Apple के डिवाइस को लेकर जहां आमतौर पर प्रीमियम प्राइस टैग और फीचर्स की चर्चा होती है, वहीं एक बार फिर कंपनी का iPhone चर्चा में है. इस बार इसकी वजह किसी की जान बचाना है. अमेरिका के कोलोराडो में Snowmass Mountain पर एक 53 वर्षीय पर्वतारोही बर्फीली ढलान पर फंस गया था, लेकिन उसकी जान बच गई.
इसमें उसका Apple iPhone काफी काम आया. Apple iPhone में Emergency SOS via Satellite फीचर दिया जाता है. जिसकी वजह से उसकी जान बच गई. KDVR और Apple Insider की रिपोर्ट के अनुसार, यह पर्वतारोही Snowmass Mountain की चोटी पर चढ़ने के बाद नीचे लौट रहा था.
उसने ‘ग्लिसेडिंग’ नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें पर्वतारोही बर्फ से ढकी ढलानों पर संतुलन के साथ नीचे स्लाइड करते हैं. लेकिन इस दौरान उसकी कलाई पर गंभीर चोट आ गई और वह आगे चलने की स्थिति में नहीं रहा. उसके पास न तो वाई-फाई था, न ही मोबाइल नेटवर्क. ऐसे हालात में आमतौर पर मदद मिलना लगभग नामुमकिन होता है.
लेकिन यहां उसके iPhone ने कमाल कर दिखाया. उस व्यक्ति ने iPhone के Satellite Messaging फीचर के जरिए अपने परिवार के सदस्य को एक संक्षिप्त मैसेज भेजा. उस मैसेज में उसने अपने लोकेशन और स्थिति की जानकारी दी. जैसे ही मैसेज परिवार के सदस्य को मिला, उन्होंने बिना देरी किए Pitkin County Sheriff’s Office और Mountain Rescue Aspen को सूचित किया.
रेस्क्यू टीम को इस सूचना के आधार पर पर्वतारोही की सटीक लोकेशन का पता चल गया. इसके बाद Mountain Rescue Aspen की ओर से 17 स्वयंसेवकों की एक टीम तत्काल मौके के लिए रवाना की गई. रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरी रेस्क्यू टीम बेहद खतरनाक और दुर्गम इलाके से होकर उस पर्वतारोही तक पहुंची और उसे सुरक्षित निकाला गया.
Mountain Rescue Aspen के अधिकारियों ने इस घटना के बाद कहा कि ऐसे इलाके में यात्रा करने से पहले कोई न कोई इमरजेंसी कम्युनिकेशन डिवाइस साथ रखना अनिवार्य है. उन्होंने इस बात को दोहराया कि Apple iPhone का Satellite SOS Messaging फीचर इस रेस्क्यू ऑपरेशन में बेहद कारगर साबित हुआ. बिना नेटवर्क के भी मदद मांगने की सुविधा ने एक और जान बचा ली.
अब बात करते हैं कि यह फीचर कैसे काम करता है. Apple ने iPhone 14 और उसके बाद आने वाले सभी मॉडलों में Emergency SOS via Satellite फीचर जोड़ा है. जब भी यूजर ऐसी जगह होता है जहां कोई नेटवर्क नहीं है तो वह iPhone को आसमान की तरफ पॉइंट करके ऑन-स्क्रीन-इंस्ट्रक्शन के जरिए एक SOS मैसेज भेज सकता है.
इस फीचर में एक इंटरएक्टिव क्वेश्चन-आंसर सिस्टम होता है, जो यूजर से उसकी हालत और जरूरत की जानकारी लेकर उसे उपग्रह के जरिए इमरजेंसी टीमों तक पहुंचाता है. मैसेज भेजने के बाद रेस्क्यू टीम और यूजर के बीच मैसेज के जरिए बातचीत भी हो सकती है ताकि सही जगह और स्थिति का आकलन किया जा सके.
यह टेक्नोलॉजी मोबाइल टावर्स पर निर्भर नहीं होती बल्कि सीधे पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में मौजूद सैटेलाइट्स से कनेक्ट करती है. यही कारण है कि सिग्नल न होने पर भी इसकी मदद से मैसेज भेजे जा सकते हैं. ऐसे हालात में यह सिस्टम पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी और तेज साबित होता है.
यह ध्यान देना जरूरी है कि Emergency SOS via Satellite फीचर अभी सिर्फ चुनिंदा देशों में ही उपलब्ध है जैसे कि अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, इटली आदि. भारत में यह सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है, हालांकि Apple भविष्य में इस सर्विस का विस्तार कर सकता है.
Apple की ओर से अब तक कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं जहां उसके डिवाइस ने यूजर्स की जान बचाई है. फिर चाहे वह iPhone की Crash Detection हो या Apple Watch की Heart Rate Monitoring. लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सिद्ध करती है कि तकनीक सिर्फ मनोरंजन और लग्जरी नहीं, बल्कि ज़िंदगी से जुड़ी जरूरी चीज बन चुकी है.
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