1 फरवरी 2026, यानी बजट वाले दिन की शुरुआत निवेशकों के लिए किसी झटके से कम नहीं रही। बजट भाषण शुरू होने से पहले ही कमोडिटी बाजार में ऐसा भूचाल आया कि सोना और चांदी दोनों रिकॉर्ड गिरावट के साथ खुल गए। वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती, बजट से जुड़ी अटकलें और पिछले कुछ हफ्तों की तेज़ तेजी के बाद आई मुनाफावसूली ने मिलकर कीमती धातुओं को नीचे खींच दिया। हालात ऐसे बने कि MCX पर दोनों धातुएं लोअर सर्किट तक पहुंच गईं।
Budget Day पर कितने टूटे दाम? सीधे आंकड़ों में समझिए
बजट वाले दिन सुबह कारोबार शुरू होते ही बिकवाली हावी दिखी।
सोना करीब 6% टूटकर 1,43,205 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 1,52,345 रुपये पर बंद हुआ था।
वहीं चांदी में और भी तेज गिरावट देखने को मिली और यह 17,500 रुपये से ज्यादा टूटकर 2,74,410 रुपये प्रति किलो पर खुली।
स्पॉट मार्केट में भी हालात कुछ अलग नहीं थे, जहां चांदी 2.65 रुपये लाख के आसपास फिसलती नजर आई।
रिकॉर्ड हाई से अब तक कितनी बड़ी गिरावट आ चुकी है?
यह गिरावट सिर्फ एक दिन की कहानी नहीं है।
30 जनवरी 2026 को ही सोना और चांदी अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंचे थे
सोना करीब 1.83 रुपये लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी 4.04 रुपये लाख प्रति किलो तक चली गई थी।
लेकिन इसके बाद हालात पलट गए।
अब तक के हिसाब से सोना 40 हजार रुपये से ज्यादा और चांदी करीब 1.3 लाख रुपये नीचे आ चुकी है। इतनी तेज गिरावट कम ही देखने को मिलती है।
आखिर क्यों फिसले सोना-चांदी? असली वजह क्या है
सबसे बड़ी वजह बजट से जुड़ी उम्मीदें मानी जा रही हैं। बाजार में यह चर्चा तेज है कि सरकार इस बार सोने-चांदी पर आयात शुल्क घटा सकती है। मौजूदा 6% ड्यूटी को 4% तक लाने की अटकलों ने पहले ही दामों पर दबाव बना दिया।
दूसरा बड़ा कारण है अमेरिकी डॉलर की मजबूती। फेडरल रिजर्व से जुड़ी खबरों के बाद डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ, और जैसे ही डॉलर चढ़ता है, सोना-चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की चमक थोड़ी फीकी पड़ जाती है।
तीसरी और शायद सबसे अहम वजह है मुनाफावसूली। जनवरी 2026 में सोना करीब 20% और चांदी लगभग 30% तक चढ़ चुकी थी। इतनी तेज तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया, और उसी बिकवाली ने गिरावट को और गहरा कर दिया।
बजट के बाद बाजार किस दिशा में जाएगा?
अब सारी नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट ऐलानों पर टिकी हैं।
ज्वेलरी सेक्टर सरकार से लगातार मांग कर रहा है कि आयात शुल्क कम किया जाए और GST को 3% से घटाकर 1.5% किया जाए, ताकि मांग में जान आ सके।
अगर बजट में इस दिशा में कोई राहत मिलती है, तो सोना-चांदी यहां से संभल सकते हैं।
लेकिन अगर उम्मीदों के उलट फैसला आता है, तो दबाव कुछ और दिन बना रह सकता है।