दिल्ली के बुजुर्ग दंपत्ति हुए डिजिटल अरेस्ट के शिकार, डर दिखाकर दो हफ्ते तक बनाया बंधक, करोड़ों रुपये की हो गई ठगी

Updated on 12-Jan-2026

दक्षिण दिल्ली का ग्रेटर कैलाश (GK), जो राजधानी के सबसे पॉश इलाकों में गिना जाता है, हाल ही में एक दिल दहला देने वाली साइबर ठगी का गवाह बना. यहाँ रहने वाले एक बुजुर्ग दंपत्ति, जिन्होंने अपना पूरा जीवन सम्मान और सेवा में बिताया, ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) के जाल में फंसकर अपनी जीवन भर की कमाई गवां बैठे.

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, ओम तनेजा (81) और उनकी पत्नी डॉ. इंदिरा तनेजा (77) अमेरिका में 45 साल बिताने के बाद 2015 में इस सोच के साथ भारत लौटे थे कि वे अपने देश की सेवा करेंगे. लेकिन एक दोपहर, जब वे एक चैरिटेबल इवेंट में जाने की तैयारी कर रहे थे, एक फोन कॉल ने उनकी दुनिया बदल दी. खुद को ट्राई (TRAI) और पुलिस अधिकारी बताकर ठगों ने उन्हें दो सप्ताह तक डिजिटल बंधक बनाए रखा और डरा-धमकाकर उनसे कुल 14.8 करोड़ रुपये ठग लिए.

एक कॉल जिसने बदल दी जिंदगी: मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा जाल

घटना की शुरुआत एक साधारण फोन कॉल से हुई. डॉ. इंदिरा तनेजा अपने ड्राइवर को बुलाने ही वाली थीं कि उनके पास एक कॉल आई. कॉल करने वाले ने दावा किया कि वह टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) से बोल रहा है. उसने कहा कि इंदिरा के नाम पर पंजीकृत एक मोबाइल नंबर मुंबई में मनी-लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के एक मामले में सामने आया है.

जब इंदिरा ने कहा कि वह नंबर उनका नहीं है, तो कॉलर ने उन्हें डराया कि उनका फोन डिस्कनेक्ट कर दिया जाएगा और कॉल को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन ट्रांसफर कर दिया. यह सुनियोजित नाटक इतना असली लग रहा था कि आईआईटी दिल्ली और लेडी हार्डिंग जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़े और संयुक्त राष्ट्र (UN) में काम कर चुके ये बुजुर्ग भी घबरा गए. वे समझ ही नहीं पाए कि एक अपराधी जांच में उनका नाम कैसे आ सकता है.

पुलिस की वर्दी और वीडियो कॉल का खौफ

इसके बाद जो हुआ, उसने उनके डर को यकीन में बदल दिया. इंदिरा को एक वीडियो कॉल आया, जिसमें दूसरी तरफ पुलिस की वर्दी पहने एक शख्स बैठा था. उसने अपना नाम ‘विक्रांत सिंह राजपूत’ बताया और अपने पीछे पुलिस का प्रतीक चिन्ह (Emblem) भी लगा रखा था. उसने दंपत्ति को बताया कि नरेश गोयल नामक व्यक्ति ने रक्षा मंत्रालय के साथ 500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है, और उस पैसे को लॉन्डर करने के लिए इंदिरा के नाम पर कैनरा बैंक खाते का इस्तेमाल किया गया है.

ठग ने दावा किया कि इंदिरा के खिलाफ मुख्य सहयोगी और उनके पति के खिलाफ सह-आरोपी के रूप में वारंट जारी किया गया है. चूंकि ओम तनेजा की हाल ही में सर्जरी हुई थी और एम्स में इलाज चल रहा था, इसलिए वे मुंबई जाने में असमर्थ थे. इसका फायदा उठाते हुए ठगों ने उनसे 15 अलग-अलग अधिकारियों को पत्र लिखवाए और उन्हें घर पर ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया.

फर्जी सुप्रीम कोर्ट सुनवाई और करोड़ों का ट्रांजेक्शन

अगले दिन, ठगों ने हदें पार करते हुए एक फर्जी ‘सुप्रीम कोर्ट सुनवाई’ का नाटक रचा. ‘वेरिफिकेशन प्रक्रिया’ (Verification Process) की आड़ में, उन्होंने दंपत्ति से कहा कि उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अपना पैसा ‘पुलिस’ द्वारा दिए गए खातों में ट्रांसफर करना होगा, जिसे बाद में आरबीआई (RBI) जांच के बाद लौटा देगा.

इस दौरान ‘डीके गुप्ता’ नामक एक फर्जी आईपीएस अधिकारी भी कॉल में शामिल हुआ. उसने भरोसा दिलाया कि वेरिफिकेशन के बाद पैसा वापस मिल जाएगा. डरी हुई इंदिरा को बैंक जाकर आरटीजीएस (RTGS) करने को कहा गया, जबकि उनके पति को घर पर वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा गया. बैंक अधिकारियों के पूछने पर उन्हें यह झूठ बोलने के लिए मजबूर किया गया कि वे यह पैसा चैरिटी में दे रहे हैं. 29 दिसंबर से 9 जनवरी के बीच, उन्होंने कुल 8 बार में लगभग 14.85 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए.

थाने में खुलासा: ‘वो मर गया’

9 जनवरी को, ठगों ने कहा कि वेरिफिकेशन पूरा हो गया है और इंदिरा को एक आरबीआई नंबर दिया गया जिसे लेकर उन्हें नजदीकी पुलिस स्टेशन जाने को कहा गया. हैरान करने वाली बात यह थी कि ठग ‘डीके गुप्ता’ उस वक्त भी कॉल पर बना रहा जब इंदिरा सीआर पार्क (CR Park) पुलिस स्टेशन पहुंचीं. जब असली एसएचओ (SHO) ने वह फर्जी आरबीआई नंबर देखा और सवाल किया, तो फोन पर मौजूद ठग ने असली पुलिस अधिकारी पर ही चिल्लाना शुरू कर दिया.

जब इंदिरा ने पूछा कि डीके गुप्ता कौन है, तो कॉल पर मौजूद दूसरे ठग ने तंज कसते हुए कहा, “वो मर गया.” तभी असली एसएचओ को समझ आया कि यह एक ‘डिजिटल अरेस्ट स्कैम’ है और उन्होंने कॉल काट दी. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. दंपत्ति ने नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई है और दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट ने जांच शुरू कर दी है.

यह भी पढ़ें: वेदों की चोरी और मत्स्यावतार का रहस्य! OTT पर नई सीरीज ‘देवखेल’, कर लें देखने की प्लानिंग

Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं.

Connect On :