जब आपके फोन की स्क्रीन पर कोई ऐसा नंबर चमकता है जिसके साथ कोई नाम नहीं लिखा होता, तो क्या आप भी कॉल उठाने से हिचकिचाते हैं? स्पैम और स्कैम कॉल्स के इस दौर में अनजान नंबर का जवाब देना किसी जुए से कम नहीं है. अब तक हम ट्रूकॉलर (Truecaller) जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स पर भरोसा करते आए हैं, लेकिन कई बार वहां भी दिखने वाले नाम भरोसेमंद नहीं होते हैं.
हालांकि, यह अनिश्चितता अब जल्द ही खत्म होने वाली है. भारत सरकार देश का पहला आधिकारिक ‘कॉलर आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ (Caller Identification System) लागू करने की तैयारी कर रही है, जो बाहरी ऐप्स से बिल्कुल स्वतंत्र होगा और सीधे टेलीकॉम नेटवर्क में इनबिल्ट होगा. इसे CNAP (Calling Name Presentation) के नाम से जाना जाएगा और उम्मीद है कि अगले 2-3 महीनों में यह सेवा शुरू हो जाएगी.
दूरसंचार विभाग (DoT) की सिफारिश के बाद अक्टूबर 2025 में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. CNAP यानी ‘कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन’ के तहत, जब भी आपके पास कोई कॉल आएगी, तो फोन नंबर के साथ-साथ कॉलर का वेरीफाइड नाम (Verified Name) भी दिखाई देगा.
यह वही नाम होगा जो सिम कार्ड खरीदते समय टेलीकॉम ऑपरेटर के रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था. मौजूदा कॉलर आईडी ऐप्स ‘क्राउड-सोर्स डेटा’ (लोगों द्वारा सेव किए गए नामों) पर निर्भर करते हैं, जिससे कई बार गलत जानकारी मिलती है. लेकिन CNAP सिस्टम सीधे ऑपरेटरों के आधिकारिक ग्राहक डेटाबेस से जानकारी उठाएगा. नियामकों का कहना है कि इससे प्रदर्शित होने वाले नाम कहीं अधिक सटीक और भरोसेमंद होंगे.
इस सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि यह केवल महंगे स्मार्टफोन्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साधारण फीचर फोन्स (कीपैड वाले फोन) पर भी काम करेगा. अब तक मोबाइल नेटवर्क को केवल कॉलर का नंबर दिखाने की आवश्यकता होती थी, नाम दिखाने का कोई अनिवार्य तंत्र नहीं था.
CNAP इसी कमी को पूरा करने का लक्ष्य रखता है. एक बार लागू होने के बाद, यह फीचर यूजर्स को कोई भी अतिरिक्त सॉफ्टवेयर या ऐप डाउनलोड किए बिना सभी डिवाइस पर अपने आप काम करेगा. TRAI ने स्पष्ट किया है कि यह सेवा देश भर के सभी ग्राहकों के लिए ‘डिफॉल्ट’ (Default) रूप से सक्षम होगी.
गोपनीयता (Privacy) को लेकर चिंतित यूजर्स के लिए भी सरकार ने प्रावधान रखा है. जो यूजर्स इस सुविधा का उपयोग नहीं करना चाहते या अपना नाम प्रदर्शित नहीं करना चाहते, उनके पास अपने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर से संपर्क करके ‘ऑप्ट-आउट’ (Opt-out) करने का विकल्प होगा.
यह प्रावधान सार्वजनिक सुविधा और व्यक्तिगत गोपनीयता के बीच संतुलन बनाने के लिए किया गया है. नियामकों का मानना है कि यह प्रणाली स्पैम और धोखाधड़ी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. TRAI ने कहा है, “यह कॉल प्राप्त करने वाले व्यक्ति को यह निर्णय लेने में मदद करेगा कि कॉल का उत्तर देना है या नहीं,” जिससे डिजिटल संचार में विश्वास बढ़ेगा.
तकनीकी दृष्टिकोण से, टेलीकॉम ऑपरेटरों को अपने स्वयं के CNAM (Calling Name) डेटाबेस बनाए रखने की आवश्यकता होगी, जो हर मोबाइल नंबर को एक सत्यापित ग्राहक नाम से लिंक करेगा. कॉल किए जाने पर, नेटवर्क इस जानकारी को रीयल-टाइम में प्राप्त करेगा और रिसीवर की स्क्रीन पर दिखाएगा.
सिस्टम के ट्रायल्स ने कुछ चुनौतियों को उजागर किया है, जिसमें सॉफ्टवेयर अपडेट और नेटवर्क अपग्रेड की आवश्यकता शामिल है. फिलहाल, परीक्षण पैकेट-स्विच्ड नेटवर्क (जैसे मोबाइल डेटा और VoIP) तक सीमित हैं, जबकि पारंपरिक सर्किट-स्विच्ड वॉयस नेटवर्क को तैयार किया जा रहा है. उद्योग एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कदम भारत में डिजिटल विश्वास को काफी मजबूत करेगा, खासकर ऐसे समय में जब फर्जी कॉल बढ़ रहे हैं. इसका सबसे ज्यादा फायदा वरिष्ठ नागरिकों और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले यूजर्स को मिलेगा.
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