World Radio Day: बेहद रोचक है रेडियो का आजतक का सफर, देखें आज के डिजिटल दौर में क्या है मायने

Updated on 13-Feb-2026

13 फरवरी को पूरी दुनिया World Radio Day के रूप में मनाती है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस माध्यम को सलाम करने का दिन है जिसने पीढ़ियों को जोड़ा, युद्धकाल में भरोसा दिया, गांवों तक खबर पहुंचाई और आज डिजिटल दौर में भी अपनी जगह बनाए रखी है। रेडियो का सफर भारी-भरकम लकड़ी के बॉक्स से शुरू होकर आज स्मार्टफोन की स्क्रीन और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग तक पहुंच चुका है। आइए जानते हैं कैसी रही इसकी दिलचस्प यात्रा और आज के समय में इसके मायने।

1895: जब पहली बार हवा में भेजे गए सिग्नल

1895 में गुल्येल्मो मार्कोनी ने वायरलेस सिग्नल ट्रांसमिट कर रेडियो कम्युनिकेशन की नींव रखी। कुछ ही वर्षों में सिग्नल समुद्र पार पहुंचने लगे और दुनिया के लिए संचार का एक नया युग शुरू हुआ।

1920–1930: पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग का दौर

1920 के दशक में अमेरिका और यूरोप में नियमित पब्लिक रेडियो ब्रॉडकास्टिंग शुरू हुई। न्यूज, म्यूजिक और लाइव अनाउंसमेंट घर-घर पहुंचने लगे। दूसरे विश्व युद्ध के समय रेडियो सूचना का सबसे भरोसेमंद माध्यम भी बना।

1927–1950: भारत में रेडियो का विस्तार हुआ

भारत में 1927 में रेडियो ब्रॉडकास्टिंग शुरू हुई और बाद में इसे All India Radio (आकाशवाणी) नाम दिया गया। आजादी के आंदोलन से लेकर ग्रामीण भारत तक, रेडियो ने सूचना और एकता का सेतु बनकर अहम भूमिका निभाई है।

1950 के दशक में बड़े लकड़ी के रेडियो सेट घरों का हिस्सा बन गए, जहां परिवार एक साथ बैठकर इसके माध्यम से ही कार्यक्रम आदि सुना करते थे।

1960–1990: ट्रांजिस्टर से FM तक

ट्रांजिस्टर रेडियो ने सुनने का तरीका एकदम से बदल दिया। छोटे, सस्ते और पोर्टेबल रेडियो हर हाथ में पहुंच गए। क्रिकेट कमेंट्री और फिल्मी गाने सांस्कृतिक पहचान बन गए।

1990 के दशक में FM रेडियो ने साफ साउंड क्वालिटी और जोशीले रेडियो जॉकी के साथ युवाओं को आकर्षित किया। इसपर प्रसारित किया जाने वाला कंटेंट शहरों में रहने वाले लोगों के तो था लेकिन इसमें लोकल टच भी था, जो इसे बड़ी जल्द ही बड़े पैमाने पर लोकप्रिय बना रहा था।

2000 के बाद: मोबाइल और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग

मोबाइल फोन में FM फीचर आने से रेडियो और पर्सनल हो गया। 2010 के बाद इंटरनेट स्ट्रीमिंग और पॉडकास्ट ने ऑडियो कंटेंट को नई पहचान दी। आज रेडियो स्टेशन ऑनलाइन भी सुने जा सकते हैं और क्षेत्रीय आवाजें ग्लोबल मंच तक पहुंच रही हैं।

आज के डिजिटल दौर में रेडियो के मायने

आज जब वीडियो कंटेंट का दौर है, तब भी रेडियो की अहमियत कम नहीं हुई है। आप ड्राइव करते हुए, काम करते हुए या बिना स्क्रीन देखे भी जानकारी और मनोरंजन इसके माध्यम से ही प्राप्त करते हैं। आपदा, ग्रामीण कनेक्टिविटी और लोकल सूचना के लिए रेडियो अब भी सबसे विश्वसनीय माध्यमों में गिना जाता है। World Radio Day हमें याद दिलाता है कि टेक्नोलॉजी बदल सकती है, लेकिन आवाज़ की ताकत और भरोसे की अहमियत कभी कम नहीं होती।

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Ashwani Kumar

Ashwani Kumar has been the heart of Digit Hindi for nearly nine years, now serving as Senior Editor and leading the Vernac team with passion. He’s known for making complex tech simple and relatable, helping millions discover gadgets, reviews, and news in their own language. Ashwani’s approachable writing and commitment have turned Digit Hindi into a trusted tech haven for regional readers across India, bridging the gap between technology and everyday life.

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