SIM-बाइंडिंग नियम के लिए WhatsApp, Telegram को मिल सकती है मोहलत, सरकार बढ़ा सकती है डेडलाइन

HIGHLIGHTS

SIM binding नियम की डेडलाइन दिसंबर 2026 तक बढ़ सकती है

मैसेजिंग ऐप्स में SIM आधारित सुरक्षा लागू होगी

सरकार साइबर फ्रॉड रोकने के लिए यह कदम उठा रही है

भारत में मैसेजिंग ऐप्स के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है, लेकिन तुरंत नहीं. सरकार अब SIM-बाइंडिंग नियम लागू करने की डेडलाइन को बढ़ाने की तैयारी में है, जिससे कंपनियों को ज्यादा समय मिल सके. डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन के अधिकारियों के मुताबिक, सरकार अब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को दिसंबर 2026 तक का समय देने पर विचार कर रही है.

इसमें WhatsApp, Telegram और दूसरे ऐप्स शामिल हैं, जो मोबाइल नंबर के जरिए यूजर पहचान करते हैं. पहले कंपनियों को सिर्फ 90 दिन का समय दिया गया था, लेकिन अब साफ हो गया है कि इतना कम समय बड़े बदलाव के लिए काफी नहीं था.

SIM-बाइंडिंग नियम

इस नियम का सीधा मतलब है कि आपका मैसेजिंग ऐप अकाउंट उसी फोन में काम करेगा जिसमें आपका एक्टिव SIM लगा हुआ है. अगर आप SIM निकालते हैं, बदलते हैं या डिएक्टिवेट हो जाता है, तो ऐप आपको लॉगआउट कर देगा या दोबारा वेरिफिकेशन मांगेगा. सरकार का मानना है कि इससे फर्जी अकाउंट और नंबर के जरिए होने वाले फ्रॉड को काफी हद तक रोका जा सकता है.

सरकार की सख्ती

भारत में साइबर फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है, और इसमें ज्यादातर केस ऐसे होते हैं जहां स्कैमर्स पुराने या विदेश से जुड़े SIM का इस्तेमाल करते हैं. SIM-binding लागू होने से ऐसे यूजर्स को ट्रैक करना आसान होगा और अनजान या फर्जी पहचान छिपाना मुश्किल हो जाएगा.

वेब और डेस्कटॉप पर क्या असर पड़ेगा

यह नियम सिर्फ मोबाइल तक सीमित नहीं रहेगा. इसका मकसद यह है कि कोई भी बिना फोन के लगातार अकाउंट एक्सेस न कर सके.

  • आने वाले समय में वेब और डेस्कटॉप वर्जन पर भी सख्ती बढ़ेगी.
  • यूजर्स को हर कुछ घंटों में लॉगआउट किया जा सकता है.
  • दोबारा लॉगिन के लिए फोन से QR कोड स्कैन करना जरूरी होगा.

डेडलाइन क्यों बढ़ाई जा रही है

कंपनियों ने साफ कहा है कि इतने बड़े बदलाव को लागू करना आसान नहीं है. टेक्निकल दिक्कतें, सिस्टम अपडेट और प्लेटफॉर्म लेवल पर बदलाव की जरूरत इसकी सबसे बड़ी वजह है. Android डिवाइस पर इसे लागू करना थोड़ा आसान माना जा रहा है, लेकिन iOS पर ज्यादा सीमाएं हैं, जिससे देरी हो रही है.

सरकार अब इसे एक साथ लागू करने की बजाय धीरे-धीरे लागू करना चाहती है, ताकि सिस्टम सही तरीके से काम करे और यूजर एक्सपीरियंस खराब न हो.

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Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं.

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