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भारत में इंटरनेट इस्तेमाल का तरीका आने वाले समय में बदल सकता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, Department of Telecommunications (DoT) मोबाइल डेटा पर टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है. इस पर चर्चा एक उच्च स्तरीय बैठक में हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी.
रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत जैसे देश में जहां इंटरनेट सस्ता और आसानी से उपलब्ध है, वहां यूजर्स को हर GB डेटा पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है. यानी यूजर्स पर फिर से महंगाई की मार पड़ सकती है और इंटरनेट इस्तेमाल का तरीका पूरी तरह से बदल सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार प्रति GB डेटा पर 1 रुपये टैक्स लगाने के विकल्प पर विचार कर रही है. यह चर्चा जनवरी 2026 की बैठक में सामने आई थी और DoT को इस पर विस्तृत योजना तैयार करने के लिए सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है.
सरकार का उद्देश्य दो मुख्य बातों पर आधारित है. इसमें पहला, टेलीकॉम सेक्टर के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना है जबकि
दूसरा, मोबाइल डेटा के गलत इस्तेमाल को कम करना है.
Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) के आंकड़ों के अनुसार FY25 में भारत के 80 करोड़ से अधिक इंटरनेट यूजर्स ने करीब 229 अरब GB मोबाइल डेटा इस्तेमाल किया. अगर हर GB पर 1 रुपये टैक्स लगाया जाता है, तो सरकार को सालाना करीब 22,900 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो सकती है.
लेकिन इसका सीधा असर आम यूजर की जेब पर पड़ेगा. एक सामान्य 2GB प्रतिदिन वाले प्लान में, जो महीने में करीब 60GB डेटा देता है, यूजर को हर महीने लगभग 60 रुपये अतिरिक्त देने होंगे. औसतन 21GB डेटा इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को भी हर महीने 21 से 22 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं, जो पहले से लागू 18% GST के ऊपर होगा.
पिछले कुछ वर्षों में टेलीकॉम टैरिफ पहले ही बढ़ चुके हैं. ऐसे में नया टैक्स आने से खर्च और बढ़ जाएगा. एक परिवार जिसमें कई मोबाइल कनेक्शन हैं, उनका मासिक खर्च 200 से 300 रुपये तक बढ़ सकता है. यह बढ़ोतरी अमीर वर्ग के लिए बड़ी समस्या नहीं होगी, लेकिन दिहाड़ी मजदूर, गिग वर्कर, लोअर मिडिल क्लास परिवार के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है. कई लोगों के सामने इंटरनेट और जरूरी खर्चों के बीच चुनाव की स्थिति बन सकती है.
आज के समय में इंटरनेट सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है. लाखों छात्रों के लिए मोबाइल डेटा ही उनकी पढ़ाई का जरिया है. ऑनलाइन क्लास, YouTube लेक्चर और सरकारी शिक्षा पोर्टल लगातार डेटा का उपयोग करते हैं. अगर हर महीने 50-60 रुपये का अतिरिक्त खर्च जुड़ता है, तो कई परिवार बच्चों के डेटा इस्तेमाल को सीमित कर सकते हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो सकती है.
इसके अलावा नौकरी ढूंढ रहे युवाओं और वर्क फ्रॉम होम करने वाले प्रोफेशनल्स पर भी असर पड़ेगा. इंटरव्यू के लिए वीडियो कॉल कम हो सकती हैं, Zoom मीटिंग्स सीमित करनी पड़ सकती हैं फ्रीलांसर को डेटा बचाने के लिए काम कम करना पड़ सकता है.
यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह प्रस्ताव अभी केवल विचार के स्तर पर है. सरकार ने अभी तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है. लेकिन, अगर यह लागू होता है, तो भारत में सस्ते इंटरनेट का दौर धीरे-धीरे खत्म हो सकता है और डिजिटल सेवाएं आम लोगों के लिए महंगी पड़ सकती हैं.
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