Bandar apna dost earnings
क्या आपने भी सोशल मीडिया पर वह खबर देखी है जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक भारतीय यूट्यूब चैनल “Bandar Apna Dost” केवल बंदरों के AI-जनरेटेड वीडियो डालकर साल के 38 करोड़ रुपये छाप रहा है? यह आंकड़ा किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी है. रातों-रात अमीर बनने के सपने देखने वाले कई नए क्रिएटर्स ने तो एआई टूल्स की मदद से कई चैनल भी खोल भी लिए होंगे या खोलने की तैयारी में होंगे.
लेकिन रुकिए. इंटरनेट पर दिखने वाली हर चमकती चीज सोना नहीं होती. एक वायरल फैक्ट-चेक ने इस दावे की हवा निकाल दी है. सच्चाई यह है कि अरबों व्यूज होने के बावजूद, ऐसे चैनल्स की असली कमाई ‘जीरो’ हो सकती है. यूट्यूब की 2025 की नई पॉलिसियां “AI Slop” के खिलाफ सख्त हो चुकी हैं.
इसको लेकर इंस्टाग्राम अकाउंट “Youtube India Buzz” (YIB) ने एक डिटेल्ड फैक्ट-चेक किया है. इसमें बताया गया है कि वास्तविकता वह नहीं है जो थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स या सोशल मीडिया पोस्ट दिखा रही हैं. इसको लेकर उसने डिटेल्स में एनालिसिस डाला है.
रिपोर्ट्स में कहा गया कि चैनल के अरबों व्यूज को देखते हुए, एडसेंस (AdSense) से इसकी संभावित कमाई करोड़ों में है. यह AI के जरिए आसान कमाई का सपना दिखाता है. जबकि YIB के फैक्ट-चेक के अनुसार, ये आंकड़े पूरी तरह से भ्रामक हैं. व्यूज का मतलब हमेशा पैसा नहीं होता. पोस्ट में साफ लिखा है: “भले ही इन चैनलों को अरबों व्यूज मिलते हैं, लेकिन उन्हें अक्सर ZERO AdSense राजस्व मिलता है.”
इसका मुख्य कारण यूट्यूब की 2025 की मोनेटाइजेशन पॉलिसी है. यूट्यूब ने “AI Slop” (बड़े पैमाने पर उत्पादित, कम गुणवत्ता वाला एआई कंटेंट) के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है. Bandar Apna Dost जैसे चैनल्स अक्सर एक ही तरह के AI प्रॉम्प्ट्स का उपयोग करके हजारों वीडियो बनाते हैं. यूट्यूब इसे “मास-प्रोड्यूस, रिपीटिव कंटेंट” मानता है.
यूट्यूब के नए नियमों के तहत, ऐसा कंटेंट जो बिना किसी ह्यूमन वैल्यू या क्रिएटिविटी के सिर्फ AI से थोक में बनाया गया हो, वह YouTube पार्टनर प्रोग्राम (YPP) के लिए पात्र नहीं है. यानी, वीडियो पर विज्ञापन तो आ सकते हैं (जो यूट्यूब खुद रखता है), लेकिन क्रिएटर को फूटी कौड़ी नहीं मिलती है.
सोशल ब्लेड (SocialBlade) या अन्य थर्ड-पार्टी टूल्स जो कमाई दिखाते हैं, वे एक साधारण मैथ पर काम करते हैं: कुल व्यूज × प्रति व्यू औसत पैसा. ये टूल्स यह नहीं जानते कि चैनल Demonetized है या नहीं. वे यह नहीं देख सकते कि वीडियो ‘येलो डॉलर’ (सीमित विज्ञापन) की श्रेणी में है या कॉपीराइट स्ट्राइक झेल रहा है. इसलिए, 38 करोड़ का आंकड़ा सिर्फ एक “कागजी अनुमान” है, बैंक खाते की सच्चाई नहीं है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यूट्यूब ने एआई स्पैम (AI Spam) को रोकने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं. 2025 में लागू हुए अपडेटेड दिशानिर्देशों के अनुसार, क्रिएटर्स को यह बताना अनिवार्य है कि उनका कंटेंट सिंथेटिक या एआई-जनरेटेड है. सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है कि क्या ऐसे “ब्रेन-रॉट” कंटेंट (जो दिमाग को सुन्न कर दे) को पूरी तरह बैन कर देना चाहिए. यह प्लेटफॉर्म की क्वालिटी को गिराता है और असली मेहनत करने वाले क्रिएटर्स के लिए जगह कम करता है.
यह भी पढ़ें: भूल कर भी न लें ट्रिपल कैमरा सेटअप वाला ये iPhone, नए साल पर Apple का बड़ा अपडेट, कई डिवाइस हो गए ‘बेकार’