आज के आधुनिक जीवन में बिजली के बिना एक दिन की कल्पना करना भी मुश्किल है। पंखे, एसी, वॉशिंग मशीन से लेकर पानी की मोटर तक, लगभग हर काम बिजली पर निर्भर है। लेकिन जब हर महीने बिजली का बिल उम्मीद से कहीं ज्यादा आता है, तो उपभोक्ताओं के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि कहीं बिजली मीटर तेज तो नहीं चल रहा। कई लोग यह मान लेते हैं कि मीटर खराब है, जबकि सच्चाई जानने के लिए आप घर बैठे ही कुछ आसान तरीकों से इसकी जांच कर सकते हैं, वो भी बिना किसी इलेक्ट्रीशियन को बुलाए। आइए जानते हैं।
इसके लिए आपको अपने घर के सभी इलेक्ट्रिक डिवाइसेज बंद करने होंगे। लाइट, पंखा, एसी, फ्रिज, गीजर सब कुछ स्विच ऑफ करें और प्लग भी निकाल दें। इसके बाद मीटर पर ध्यान दें। अगर मीटर पर लगी लाल एलईडी लाइट फिर भी तेजी से ब्लिंक कर रही है, तो यह संकेत हो सकता है कि घर की वायरिंग में लीकेज है, अर्थिंग की समस्या है या फिर मीटर में ही खराबी हो सकती है।
मीटर की सही काम करने की क्षमता समझने का एक आसान तरीका लोड कैलकुलेशन भी है। मीटर पर आमतौर पर ‘imp/kWh’ लिखा होता है। इसका मतलब यह है कि जितनी बार लाल एलईडी ब्लिंक करती है, उतनी पल्स दर्ज होती हैं। उदाहरण के तौर पर अगर मीटर पर 3200 imp/kWh लिखा है, तो 3200 बार ब्लिंक होने पर एक यूनिट बिजली की खपत मानी जाती है। ब्लिंक की स्पीड देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मीटर सामान्य रूप से काम कर रहा है या नहीं।
आजकल कई घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जिनमें अलग-अलग संकेत दिखाई देते हैं। अगर मीटर पर ‘Earth’ या ‘Leakage’ जैसे साइन नजर आते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि मीटर तेज चल रहा है। आमतौर पर यह घर के अंदर वायरिंग में खराबी या बिजली लीकेज की ओर इशारा करता है, जिससे बिना आपको पता चले बिजली की खपत बढ़ती रहती है और बिल ज्यादा आता है।
अगर आपको पूरा भरोसा हो जाए कि मीटर में ही खराबी है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप अपने क्षेत्र के बिजली विभाग जैसे GEB, PGVCL, MGVCL या संबंधित इलेक्ट्रिसिटी ऑफिस में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा मीटर की जांच के लिए अप्लाई किया जा सकता है, जिसके लिए मामूली शुल्क देना पड़ता है। जांच में अगर मीटर खराब पाया जाता है, तो बिजली कंपनी उसे मुफ्त में बदल देती है और जरूरत पड़ने पर बिल में सुधार भी किया जाता है।
भारत के अलग-अलग राज्यों में बिजली की दरें अलग होती हैं, जो आमतौर पर 7 से 9 रुपये प्रति यूनिट के बीच रहती हैं। जैसे-जैसे खपत बढ़ती है, बिल भी उसी रेश्यो में बढ़ता जाता है। बिजली मीटर का काम केवल वास्तविक खपत को दर्ज करना होता है, लेकिन अगर मीटर खराब हो या घर की वायरिंग में समस्या हो, तो बिल अचानक बहुत ज्यादा आ सकता है।
नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी तरह की बिजली से जुड़ी जांच या मरम्मत से पहले एक्सपर्ट्स की सलाह लेना जरूरी है।
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