ओटीटी पर दर्शकों को हर जॉनर का स्वाद चखने को मिल जाता है, फिर चाहे वो हॉरर और थ्रिलर हो या रोमांस और इमोशंस। ओटीटी पर आप बिना किसी ख़ास समय का इंतज़ार किये अपने मन पसंदीदा कंटेंट्स स्ट्रीम कर सकते हैं। यहां आपको अपने मूड को लाइट करने के लिए किसी ख़ास पल या दिन का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। अगर आपको अभी कुछ ऐसा देखने का मन है, जिसे आप अपनी निजी ज़िन्दगी से रिलेट कर सकें, तो ज़रा थम जाइये। अपनी कुर्सी की पेटियों को बाँध लीजिये और हमारे साथ ओटीटी की इन फिल्मों के सफर में उड़ान भरने को तैयार हो जाइये। इन सभी फिल्मों में आपको फैमिली ड्रामा के साथ कॉमेडी का भरपूर तड़का और कहानी को दिलचस्प बनाने वाले कई ट्विस्ट देखने को मिलेंगे। तो चलिए बिना देर किये, जानते हैं इन फिल्मों के अजीबो गरीब प्लाट ट्विस्ट और कहानियों के बारे में।
बधाई हो एक अधेड़ उम्र के माता-पिता की कहानी है, जिनकी बड़ी उम्र में प्रेगनेंसी की खबर सुनकर उनका शादी की उम्र का बड़ा बेटा और समाज हैरान रह जाते हैं। शुरुआत में शर्मिंदगी और पारिवारिक तनाव झेलने के बाद, धीरे-धीरे बच्चों को अपने माता-पिता के प्यार का अहसास होता है। आखिरकार, समाज के तानों को दरकिनार कर पूरा परिवार एक हो जाता है और खुशी-खुशी अपने घर में नए मेहमान का स्वागत करता है।
चिल्लर पार्टी एक सोसायटी में रहने वाले शरारती और बेफिक्र बच्चों के एक गैंग की कहानी है। उनकी जिंदगी तब बदलती है जब सोसायटी में गाड़ियां साफ करने वाले एक अनाथ बच्चे ‘फटका’ और उसके प्यारे आवारा कुत्ते ‘भीडू’ की एंट्री होती है। शुरुआत में मनमुटाव के बाद बच्चे उनके गहरे दोस्त बन जाते हैं, लेकिन जब एक भ्रष्ट राजनेता भीडू को पकड़वाने के लिए एक नया कानून लागू करता है, तो यह ‘चिल्लर पार्टी’ एकजुट होकर उस नेता और राजनीति की बड़ी दुनिया से लोहा लेती है।
दो दूनी चार दिल्ली के एक मिडिल क्लास स्कूल टीचर संतोष दुग्गल और उनके परिवार की कहानी है, जो अपनी सीमित सैलरी में गुजारा करते हैं। कहानी में मोड़ तब आता है जब एक पारिवारिक शादी में जाने के लिए उन पर कार खरीदने का दबाव बनता है, जिसके लिए वे कई तरह के जुगाड़ और समझौते करते हैं। यह फिल्म एक ईमानदारी की राह पर चलने वाले शिक्षक की मुश्किलों, उनके बच्चों के सपनों और एक आम भारतीय परिवार की खुशियों व संघर्षों को बेहद खूबसूरती से दिखाती है।
डब्बो के डिस्ट्रीब्यूशन में हुई एक गलती के कारण एक अकेले और रिटायर होने वाले सरकारी कर्मचारी साजन फर्नांडीस को एक उदास हाउसवाइफ ईला का भेजा हुआ लंचबॉक्स मिल जाता है। इस गलती के बाद दोनों के बीच खाने के डिब्बे में चिट्ठियों के जरिए एक अनोखा संवाद शुरू होता है, जहाँ वे बिना मिले अपनी तन्हाई, अधूरे सपनों और सुख-दुख को साझा करते हैं। यह फिल्म बेहद सादगी से दिखाती है कि कैसे दो अजनबी अपनी बोरिंग जिंदगी के बीच एक-दूसरे में एक नया सहारा और उम्मीद ढूंढ लेते हैं।
ब्रो डैडी जॉन और उनके बेटे ईशो की कहानी है, जो आपस में पिता-पुत्र से ज़्यादा दोस्तों की तरह रहते हैं। कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट तब आता है जब दोनों के जीवन में एक ही समय पर अनएक्सपेक्टेड प्रेगनेंसी की खबरें सामने आती हैं, जिससे पूरा परिवार उलझन में पड़ जाता है। इसके बाद, समाज के तानों और प्रिमिटिव माता-पिता से इस सच को छुपाने के लिए दोनों कई तरह के मजेदार जुगाड़ और कॉमेडी ड्रामा का सहारा लेते हैं।
जया जया जया जया हे एक मिडिल क्लास लड़की जया की कहानी है, जो शादी के बाद अपने पति राजेश के डोमेस्टिक वोइलेंस और गुस्से का शिकार बनती है। समाज और परिवार से मदद न मिलने पर, जया खुद मार्शल आर्ट्स सीखती है और अपने पति के थप्पड़ों का जवाब उसी की भाषा में देना शुरू कर देती है। यह फिल्म एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को बेहद मनोरंजक और कॉमेडी अंदाज में पेश करती है, जहाँ एक महिला अपने आत्मसम्मान के लिए डटकर खड़ी होती है।
जाति रत्नालु संगारेड्डी के तीन सीधे-सादे और थोड़े नासमझ दोस्तों—श्रीकांत, शेखर और रवि—की कहानी है, जो एक बड़ी नौकरी और इज़्ज़त की तलाश में हैदराबाद आते हैं। वहाँ वे अनजाने में एक बड़े राजनेता पर हुए जानलेवा हमले के झूठे मामले में फंस जाते हैं और जेल पहुंच जाते हैं। इसके बाद, अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए वे कोर्ट में जो अजीबोगरीब और मजाकिया हरकतें करते हैं, ये इस पूरी फिल्म को एक बेहतरीन कॉमेडी ड्रामा बनाती है।
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