दिल्ली-एनसीआर में 15,000 रुपये में बेचे जा रहे AC’s का सच..असलियत उड़ा देगी नींद

हर साल जैसे ही गर्मी का प्रकोप बढ़ने लगता है वैसे ही, सोशल मीडिया पर एक अलग ही तरह का ट्रेंड चल पड़ता है। YouTube Shorts हों, Instagram Reels हों या WhatsApp पर फॉरवर्ड होने वाले छोटे मोटे वीडियो आदि। एक ही खबर बड़ी तेजी से वायरल होनी शुरू हो जाती है, ऐसे में, यही एक ट्रेंड सा बन जाता है। ऐसा ही, एक ट्रेंड इस समय सोशल मीडिया पर जोर पकड़ रहा है। असल में, कुछ शॉर्ट्स, रील और वीडियो सोशल मीडिया पर इस समय सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। जिसमें देखा जा सकता है कि, दिल्ली और NCR में बेहद ही सस्ते में Split, Windows और अन्य AC बेचे जा रहे हैं। मैंने तो यहाँ तक देखा कि मात्र 15 हजार से 20 हजार रुपये के बीच में आपको कुछ AC खरीदने के लिए मिल जाने वाले हैं। इस समय बहुत से वीडियो मुंडका स्थित ‘ब्रांड बाजार’ से सामने आ रहे हैं और इसके अलावा गुरुग्राम के भी एक बड़े वेयर हाउस से इस तरह के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।

वीडियो सीधे तौर पर यह कह रहे हैं कि यहाँ आपको AC कौड़ियों के दाम में मिलने वाले हैं? अब जाहिर है कि इन या इस तरह के वीडियोज़ को लाखों लोग देखते हैं, शेयर करते हैं और सबसे ज़रूरी यह देखने को मिला है कि इस तरह के वीडियो आदि पर बड़ी ही जल्दी भरोसा भी कर लेते हैं। हालांकि, सवाल यहाँ यह उठता है कि क्या वाकई ये सच है। क्या जो कीमत इन वीडियो आदि में बताई जा रही है, उस कीमत में यह AC मिल भी रहे हैं? इसकी असलियत क्या है? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए हमने 2 घंटे से ज़्यादा का सफर करके मुंडका का रुख किया। यहाँ इस गोदाम में पहुँचने पर जो देखने और सुनने को मिला, वह इन सभी वीडियोज आदि की असलियत को दिखाने और समझाने के लिए काफी है। आइए Delhi-NCR में कौड़ियों के भाव AC मिलने वाले वीडियोज की सच्चाई को बारीकी से समझते हैं।

वायरल वीडियोज़ आखिर क्या कहते हैं?

पिछले 20 दिन से लेकर एक महीने के बीच ऐसा देखा गया है कि बहुत से अलग अलग तरह के वीडियो, बहुत से अलग अलग इन्फ्लुएंसर्स की ओर से अपलोड किए गए हैं, जो इस समय वायरल हैं और इनका मानो जैसे ट्रेंड सा चला हुआ है। इन वीडियो की अगर जांच की जाए तो इन सभी का एक पहले से ही तय फॉर्मूला होता है, इसे आप स्क्रिप्टिड भी कह सकते हैं। सभी वीडियो की शुरुआत अचनाक ही एक इन्फ्लुएंसर से होती ह, जो एक किसी बड़े गोदाम या वेयरहाउस में जाता है। इसके बाद कैमरा बड़े-बड़े AC के बक्सों और दीवार पर लटके AC दिखाता है, इसमें देश के बड़े और जाने माने नाम शामिल हैं, जैसे Voltas, LG, Samsung, Daikin, Panasonic आदि आदि। इसके बाद मानो असली खेल शुरू होता है, जो है कीमत का। इन सभी अलग अलग वीडियो में कीमत उतनी बताई जाती है कि कोई भी इन्हें देख-सुनकर चौंक जाए और खरीदने के लिए निकाल पड़े, या इसे उसी समय फोन पर अपने कारीबियों के साथ चर्चा का नया विषय बना ले। वीडियो में बताया जाता है कि, 1.5 टन का AC सिर्फ 19,990 रुपये में! अब बताइए इसे सुनकर कौन इस AC को खरीदने या इसके बारे में और जानने का इच्छुक कैसे नहीं होगा? अंत में, यह इन्फ्लुएंसर कहता है कि जल्दी करें और विज़िट करें, क्योंकि स्टॉक लिमिटेड हैं, ये मौका हाथ से निकल न जाए।

जाहिर तौर पर इस तरह की कीमत को देखकर कोई भी इस भ्रामक और आकर्षक विज्ञापन पर यकीन कर लेगा। असल में, गर्मी निरंतर बढ़ती जा रही है, ऐसे में सभी को AC चाहिए, अब अगर यह कौड़ियों के दाम मिल रहा हो तो इसे कौन खरीदना नहीं चाहेगा?

