदा हैं। इस कहानी को भी आपको जरूर देखना चाहिए, यह भी आपको गाँव की कहानी और यहाँ के एक दूसरे पहलू को भी दिखाने वाली है।
यह फिल्म पंजाब में ड्रग्स की समस्या को बेबाकी से दिखाती है। एक रॉकस्टार, एक मजदूर लड़की और एक डॉक्टर, तीन कहानियां मिलकर बताती हैं कि नशे ने गांवों तक कैसे जड़ें जमा लीं हैं, जो युवाओं के साथ साथ गांव के गाँव बर्बाद कर रही हैं। इस फिल्म को आप OTT पर इस समय आसानी से देख सकते हैं।
इम्तियाज अली की यह बायोपिक लोकगायक चमकीला की कहानी बताती है। उनके गीत ग्रामीण समाज की सच्चाई बयान करते थे, लेकिन धार्मिक कट्टरता और विरोध ने उन्हें विवादों में घेर लिया। इसी कारण से कहानी आपको एक नहीं कई पहलू दिखाती है। अगर आपने इस फिल्म को नहीं देखा तो समझ लीजिए आप गाँव को सही प्रकार से समझ ही नहीं पाएंगे।
1980 के दशक की बगावत पर आधारित यह फिल्म दिखाती है कि कैसे अन्याय और गुस्से ने युवाओं को उग्र रास्ते पर धकेल दिया। यह फिल्म भी आपको एक उदास हकीकत से रूबरू करवाने वाली है। अगर आप इस फिल्म को देखना चाहते हैं तो अभी के अभी आप इसे YouTube पर फ्री में देख सकते हैं। इस फिल्म को लेकर अगर कुछ कहा जा सकता है तो वह यह है कि यह आज भी उस दौर की सबसे सशक्त फिल्मों में गिनी जाती है।
विभाजन के दर्द पर बनी यह फिल्म एक महिला की कहानी है, जो अपहरण और विस्थापन के बाद भी जीने की जंग लड़ती है। यह ग्रामीण सीमावर्ती इलाकों के टूटते सामाजिक ताने-बाने को भावनात्मक ढंग से दिखाती है।
एक मां की कहानी, जो बगावत के दौर में अपने लापता बेटे की तलाश में भटकती है। यह फिल्म बताती है कि गांवों में आम परिवार कैसे राजनीति और हिंसा के बीच पिसते रहे।
इन फिल्मों और सीरीज को देखने के बाद आप समझ पाएंगे कि पंजाब सिर्फ जश्न का नाम नहीं, बल्कि जिद, दर्द और हौसले की कहानी भी है।