Artemis II mission के दौरान एक चीज सबसे ज्यादा चर्चा में रही, वह थी iPhone से धरती की फोटो क्लिक करना. जब NASA ने 50 साल बाद इंसानों को दोबारा डीप स्पेस में भेजा तो उनके साथ सिर्फ हाई-टेक उपकरण ही नहीं थे, बल्कि हर एस्ट्रोनॉट के पास एक स्मार्टफोन भी था. Artemis II mission के दौरान यह पहली बार हुआ है जब आधुनिक स्मार्टफोन को डीप स्पेस फ्लाइट के लिए मंजूरी दी गई.
इस मिशन में चार एस्ट्रोनॉट Orion स्पेसक्राफ्ट के जरिए चंद्रमा के आसपास यात्रा कर रहे हैं और पृथ्वी से करीब 2.5 लाख मील दूर तक पहुंच चुके हैं. इस दौरान जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें कई फोटो iPhone 17 Pro Max से ली गई बताई जा रही हैं. लेकिन, ये आईफोन ठीक वैसे ही नहीं हैं जैसा यहां पर बेचा जाता है. उसको कुछ मॉडिफिकेशन के साथ स्पेस में भेजा गया है.
NASA ने iPhone 17 Pro Max को सीधे इस्तेमाल की मंजूरी नहीं दी थी. इसके लिए डिवाइस को कई स्तरों की जांच से गुजरना पड़ा.
फोन के टाइटेनियम फ्रेम, Ceramic Shield ग्लास, कैमरा लेंस और अंदर के मटेरियल तक को टेस्ट किया गया. सबसे बड़ी चिंता यह थी कि अगर फोन टूटता है, तो उसके छोटे-छोटे टुकड़े स्पेसक्राफ्ट के अंदर तैरने लगेंगे, जो क्रू के लिए खतरनाक हो सकता है. बैटरी को भी रेडिएशन और प्रेशर बदलाव के हिसाब से जांचा गया. साथ ही यह भी देखा गया कि फोन से कोई हानिकारक गैस न निकले.
स्पेस में इस्तेमाल होने वाला iPhone एक खास “Space mode” में काम करता है. इसमें सभी वायरलेस फीचर्स बंद कर दिए जाते हैं, जैसे नेटवर्क, Wi-Fi और Bluetooth, ताकि स्पेसक्राफ्ट के सिस्टम में कोई दिक्कत न आए. फोन को हमेशा सुरक्षित तरीके से रखा जाता है. लॉन्च के दौरान इसे स्पेशल पॉकेट में रखा जाता है और स्पेसक्राफ्ट के अंदर Velcro या माउंट से फिक्स किया जाता है, ताकि यह तैरता न रहे.
यह स्मार्टफोन पारंपरिक कैमरों की जगह नहीं ले रहा है. एस्ट्रोनॉट अब भी DSLR और GoPro कैमरों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन iPhone का रोल अलग है. इसे जल्दी इस्तेमाल किया जा सकता है और बिना ज्यादा सेटअप के फोटो और वीडियो कैप्चर किए जा सकते हैं. इसी वजह से यह स्पेस में एक आसान और उपयोगी कैमरा बन गया है.
पहले कंपनियां जैसे Apple और Samsung पृथ्वी से चांद की तस्वीरें AI की मदद से बेहतर बनाकर दिखाती थीं. लेकिन अब iPhone 17 Pro Max सीधे चंद्रमा की कक्षा से फोटो ले रहा है, जहां किसी AI एन्हांसमेंट की जरूरत नहीं है. यह दिखाता है कि स्मार्टफोन तकनीक अब सिर्फ हमारी जेब तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है.
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