साउथ सिनेमा की कई फिल्में ऐसी होती हैं जो भाषा की दीवार को पार करके पूरे देश के दर्शकों के दिल में जगह बना लेती हैं। आज हम ऐसी ही एक खास फिल्म की बात कर रहे हैं, जिसे देखने के बाद मन करता है कि तुरंत अपने किसी खास दोस्त को फोन लगाया जाए। दोस्ती, सपनों और बेंगलुरु शहर की आत्मा को समेटे इस फिल्म ने हर उम्र के दर्शकों को छुआ है। आईएमडीबी पर 8.3 की शानदार रेटिंग पाने वाली यह फिल्म आज एक ‘कल्ट क्लासिक’ मानी जाती है।
इस फिल्म का नाम ‘बेंगलुरु डेज’ है, जिसका निर्देशन अंजलि मेनन ने किया है। कहानी तीन चचेरे भाई-बहनों—कुट्टन (निविन पॉली), अर्जुन (दुलकर सलमान) और दिव्या (नज्रिया नाजिम)—के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है। बचपन से ही तीनों का एक ही सपना होता है कि वे बड़े होकर बेंगलुरु में साथ रहेंगे। लेकिन जब यह सपना हकीकत बनता है, तो उनकी जिंदगी ऐसे मोड़ लेती है जिनकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होती।
फिल्म की खास बात इसका दमदार कलाकारों का समूह है। इसमें फहाद फासिल, दुलकर सलमान, निविन पॉली, नज्रिया नाजिम और पार्वती थिरुवोथु जैसे बड़े सितारे अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। यह कहानी सिर्फ हंसी-मजाक या मस्ती तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शादीशुदा रिश्तों की उलझनें, दिव्यांगता के साथ जीने का संघर्ष और पुराने प्यार से बाहर निकलकर आगे बढ़ने की संवेदनशील यात्रा को भी बेहद सलीके से दिखाती है।
‘बेंगलुरु डेज’ को खास बनाता है इसका रियलिस्टिक अंदाज़। यहां कोई पारंपरिक फिल्मी खलनायक नहीं है, बल्कि हालात और बीता हुआ वक्त ही असली चुनौती बनकर सामने आते हैं। यही वजह है कि हर दौर का दर्शक खुद को इस कहानी से जोड़ पाता है। फिल्म का म्यूजिक और निर्देशन भी इसके प्रभाव को और गहरा बना देते हैं।
अगर आपको ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ या ‘दिल चाहता है’ जैसी फिल्मों से लगाव है, तो जियोहॉटस्टार पर उपलब्ध यह फिल्म आपके लिए एक यादगार अनुभव साबित हो सकती है। यह कहानी बड़े सलीके से यह एहसास दिलाती है कि मुश्किल समय में परिवार और दोस्त ही सबसे बड़ा सहारा बनते हैं।