जैसे-जैसे हीटवेव बढ़ रही है, वैसे-वैसे घरों में AC का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ गया है. लेकिन अगर आपके कमरे में अब भी पुराना fixed speed AC चल रहा है, तो वह सिर्फ कमरा ठंडा नहीं कर रहा, बल्कि चुपचाप आपका बिजली बिल भी बढ़ा रहा है.
पुराने non-inverter AC हमेशा 100 प्रतिशत क्षमता पर चलते हैं. जब कमरे का तापमान तय स्तर तक पहुंच जाता है तो AC पूरी तरह बंद हो जाता है. इसके बाद जैसे ही तापमान दोबारा बढ़ता है, कंप्रेसर फिर से पूरी ताकत के साथ चालू हो जाता है. यही बार-बार चालू और बंद होने वाली प्रक्रिया सबसे ज्यादा बिजली खर्च करती है और हर महीने भारी बिजली बिल की वजह बनती है.
इसके मुकाबले inverter AC में वैरिएबल स्पीड कंप्रेसर दिया जाता है. यह लगातार चलता रहता है और कमरे के तापमान के हिसाब से अपनी स्पीड कम या ज्यादा करता रहता है. क्योंकि इसे हर समय 100 प्रतिशत क्षमता पर काम नहीं करना पड़ता, इसलिए इसकी बिजली खपत काफी कम हो जाती है.
आजकल कई आधुनिक inverter AC कमरे का तापमान, गर्मी का स्तर और कमरे में मौजूद लोगों की संख्या तक समझकर कूलिंग अपने हिसाब से एडजस्ट करते हैं. इसी वजह से inverter AC सामान्य non-inverter AC की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक बिजली बचा सकता है.
अगर भारत में कोई व्यक्ति रोजाना लगभग 10 घंटे AC चलाता है, तो inverter AC और non-inverter AC के बिजली खर्च में बड़ा अंतर देखने को मिलता है.
एक सामान्य 1.5 टन non-inverter AC हर घंटे लगभग 1.7 किलोवॉट बिजली खर्च करता है. वहीं 1.5 टन inverter AC औसतन लगभग 1.15 किलोवॉट बिजली खर्च करता है. अगर दोनों AC रोज 10 घंटे चलें, तो non-inverter AC करीब 17 यूनिट बिजली रोज खर्च करेगा. वहीं inverter AC लगभग 11.5 यूनिट बिजली इस्तेमाल करेगा.
अगर प्रति यूनिट बिजली की कीमत 9 रुपये मानी जाए, तो 30 दिनों में non-inverter AC लगभग 510 यूनिट बिजली खर्च करेगा और इसका मासिक बिल करीब 4,590 रुपये तक पहुंच सकता है. वहीं inverter AC लगभग 345 यूनिट बिजली खर्च करेगा और बिल करीब 3,105 रुपये तक रहेगा.
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यानी हर महीने लगभग 1,500 रुपये तक की बचत संभव है. हालांकि यह आंकड़े इस्तेमाल, बिजली दर और AC की स्टार रेटिंग के हिसाब से बदल सकते हैं, लेकिन दोनों के बीच का फर्क हमेशा बना रहता है.
Inverter AC में वैरिएबल स्पीड कंप्रेसर होता है जबकि non-inverter AC fixed speed कंप्रेसर पर चलता है. Inverter AC कमरे को जल्दी ठंडा करता है और तापमान लगभग स्थिर बनाए रखता है. तापमान में बहुत कम उतार-चढ़ाव महसूस होता है.
वहीं non-inverter AC में कंप्रेसर बार-बार बंद और चालू होता रहता है, जिसकी वजह से तापमान में ज्यादा बदलाव महसूस होता है. आवाज की बात करें तो inverter AC ज्यादा शांत चलता है क्योंकि इसका कंप्रेसर लगातार स्मूद तरीके से काम करता है. वहीं non-inverter AC में start-stop की आवाज ज्यादा सुनाई देती है.
Inverter AC की शुरुआती कीमत जरूर ज्यादा होती है, लेकिन लंबे समय में यह बिजली बिल में बड़ी बचत कर देता है. विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में inverter AC की अतिरिक्त कीमत 12 से 18 महीनों के भीतर बिजली बचत से निकल आती है.