CERT-In को मिला Claude Mythos AI! क्या अब सरकारी वेबसाइटों पर नहीं होंगे साइबर अटैक? समझें पूरा गुणा-गणित

CERT-In को मिला Claude Mythos AI! क्या अब सरकारी वेबसाइटों पर नहीं होंगे साइबर अटैक? समझें पूरा गुणा-गणित

हमारा देश जैसे जैसे तकनीकी मामलों में उन्नत हो रहा है, वैसे वैसे साइबर अपराध भी बढ़ रहे हैं। हमने पिछले सालों में यह देखा है कि साइबर अपराध के मामले बड़े पैमाने पर बढ़े हैं। इसी कारण हमेशा से ही एक सवाल इंटरनेट पर उठता रहा है कि क्या ऑनलाइन हमारा (यूजर्स) का डेटा सुरक्षित है। अभी तक के लिए यह माना जाता था कि सरकारी वेबसाइट इस तरह के मामलों या साइबर अपराध से बचे हुए हैं, लेकिन आधार कार्ड से जुड़ी जानकारी जब कुछ हैकर्स की ओर से सार्वजनिक हुई तो डेटा की सुरक्षा को लेकर यही सवाल और जोरों से किया जाने लगा। असल में, अभी भी लोग सरकारी वेबसाइट पर बैंक अकाउंट से जुड़ी जानकारी दर्ज करते हैं, टैक्स भरने के लिए अपने सम्पूर्ण डेटा को वेबसाइट पर अपलोड करते हैं, किसी भी दस्तावेज के लिए आवेदन करते हुए अपने डेटा को सरकारी वेबसाइट को देते हैं आदि आदि। अभी तक के लिए रिपोर्टों के अनुसार आपका डेटा शायद सुरक्षित नहीं था, लेकिन अब ऐसी उम्मीद की जा रही है कि एक बदलाव होने वाला है, इसका मतलब है कि आपके डेटा को सुरक्षा मिलने वाली है। असल में, Indian Computer Emergency Response Team यानी CERT-In को Anthropic के शक्तिशाली AI मॉडल Claude Mythos का एक्सेस मिल गया है। यह मॉडल सॉफ्टवेयर में ऐसी कमजोरियों की पहचान करने में सक्षम है, जिनका फायदा आमतौर पर साइबर अपराधी उठाते हैं। इसका मतलब है कि आपके डेटा की सुरक्षा अब AI करने वाला है। अभी के लिए फिलहाल इसकी टेस्टिंग हो रही है। आइए जानते हैं कि क्या अब इस टेस्टिंग के पूरा होने और इस सुविधा को अपनाने के बाद सरकारी वेबसाइटों पर होने वाले साइबर अटैक को रोका जा सकेगा?

क्या है CERT-In? और Claude Mythos इसे कैसे मदद करने वाला है?

CERT-In भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी है। यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली इकाई है। इसका मुख्य काम ही साइबर हमलों पर नजर रखना, सुरक्षा चेतावनियां जारी करना और प्रभावित संस्थाओं को तकनीकी सहायता आदि देना है। हालांकि, इस समय साइबर अपराधी भी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, AI का इस्तेमाल करके ही सरकारी और गैर सरकारी वेबसाइटों की कमियों की पहचान कर रहे हैं और इसके बाद साइबर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में, AI से लड़ने के लिए AI ही अच्छा विकल्प हो सकता है। Mythos जैसा मॉडल सॉफ्टवेयर के जटिल कोड आदि की जांच करके इसमें छिपी कमजोरियों को पहचानने में और इन्हें दूर करके वेबसाइट को साइबर हमलों से बचा सकता है।

Claude Mythos AI कैसे करता है काम?

Claude Mythos एक शक्तिशाली मॉडल है, जिसे Claude की ओ से भी इस्तेमाल किया जा चुका है। इसके अलावा इसे जटिल कोड समझने, सॉफ्टवेयर की सुरक्षा खामियां पहचानने और इसके बाद उन्हें ठीक करने के कामों के लिए ही डिजाइन किया गया है।

क्या है Project Glasswing, इसका Mythos से क्या है संबंध?