वीडियो देखकर जब हम खुद पहुँचे मुंडका तो क्या हुआ?

जब मैंने सोचा कि क्यूँ न इन वीडियो आदि की जांच के अलावा खुद चलकर यह देखा जाए कि आखिर माजरा क्या है, तो मैं दिल्ली के मुंडका इलाके के उस गोदाम में खुद जा पहुंचा। यहाँ पहुंचने के बाद सबसे पहले मैंने AC सेक्शन का रुख किया। यहाँ मौजूद सेल्समैन से जब मैंने पूछा कि भैया, AC किस रेट में सेल कर रहे हैं? तो उसका जवाब आया कि, ‘सर, सब पर लिखा है, आप देख सकते हैं।’ इस व्यक्ति ने मुझे सामने से आकार कोई कीमत नहीं बताई और उसकी बोलचाल में मुझे कोई उत्साह भी नजर नहीं आया, जैसे मैंने सेल्समैन को वीडियो आदि में देखा था। जब मैंने कीमतें देखीं तो हकीकत सामने आ गई। एक भी AC उस कीमत पर यहाँ नहीं मिल रहा था, जिनका ये वीडियो दावा करते हैं। मैंने सेल्स मैं के हाथों से लिखा प्राइस वाला पेपर नीचे लगा दिया है, आप उसे देख सकते हैं। इसमें कीमत वही है जो किसी भी अन्य स्टोर पर आपको मिल जाने वाली है। इसी प्राइस में ऑनलाइन भी यह एसी खरीदे जा सकते हैं।

अब सवाल उठता है कि ऐसा क्यों? वीडियो के प्राइस और सामने से दिख रहे प्राइस इतने अलग अलग कैसे हैं। प्राइस में इस तरह के अंतर से मेरे मन में कई अन्य सवाल और खड़े हुए कि, इसमें इन इन्फ्लुएंसर्स का क्या रोल है, क्या यह वीडियो पैड प्रोमोशन तो नहीं? इनका जवाब खोजने के लिए मैंने एक कहानी बनाई। आगे आपको इस बारे में फुल डिटेल्स मिलने वाली हैं।

कहानी बनाने से सामने आई हकीकत!

जब इतने सवाल मेरे मन में उठ रहे तो मैंने एक कहानी का सहारा लिया और सच निकालने का प्रयास किया। मैंने एक अन्य सेल्स मैन जिसका नाम ‘Mukesh’ था, मेरे खयाल में यह स्टोर मैनेजर भी था। मैंने इससे 20 AC खरीदने की बात कह दी, और यह भी कि मुझे यह सभी थोक रेट में चाहिए। इसी दौरान गोदाम के कर्ताधर्ता भी एक बार मेरे सामने आए, लेकिन ज्यादा सवाल का जवाब देने के बजाय वो वहाँ से खिसक लिए। चर्चा आगे बढ़ रही थी, इसी दौरान मुकेश ने अपनी डायरी निकाली और मेरी जरूरत को उसने उसमें लिख लिया, आप ऊपर पन्ने में उन सभी एसी की डिटेल्स देख सकते हैं। लगभग 10 मिनट के समय के बाद वह उन सभी में प्राइस लिखकर ले आया। ये प्राइस भी किसी भी तरह से वीडियो के प्राइस से मेल नहीं खाते। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह वीडियो सिर्फ “छलावा और दिखावा” हैं!

आखिरकार बाहर आया सच

मैंने इन प्राइस को देखकर कहा कि भैया मुझे तो बताया गया कि आपके यहाँ 15 हजार से 20 हजार रुपये के बीच AC सेल किए जा रहे हैं, लेकिन यहाँ तो आप प्राइस कुछ और ही बता रहे हैं, ऐसा कैसे? कुछ देर की चुप्पी के बाद जवाब आया जो इस पूरी कहानी की जड़ है।

