अब कानूनी मामलों में भी दिखेगा AI.. ‘Astra for Law’ लॉन्च, रिसर्च और ड्राफ्टिंग करेगा मिनटों में

HIGHLIGHTS

OpenAI की ओर से Astra for Law पेश कर दिया गया है।

अब AI की मदद से वकीलों का काम भी बड़ी आसानी से हो जाएगा।

इस नए मॉडल से रिसर्च और ड्राफ्टिंग बेहद आसान हो जाने वाली है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में टॉप कंपनी OpenAI की ओर से अब वकालत और लीगल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ी चाल चल दी गई है। कंपनी ने कानूनी जटिलताओं, केस स्टडीज और कोर्ट के पुराने फैसलों को चुटकियों में सुलझाने के इरादे से अपने सबसे एडवांस्ड GPT-6 Astra मॉडल पर आधारित एक नए लीगल-फोकस्ड प्लेटफॉर्म ‘Astra for Law’ को लॉन्च किया है। इसे खासतौर पर लॉ फर्म्स, कानूनी सलाहकारों और लीगल-टेक कंपनियों के डेली के कानूनी रिसर्च, ओपिनियन ड्राफ्टिंग और केस एनालिसिस को बेहद ही आसानी से निपटाने की नियत से बनाया गया है। आइए जानते हैं कि आखिर यह कैसे वकालत में और वकीलों की मदद करने वाला है।

कोई मामूली वेब सर्च पर निर्भर नहीं है नया मॉडल

जानकारी के अनुसार, OpenAI का यह नया टूल केवल नॉर्मल वेब सर्च आदि पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह उससे कहीं ज्यादा अड्वान्स और अलग है। यह एक कानूनी सर्च इंडेक्स है जिसमें अमेरिकी केस लॉ, नियम, क़ानून और अदालती आदेशों के 23 करोड़ (230 मिलियन) से ज्यादा ऑफिसियल URL जोड़े गए हैं। इसके लिए कंपनी ने ‘Free Law Project’ के साथ साझेदारी भी की गई है और ‘CourtListener’ रिपॉजिटरी को इसमें इंटीग्रेट कर दिया गया है, आंकड़ों को देखा जाए तो इसमें अमेरिका के 99.9% से अधिक कानूनी प्रीसिडेंट्स को कवर किया गया गया है।

नॉर्मल AI सर्च से कितना अलग है Astra for Law?

Vals AI के ‘लीगल रिसर्च बेंच’ की ओर से 200 अमेरिकी कानूनी रिसर्च सवालों पर की गई बेंचमार्क टेस्टिंग में इस नए प्लेटफॉर्म ने नॉर्मल एआई सर्च को काफी पीछे छोड़ दिया है, आइए जानते हैं कि इस नए मॉडल ने किन कारनामे को अंजाम दिया है।

हाईएस्ट रीजनिंग सेटिंग पर Astra for Law ने 54.0% सटीकता प्राप्त की है, जबकि केवल वेब सर्च पर निर्भर GPT-6 Astra मॉडल महज 38.7% ही सही उत्तर दे पाया। केस-लॉ से जुड़े सवालों में इसने बेसलाइन से 24% ज्यादा रेफ्रन्स केस सर्च करके निकाल दिए, आदि आदि।

बड़ी लॉ फर्म्स और टूल्स के साथ टाइ-अप

ओपनएआई इस प्लेटफॉर्म को एक पूरे लीगल इकोसिस्टम की नींव के रूप में स्थापित कर रहा है। Harvey और Legora जैसी लीगल टेक कंपनियां सीधे इसके ऊपर अपने प्रोडक्ट्स डेवलप करने वाली हैं? इसके अलावा, वकीलों के काम को रफ्तार देने के लिए Relativity, Clio, Intapp और Thomson Reuters जैसे कानूनी सॉफ्टवेयर टूल्स को ChatGPT से जोड़ने के लिए 26 नए इकोसिस्टम प्लगइन्स भी लाए गए हैं। साथ ही लीगल ड्राफ्टिंग और प्रूफरीडिंग के लिए ‘ChatGPT for Word’ को भी ऑफिसियल कर दिया गया है।

कौन कौन सी लॉ फर्म्स के साथ मिलकर निर्मित हुआ है नया मॉडल

इस प्लेटफॉर्म के डेवलपमेंट में दुनिया की दिग्गज लॉ फर्म्स जैसे Sullivan & Cromwell, Ropes & Gray, Cooley, Latham & Watkins और Wachtell Lipton ने टेस्टिंग पार्टनर के रूप में भाग लिया है। क्लाइंट की अत्यधिक गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए इसके आने वाले API वर्जन (gpt-6-astra-law) और ChatGPT Enterprise में ‘Zero Data Retention’ और नो-ह्यूमन-रिव्यू जैसे सख्त प्राइवेसी फीचर्स जोड़े गए हैं।

क्या कोर्ट-कचहरी में AI का घुसना सही है?

हालांकि, कोर्ट-कचहरी में एआई के इस्तेमाल को लेकर चिंताएं भी कम नहीं हैं। अमेरिकी चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने चेतावनी दी थी कि एआई का अनियंत्रित इस्तेमाल न्यायिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। हाल ही में वेनिस फिल्म फेस्टिवल में हॉलीवुड अभिनेता जॉर्ज क्लूनी ने भी खुलासा किया था कि उनकी मानवाधिकार वकील पत्नी अमाल क्लूनी को कई बार ऐसे मामलों का सामना करना पड़ा है जहां वकीलों ने एआई द्वारा गढ़े गए फर्जी नियमों और नकली अदालती फैसलों (Hallucinations) को सच मानकर कोर्ट में पेश कर दिया।

हालांकि OpenAI ने सीधे वेरिफाइड लीगल डेटाबेस को जोड़कर इस फर्जीवाड़े को रोकने की कोशिश की है, लेकिन कंपनी के अपने टेस्ट बताते हैं कि जटिल परिस्थितियों में यह अभी भी करीब आधे सवालों के जवाब गलत दे सकता है। यानी वकीलों के लिए इंसानी दिमाग और खुद की जांच का कोई ऑप्शन नहीं है।

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Ashwani Kumar

Ashwani Kumar has been the heart of Digit Hindi for nearly nine years, now serving as Senior Editor and leading the Vernac team with passion. He’s known for making complex tech simple and relatable, helping millions discover gadgets, reviews, and news in their own language. Ashwani’s approachable writing and commitment have turned Digit Hindi into a trusted tech haven for regional readers across India, bridging the gap between technology and everyday life.

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