केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सरकार ने टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान India Semiconductor Mission 2.0 की घोषणा की है, जिसके लिए 40,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया गया है।
इस नई फेज़ का मकसद सिर्फ चिप फैक्ट्रियां लगाना नहीं, बल्कि भारत को डिज़ाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, पैकेजिंग और कच्चे माल तक एक पूरी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में बदलना है। सरकार साफ तौर पर यह संकेत दे चुकी है कि अब भारत केवल चिप्स का उपभोक्ता नहीं, बल्कि ग्लोबल सप्लायर बनना चाहता है।
India Semiconductor Mission की शुरुआत साल 2021 में Ministry of Electronics and IT (MeitY) के तहत की गई थी। Mission 2.0 उसी का विस्तारित और ज्यादा मजबूत संस्करण है।
जहां पहला चरण मुख्य रूप से फैब्रिकेशन यूनिट्स पर केंद्रित था, वहीं Mission 2.0 का फोकस कहीं ज्यादा व्यापक है। इसमें अब नीचे दिए गए कुछ तत्त्वों को शामिल कर लिया गया है।
Semiconductor Mission 2.0 का सबसे अहम बदलाव है इंडस्ट्री-बेस्ड रिसर्च और ट्रेनिंग सिस्टम। सरकार चाहती है कि अब कंपनियां सिर्फ फैक्ट्रियां न लगाएं, बल्कि भारत में ही इंजीनियरों और टेक्नीशियनों को ट्रेन करें।
इससे चिप डिज़ाइन, टेस्टिंग और मैन्युफैक्चरिंग में लोकल टैलेंट तैयार होगा, जो आगे चलकर इलेक्ट्रॉनिक्स, AI और हाई-टेक इंडस्ट्री को मजबूती देगा। लंबे समय में यह कदम भारत को टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भर बनाएगा।
40,000 करोड़ रुपये की यह फंडिंग उन सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को भी रफ्तार देगी, जिन्हें पहले अतिरिक्त निवेश की जरूरत थी। ग्लोबल चिप कंपनियों के लिए नीति में स्थिरता और लॉन्ग-टर्म फाइनेंसिंग सबसे बड़ा फैक्टर होता है, और यह बजट उसी भरोसे को मजबूत करता है।
Mission 2.0 का एक बड़ा उद्देश्य यह भी है कि वैश्विक चिप शॉर्टेज जैसे जोखिमों से भारत को सुरक्षित रखा जा सके और सप्लाई चेन पूरी तरह देश के अंदर विकसित हो।
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