सर, ‘वो वीडियो हम अपने प्रचार के लिए और लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बनवाते हैं।’ इसके बाद उसने कहा कि, ‘इन वीडियो में जो भी प्राइस बताए गए हैं, वो हमारे प्रोमोशन का तरीका है, भी प्राइस आपने वीडियो आदि में देखे हैं वह सभी Under Exchange offer वाली कीमत हैं। इसमें हम, Motorola का 1 टन AC और एक Window AC जो एक टन का ही है, बेहद सस्ते में दे रहे थे। हालांकि, किसी भी वीडियो में मैंने इस तरह के किसी दावे को नहीं सुना, केवल इतना सुना कि आपको इन जगहों से सस्ते AC कहीं नहीं मिलने वाले हैं। अब यहाँ सवाल यह भी उठता है कि आखिर इतने भ्रामक विज्ञान क्यों, जब उनमें कोई असलियत नहीं है। और अगर है तो यह क्यों नहीं कहा जा रहा है कि ये ऑफर किन एसी और कितने एसी पर मिलेगा? इसके अलावा एक अन्य सवाल जो है कि क्या इन वीडियो को पैसे देकर बनवाया गया है। अगर ये सच है तो क्या इन्फ्लुएंसर्स की कोई जिम्मेदारी नहीं है, क्या यह भी पैसे का ही खेल है?

क्या होनी चाहिए इन्फ्लुएंसर की ज़िम्मेदारी?

यह सवाल बेहद ज़रूरी है और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। जो इन्फ्लुएंसर या कंटेंट क्रिएटर इस तरह के वीडियो बना रहे हैं, क्या वह जांच करते हैं कि जो वह दिखाने जा रहे हैं, उसमें कितनी सच्चाई है? क्या वह वीडियो बनाने से पहले यह पूछते हैं कि ये ऑफर कितने समय के लिए, कितने एसी पर और कैसे मिलने वाला है? या बस पैसे मिले, वीडियो बन गई और अपलोड हो गई?

लाखों फॉलोअर्स होने का मतलब यह नहीं कि ज़िम्मेदारी लाखों गुना कम हो जाए। इसके उलट जितना बड़ा प्लेटफॉर्म, उतनी बड़ी ज़िम्मेदारी होना जरूरी है। एक भ्रामक वीडियो की वजह से कितने लोग घंटों का सफर करके उस जगह पहुँचते हैं, निराश होकर लौटते हैं और अपना पैसा और समय बर्बाद करते हैं, इसका जवाब और हिसाब कौन देगा?

इन भ्रामक वीडियोज की रोकथाम के लिए क्या कोई कानून है?

इस सवाल का जवाब ‘हाँ’ है। हाँ, भारत में भ्रामक विज्ञापनों और misleading content के खिलाफ कानून मौजूद हैं। इन सभी के बारे में ग्राहकों को जानकारी होना बेहद जरूरी है।

  • Consumer Protection Act 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन देना एक दंडनीय अपराध है। इस कानून में ‘misleading advertisement’ को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार वो कोई भी विज्ञापन जो झूठे दावे करे, ज़रूरी जानकारी छुपाए या उपभोक्ता को गुमराह करे, इसमें शामिल है।
  • ASCI यानी Advertising Standards Council of India के दिशानिर्देशों के अनुसार किसी भी प्रोमोशनल कॉन्टेन्ट में सभी शर्तें और नियम स्पष्ट रूप से बताए जाने चाहिए। Exchange Offer की कीमत को बिना Exchange का उल्लेख किए असली कीमत बताना इन नियमों का सीधा उल्लंघन है।
  • Central Consumer Protection Authority यानी CCPA के पास यह अधिकार है कि वो इस तरह के भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई करे और ज़ुर्माना लगाए। इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के लिए भी CCPA ने 2023 में गाइडलाइन्स जारी की हैं जिनके अनुसार Sponsored Content को साफ-साफ Paid Promotion बताना अनिवार्य है।

इतने कानून होने के बावजूद इस तरह के वीडियोज़ धड़ल्ले से बन रहे हैं, जो एक गंभीर सवाल उठा रहा है।

किसी भी वीडियो पर विश्वास करने से पहले?

इस पूरे अनुभव के बाद कुछ बातें हैं जो हर उस इंसान को जाननी चाहिए जो सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियोज़ देखता और देखकर उनपर यकीन पर लेता है।

