भारतीय स्मार्टफोन बाजार इस समय एक बड़े ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है। असल में, एक रिपोर्ट आने के बाद से तो चिंता और भी बढ़ने लगी है। हाल ही में मार्केट रिसर्च फर्म IDC की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 2026) में भारत का स्मार्टफोन मार्केट सालाना तौर पर 11.1 प्रतिशत घटकर केवल और केवल 3.32 करोड़ यूनिट्स पर आ पहुंचा है, यह आंकड़ों कई सालों में सबसे काम बताया जा रहा है। इसके सबसे बड़े कारण के तौर पर इस समय दुनिया भर में चल रही मेमोरी चिप्स की भारी किल्लत को माना जा रहा है। सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत के कारण स्मार्टफोन मेकर्स के पास डिस्काउंट देने का मार्जिन खत्म हो गया है, जिससे फोन्स की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, और इसी कारण स्मार्टफोन्स की सेल में गिरावट नोट की जा रही है।
इस चिप संकट का सबसे बुरा असर बजट यानी एंट्री-लेवल सेगमेंट पर देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 100 डॉलर (लगभग 8,500 रुपये) से कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स के शिपमेंट्स में 74.3 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है।
इस रिपोर्ट में ऐसा भी सामने आ रहा है कि बजट कैटेगरी की मार्केट हिस्सेदारी 15.6% से घटकर केवल 4.5% ही रह गई है। मेमोरी की लागत बढ़ने से ब्रांड्स के लिए इस सेगमेंट में सस्ते फोन्स बनाकर मुनाफा कमाना बेहद मुश्किल हो गया है, जिसके चलते कंपनियों ने नए बजट फोन लॉन्च करना कम कर दिया है।
बजट कैटेगरी में ऑप्शन खत्म होने की वजह से भारतीय ग्राहक अब मजबूरन महंगे फोन्स की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। इसी का नतीजा है कि भारत में स्मार्टफोन की औसत सेल कीमत (ASP) 14.4 प्रतिशत बढ़कर अभी तक के सबसे ऊंचे लेवल यानि 315 डॉलर (लगभग 30,000 रुपये) पर पहुंच गई है। हालांकि, यहाँ दिलचस्प बात यह है कि 400 डॉलर से 600 डॉलर (लगभग 35,000 रुपये से 50,000 रुपये) वाले सेगमेंट में 60.3 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है। हालांकि, 100 डॉलर से 200 डॉलर (8,500 रुपये से 17,000 रुपये) वाला ब्रैकेट अभी भी 46.8% शेयर के साथ सबसे बड़ा सेगमेंट बना हुआ है।
इस मार्केट मंदी के दौर में भी सैमसंग और ऐप्पल जैसे दिग्गजों ने खुद को मजबूती से संभाले रखा है। ऐप्पल 27 प्रतिशत मार्केट वैल्यू शेयर के साथ भारतीय बाजार में सबसे आगे बना हुआ है। दूसरी तरफ, शाओमी, वीवो, ओप्पो और रियलमी जैसी चीनी कंपनियों के शिपमेंट्स में गिरावट दर्ज की गई है। सबसे बड़ा झटका iQOO को लगा है, जिसके शिपमेंट्स में 61 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है।
सस्ते 5G कंपोनेंट्स की कमी से निपटने के लिए ब्रांड्स ने अस्थाई रूप से सस्ते 4G फोन्स को दोबारा बढ़ावा देना शुरू किया है, जिससे 4G का मार्केट शेयर बढ़कर 11.1% हो गया है। IDC का अनुमान है कि 2026 की दूसरी छमाही (H2) में स्मार्टफोन शिपमेंट्स में 15% से ज्यादा की गिरावट आ सकती है, जिससे पूरे साल का कुल शिपमेंट वॉल्यूम घटकर 12.8 से 13 करोड़ यूनिट्स के आसपास रहने की संभावना है।
यह भी पढ़ें: BSNL ग्राहकों के लिए खुशखबरी..2 लाख नए टावर से मिलेगा 4G नेटवर्क, कब तक होगा शुभारंभ