Anthropic की ओर से ग्लोबल बाजार में 7 अप्रैल 2026 को Project Glasswing शुरू किया था। इसका उद्देश्य दुनिया के महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिस्टम को साइबर हमलों से बचाने में AI का इस्तेमाल करना है। इस पहल में Microsoft, Google, Amazon Web Services, Apple, Cisco, CrowdStrike, NVIDIA आदि शामिल हैं। हालांकि, शुरुआत में Mythos का एक्सेस सीमित ही रखा गया है, क्योंकि इसकी शक्तिशाली क्षमताओं का गलत इस्तेमाल ज्यादा हो सकता है। अभी के लिउए यानि इसके शुरुआती दौर में इसे कुछ सुरक्षा संगठनों को उपलब्ध कराया गया है।

Mythos की टेस्टिंग प्रक्रिया

इंटरनेट पर कई ऐसी रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं, जो कहती हैं कि इस समय इसकी टेस्टिंग चल रही है। यह टेस्टिंग Controlled Environment में की जा रही है। इसका मतलब है कि मॉडल को खुले इंटरनेट या बाहरी सरकारी डिजिटल सिस्टम पर मनमाने तरीके से कार्रवाई करने की छूट नहीं दी गई है।

हालांकि, कुछ लोगों की ओर से यह भी चिंता जताई जा रही है कि संवेदनशील सरकारी जानकारी किसी बाहरी कंपनी के क्लाउड सिस्टम तक पहुंचने से नया खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए टेस्टिंग के दौरान डेटा सुरक्षा, मॉडल की सटीकता और उसके सुझाए सुधारों की उपयोगिता पर ध्यान देना जरूरी है।

क्या CERT-In कुछ अन्य AI मॉडल्स को भी इस्तेमाल करेगा?

अगर हम इंटरनेट पर चल रही रिपोर्टों को देखते हैं तो जानकारी मिलती है कि CERT-In सिर्फ Claude Mythos तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। एजेंसी दूसरे AI मॉडल भी टेस्ट कर रही है। सरकारी सूत्रों का दावा है कि कुछ मॉडल Mythos की करीब 80 से 85 प्रतिशत क्षमताएं उपलब्ध करा सकते हैं। हालांकि, इस अनुमान का सार्वजनिक बेंचमार्क सामने नहीं आया है। इसलिए इसे प्रमाणित स्कोर नहीं समझना चाहिए।

सरकारी वेबसाइटों और आम यूजर्स को क्या फायदा होगा?

सफल टेस्टिंग के बाद Mythos जैसे मॉडल सरकारी पोर्टलों के सॉफ्टवेयर की जांच, संभावित कमजोरियां पहचानने और उन्हें ठीक करने में मदद और सुझाव दे सकते हैं। इसका फायदा भविष्य में बैंकिंग, टेलीकॉम, बिजली और दूसरी महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं को पहुँच सकता है। हालांकि, अभी तक के लिए यह जानकारी सामने नहीं आई है कि क्या सरकारी पोर्टल पर Mythos पूरी तरह से रोलआउट किया जाने वाला है? ऐसे में, आम लोगों के लिए भी कुछ सावधानियां जरूरी हैं। सरकारी वेबसाइट का सही अड्रेस जरूर चेक करें, OTP या पासवर्ड किसी से शेयर न करें, डिवाइस अपडेट रखें और जहां उपलब्ध हो टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन इस्तेमाल करें।

क्या अब हैकर्स की एंट्री पूरी तरह बंद हो जाएगी?

फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी हो सकती है कि इस सिस्टम के शुरू होते ही साइबर अपराध पूरी तरह से बंद हो कने वाले हैं। इसके अलावा यह आपको कमजोरियों के बारे में जानकारी दे सकता है, लेकिन इस समयया को खत्म नहीं कर सकता है। इया एप की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि CERT-In कितनी वास्तविक कमजोरियां पहचानता है, कितने सुधार लागू होते हैं और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा किस प्रकार से सुनिश्चित की जारी है।

Ashwani Kumar

Ashwani Kumar

Ashwani Kumar has been the heart of Digit Hindi for nearly nine years, now serving as Senior Editor and leading the Vernac team with passion. He’s known for making complex tech simple and relatable, helping millions discover gadgets, reviews, and news in their own language. Ashwani’s approachable writing and commitment have turned Digit Hindi into a trusted tech haven for regional readers across India, bridging the gap between technology and everyday life.

View full profile