फोन कुछ यूजर्स को केवल इसलिए चाहिए होता है कि उन्हें उससे कॉल करना होता है और कुछ मामलों में लोग SMS से ही अपना काम चला लेते हैं, ऐसे में उन्हें Data की जरूरत नहीं होती है। अब जब जिस चीज की जरूरत ही नहीं है, उसके लिए यानि डेटा के लिए पैसे क्यों दिए जाएं। इस मुद्दे को लेकर इस समय इंटरनेट गरमाया हुआ है। असल में, पहले भी इस तरह के मुद्दे उठे, लेकिन फिर वह ठंडे बस्ते में चले गए थे, लेकिन एक बार फिर से इसकी शुरुआत हुई है। असल में, TRAI ने इसी समस्या को सुलझाने के लिए एक प्रोपॉजल सामने रखा है, लेकिन Jio, Airtel और Vi तीनों बड़ी Telecom कंपनियों ने इस चीज का विरोध कर दिया है। आइए जानते हैं कि आखिर TRAI की ओर से क्या कहा गया है और इसके बाद टेलीकॉम कंपनियां इसके विरोध पर क्यों उतर आई हैं।
TRAI ने 15 जून को एक Open House Consultation में Draft Telecom Consumer Protection Thirteenth Amendment Regulation, 2026 पर चर्चा की। इस Proposal के तहत TRAI चाहता है कि Telecom Companies सिर्फ Voice और SMS वाले Plans उन सभी Validity Periods में Offer करें जो अभी Data वाले Bundled Plans में उपलब्ध हैं। इसका मतलब है कि डेटा के साथ आने वाले एक नॉर्मल प्लान के जैसे ही सभी कॉल और SMS वाले प्लांस को भी अलग अलग वैलिडीटी में पेश किया जाना चाहिए, इसे सीमित रिचार्ज तक ही रखना सही नहीं है। इसके अलावा TRAI यह भी चाहता है कि यह Plans Bundled Plans से सस्ते हों और इन्हें Customer Touchpoints पर ज्यादा साफ तरीके से दिखाया जाए, यानी छिपाकर न रखा जाए।
तीनों बड़ी टेलीकॉम कंपनियों की ओर से इस प्रोपॉजल का विरोध किया गया, और साफ तौर पर ऐसा कहा गया है कि Tariff डिजाइन में Regulator को दखल नहीं देना चाहिए, यह काम पूरी तरह मार्केट पर छोड़ देना चाहिए। Reliance Jio ने कहा कि आजकल के 4G और 5G Networks एक ही Internet Protocol Architecture पर चलते हैं, यानी Voice और Data को अलग करना Technical तौर पर मुश्किल है।
इसके अलावा Jio ने यह चिंता भी जताई कि सस्ते और कम Validity वाले Voice Plans का इस्तेमाल Spam Calls और धोखाधड़ी के लिए हो सकता है। Jio का यह भी दावा है कि उनके 88 प्रतिशत Entry-Level Subscribers Mobile Data इस्तेमाल करते हैं, यानी सिर्फ Voice Plan की माँग बहुत कम है।
Vodafone Idea ने कहा कि Smartphone चलाने पर भी थोड़ा-थोड़ा Data तो खुद-ब-खुद खर्च होता रहता है, बैकग्राउन्ड प्रोसेस, सॉफ्टवेयर अपडेट और Authentication Services के लिए इसका इस्तेमाल होता राहत है। अगर Plan में कोई Data Allowance ही नहीं है तो Users को अतिरिक्त चार्ज लग सकता है।
Bharti Airtel का कहना है कि आज के दौर में Internet Access बहुत सी Digital Services तक पहुँचने का मुख्य जरिया बन गया है, और अगर ज्यादा लोग Voice-Only Plans की तरफ चले गए तो इससे Digital India की कोशिशों पर असर पड़ सकता है।
TRAI ने कहा है कि वह Telecom Operators, Consumer Groups और बाकी Stakeholders से मिले सभी Suggestions को Review करेगा और इसके बाद ही यह निर्णय करेगा कि इस Proposal को आगे बढ़ाना है या नहीं। यह मामला उन करोड़ों यूजर्स के लिए बड़ा है जो सिर्फ बात करने के लिए Phone रखते हैं लेकिन फिर भी हर महीने डेटा के भी पैसे चौकाने पड़ते हैं। अब देखना यह है कि TRAI Telecom Companies की दलीलों को किस तरह से लेता है। या फिर आने वाले समय में हमें ट्राई का यह प्रस्ताव हकीकत बनता नजर आने वाला है।
आर्टिकल में AI से निर्मित इमेज शामिल हैं।
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