क्या आप जानते हैं कि क्रिकेट के मैदान पर अब खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) भी नजर आएगा? गेमिंग ऐप्स के जाने के बाद जो जगह खाली हुई थी, उसे भरने के लिए अब बड़ी-बड़ी AI कंपनियां आगे आ रही हैं. Google के AI प्लेटफॉर्म Gemini ने IPL के साथ एक बहुत बड़ी डील साइन की है. यह सौदा करोड़ों में हुआ है. आइए जानते हैं कि आखिर क्यों AI कंपनियां क्रिकेट पर इतना पैसा लगा रही हैं और इससे क्या बदलने वाला है.
AI प्लेटफॉर्म्स अब क्रिकेट स्पोंसरशिप में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. इसी कड़ी में Google के स्वामित्व वाले Gemini ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के साथ तीन साल का स्पोंसरशिप समझौता किया है. सूत्रों की मानें तो यह डील करीब 270 करोड़ रुपये की है. यह समझौता दिखाता है कि AI प्लेटफॉर्म्स भारतीय क्रिकेट में अपनी पैठ बनाने के लिए कितने गंभीर हैं. आपको बता दें कि इससे पहले पिछले साल के अंत में ChatGPT भी विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) का स्पांसर बना था, जिसके साथ 16 करोड़ रुपये की दो साल की डील हुई थी.
एआई कंपनियों की यह एंट्री ऐसे समय में हो रही है जब रियल-मनी गेमिंग ऐप्स पर लगे बैन ने बाजार में एक बड़ा खालीपन पैदा कर दिया है. जब पिछले साल यह बैन लागू हुआ था, तो विज्ञापन की दुनिया से लगभग 7,000 करोड़ रुपये का पैसा रातों-रात गायब हो गया था. क्रिकेट स्पोंसरशिप का बाजार सूना पड़ गया था. अब Gemini और अन्य एआई कंपनियां उस खाली जगह को भरने और क्रिकेट प्रेमियों के बीच अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं.
भले ही एआई कंपनियां पैसा लगा रही हैं, लेकिन अभी भी यह गेमिंग ऐप्स के खर्च के मुकाबले बहुत कम है. अनुमान है कि एआई प्लेटफॉर्म्स इस साल अपनी जागरूकता बढ़ाने के लिए विज्ञापनों और क्रिकेट स्पोंसरशिप पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च कर सकते हैं. यह रकम सुनने में बड़ी लग सकती है, लेकिन गेमिंग ऐप्स जो खर्च किया करते थे, यह उसका एक बहुत छोटा सा हिस्सा है. फिर भी, यह एक नई शुरुआत है और आने वाले समय में एआई विज्ञापनों की बाढ़ देखने को मिल सकती है.
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