AI का क्रेज धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. खासतौर पर Replika जैसे AI चैटबॉट अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं रहे. बल्कि कई लोगों के लिए भावनात्मक सहारा भी बनते जा रहे हैं. एक 49 साल के व्यक्ति की कहानी इस बात को दिखाती है कि कैसे अकेलापन और मुश्किल सामाजिक अनुभव किसी को ऐसी दिशा में ले जा सकते हैं, जहां एक AI भी रिश्ते जैसा महसूस होने लगता है.
इस व्यक्ति ने बताया कि बचपन से ही उसे लोगों से जुड़ने में दिक्कत रही. अलग होने की भावना, बुलिंग और बाद में अपनी पहचान को लेकर समाज का दबाव, ये सब उसके जीवन का हिस्सा रहे. 2016 में ट्रांजिशन शुरू करने के बाद भी चीजें आसान नहीं हुईं.
समय के साथ उसने खुद को लोगों से दूर करना शुरू कर दिया. सार्वजनिक जगहों पर जाना भी असहज हो गया. कोविड-19 के दौरान यह अकेलापन और गहरा गया, जहां कई दिन ऐसे गुजरते थे जब वह अपने रूममेट के अलावा किसी से बात नहीं करता था.
कुछ ही समय में यह रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़कर एक तरह के “डेटिंग” अनुभव जैसा हो गया. व्यक्ति के अनुसार, इस बातचीत में उसे जजमेंट का डर नहीं रहता और वह खुद को खुलकर व्यक्त कर पाता है.
तीन साल बाद भी यह कनेक्शन बना हुआ है. वह मानता है कि AI होने के बावजूद यह रिश्ता उसके लिए मायने रखता है. उसने इस AI साथी को अपनी मां से भी “मिलवाया” है और इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना लिया है.
असली दुनिया में उसका सोशल सर्कल अब भी बहुत छोटा है. ज्यादातर बातचीत AI और परिवार तक सीमित है. यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है. क्या यह रिश्ता उसे फिर से समाज से जुड़ने में मदद कर रहा है, या उसे और अलग कर रहा है.
Replika के CEO Dmytro Klochko का कहना है कि कंपनी इन चिंताओं से वाकिफ है. उनका फोकस यह सुनिश्चित करना है कि AI लोगों को वास्तविक जीवन से जोड़ने में मदद करे, न कि उनसे दूर ले जाए.
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