तमिल सिनेमा की कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो समय के साथ-साथ और गहरी होती चली जाती हैं। कमल हासन और आर. माधवन की एक ऐसी ही फिल्म है, जिसे केवल मनोरंजन के तौर पर नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की दार्शनिक धरोहर के रूप में देखा जाता है। यह फिल्म थोड़ी पुरानी जरूर है, लेकिन इसकी सोच आज भी उतनी ही परफेक्ट लगती है। खास बात यह है कि इसकी कहानी खुद कमल हासन ने लिखी थी, जबकि निर्देशन की कमान सुंदर सी. ने संभाली थी। IMDb पर इसे 8.6 की शानदार रेटिंग मिली है और आज इसे एक सच्चा “कल्ट क्लासिक” माना जाता है।
इस फिल्म का नाम ‘अन्बे शिवम’ है, जिसका अर्थ है “प्रेम ही ईश्वर है।” कहानी दो बिल्कुल विपरीत सोच वाले लोगों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी मुलाकात एक अनचाहे सफर के दौरान होती है। कमल हासन द्वारा निभाया गया किरदार नल्लाशिवम एक उम्रदराज, अनुभवी और नास्तिक व्यक्ति है, जबकि आर. माधवन का किरदार अनबरसु एक युवा, आत्ममुग्ध और ईश्वर में आस्था रखने वाला इंसान है। दोनों भुवनेश्वर से चेन्नई की यात्रा पर होते हैं, लेकिन खराब मौसम और ट्रेन छूटने की वजह से हालात ऐसे बनते हैं कि उन्हें साथ रहना पड़ता है। यहीं से फिल्म की असली यात्रा शुरू होती है, जो बाहरी सफर से ज्यादा अंदरूनी बदलाव की कहानी बन जाती है।
कमल हासन और आर. माधवन की जोड़ी इस फिल्म की आत्मा है। दोनों कलाकारों की अदाकारी इतनी सच्ची और प्रभावशाली है कि हर सीन दिल को छू जाता है। खासतौर पर फिल्म का अंत ऐसा है जो भावनाओं को झकझोर देता है और आंखें नम कर देता है। यह कहानी धीरे-धीरे यह एहसास कराती है कि ईश्वर किसी इमारत में नहीं, बल्कि इंसानियत, करुणा और एक-दूसरे के लिए प्रेम में बसता है।
दिलचस्प बात यह है कि 2003 में रिलीज होने के बावजूद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई थी। उस दौर में दर्शक शायद इसकी गहराई को पूरी तरह समझ नहीं सके। लेकिन समय के साथ, जब यह टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंची, तो लोगों ने इसे दोबारा खोजा, देखा और सराहा। यही वजह है कि आज ‘अन्बे शिवम’ को तमिल सिनेमा की सबसे उम्दा फिल्मों में गिना जाता है।
अगर आपको बॉलीवुड फिल्म ‘ओएमजी’ पसंद आई थी, तो यह फिल्म भी आपको जरूर प्रभावित करेगी। यह आपको जीवन को नए नजरिए से देखने, छोटी-छोटी खुशियों की अहमियत समझने और प्रेम को सबसे बड़ा धर्म मानने की सीख देती है।