  • कोई भी ब्रांडेड 1.5 टन AC 15,000-20,000 रुपये में बिना किसी शर्त के नहीं मिल सकता है। अगर कोई ऐसा दावा कर रहा हैं तो उसकी जांच जरूरी है।
  • Exchange Offer, Cashback और Bank Discount आदि को मिलाकर असल कीमत बनती है, लेकिन इस तरह के वीडियोज में केवल और केवल एक प्राइस को बता दिया जा रहा है। इसपर यकीन करना आपकी भूल हो सकती है।
  • किसी भी डील पर जाने से पहले Flipkart, Amazon या ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट पर उस प्रोडक्ट की कीमत को जरूर देख लें। आधिकारिक ऑनलाइन स्टोर इसमें आपकी सबसे ज्यादा मदद कर सकता है, क्योंकि यह प्राइस कंपनी का खुद का प्राइस है।
  • अगर किसी इन्फ्लुएंसर का वीडियो देख रहे हैं और वो किसी जगह या प्रोडक्ट की तारीफ कर रहा है, तो description में ‘Paid Promotion’ या ‘Sponsored’ लिखा है या नहीं, इसकी जांच जरूर कर लें। अगर नहीं लिखा है और वीडियो प्रोमोशनल है तो यह नियमों का उल्लंघन है।
  • ऐसे किसी भी भ्रामक वीडियो या विज्ञापन की शिकायत National Consumer Helpline पर 1800-11-4000/1915 पर या consumerhelpline.gov.in पर की जा सकती है।

अंत में, इस पूरी घटना का सबसे जरूरी और मुख्य सबक यह है कि AC कोई स्मार्टफोन नहीं है जिसे साल दो साल में बदल दिया जाए। यह एक बड़ा निवेश है और हर साल नया AC खरीदना न हर किसी के बस की बात है और न ही यह कोई समझदारी भरा निर्णय होने वाला है। ऐसे में अगर कुछ हज़ार रुपये बचाने के चक्कर में आप किसी भ्रामक वीडियो के झाँसे में आकर किसी अनजान गोदाम से AC खरीद लेते हैं, उसके बाद आपको पता चलता है कि जो आप खरीदकर लाएं हैं वह रिफर्बिश्ड, असेम्बल किया हुआ है या इसपर ब्रांड की वारंटी आदि लागू ही नहीं होती तो यहाँ नुकसान केवल आपके पैसों का नहीं होता, आपको मानसिक तौर पर एक बड़ा झटका भी लगता है। एक सवाल जो इस तरह के गोदाम वालों से पूछा जाना चाहिए वो यह है कि क्या यहाँ से खरीदे गए AC पर ब्रांड की आधिकारिक वारंटी मिलती है? क्या Voltas, LG या Samsung का सर्विस सेंटर इनके द्वारा सेल किए गए प्रोडक्ट को मान्यता देता है? अगर किसी भी कारण से वीडियो आदि को देखकर आप जो एसी खरीदकर लाएं वो खराब हो जाए तो जिम्मेदारी किसकी होने वाली है?

अगर इन सभी सवालों के जवाब प्राप्त किए बिना आप किसी भी भ्रामक वीडियो को सच मानकर फैसला लेते हैं तो यह मेरी राय में सही नहीं है। मुझे लगता है कि जो गोरखधंधा सोशल मीडिया पर इस वक्त चल रहा है उस पर CCPA और Consumer Affairs Ministry को सिर्फ गाइडलाइन्स जारी करने से आगे बढ़कर असली कार्रवाई करनी चाहिए। अगर इनके मन में डर नहीं है तो आगे से किसी भी भ्रामक विज्ञापन को चलाने से पहले इनके मन में डर आना चाहिए। Voltas, LG, Samsung और Daikin जैसे बड़े ब्रांड्स को भी यह देखना चाहिए कि उनके नाम की आड़ में बाज़ार में आखिर क्या खेल चल रहा है क्योंकि यह उनकी अपनी साख का भी उतना ही बड़ा सवाल है।

ग्राहकों से मैं इतना ही कहना चाहूँगा कि आपका किसी वायरल वीडियो को देखकर उत्साहित होना स्वाभाविक है लेकिन आपको फैसला लेने से पहले एक बार जरूर सोचना कहिए। खरीदारी के लिए आपको केवल और केवल अधिकृत डीलर्स के पास ही जाना चाहिए, पक्का बिल लेना चाहिए, वारंटी कार्ड की मांग करनी चाहिए, इसके अलावा ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट पर एक बार प्राइस जरूर देख लेना चाहिए। याद रखें कि कुछ हज़ार रुपये की बचत के लिए झोली भर के परेशानी मोल ले लेना कोई फायदा का सौदा नहीं है। इसलिए इस गर्मी से बचने के लिए और अपने घर को को ठंडा करने के लिए किसी वीडियो का सहारा लेने की बजाए अपने विवेक से काम लेना ज्यादा फायदेमंद होने वाला है।

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Ashwani Kumar

Ashwani Kumar has been the heart of Digit Hindi for nearly nine years, now serving as Senior Editor and leading the Vernac team with passion. He’s known for making complex tech simple and relatable, helping millions discover gadgets, reviews, and news in their own language. Ashwani’s approachable writing and commitment have turned Digit Hindi into a trusted tech haven for regional readers across India, bridging the gap between technology and everyday life.

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