क्या आप भी ‘वीकेंड बिंज’ के लिए कुछ दमदार तलाश रहे हैं? साल 2025 भारतीय OTT जगत के लिए एक यादगार वर्ष साबित हुआ है. इस साल क्राइम थ्रिलर्स, पॉलिटिकल ड्रामा और बहुप्रतीक्षित सीक्वल की बाढ़ सी आ गई. Netflix, Prime Video और ZEE5 जैसे प्लेटफॉर्म्स ने अपने सबसे बेहतरीन ‘ओरिजिनल्स’ पेश किए.
इन सीरीज ने न सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन किया बल्कि सोशल मीडिया पर लंबी बहसें भी छेड़ीं. चाहे वह जेल की कालकोठरी की अंधेरी दुनिया हो या किसी जासूस की दोहरी जिंदगी, 2025 ने हर जॉनर में मास्टरपीस दिए हैं. अगर आपने साल 2025 के इन 5 सबसे चर्चित शो और फिल्मों को मिस कर दिया है, तो आप एक बड़े सिनेमेटिक अनुभव से चूक रहे हैं.
नेटफ्लिक्स की ‘ब्लैक वारंट’ इस साल की सबसे रोंगटे खड़े कर देने वाली जेल-आधारित ड्रामा बनकर उभरी. यह सीरीज भारतीय जेल प्रणाली के अंधेरे और जटिल गलियारों में सेट है. यह सलाखों के पीछे की सत्ता, भ्रष्टाचार और नैतिकता पर एक बेबाक नजर डालती है. है. मेकर्स ने असहज कर देने वाली सच्चाइयों को छिपाने या सैनिटाइज करने की कोशिश नहीं की है. जेल के अंदर की राजनीति और कैदियों के मनोविज्ञान को जिस गहराई से दिखाया गया है, वह इसे 2025 के सबसे चर्चित शोज़ में से एक बनाता है.
अपनी विरासत को कायम रखते हुए, ‘दिल्ली क्राइम’ एक और दमदार सीजन के साथ लौटा और साबित किया कि यह भारत की सबसे बेहतरीन ट्रू-क्राइम सीरीज क्यों है. दिल्ली पुलिस द्वारा संभाले गए वास्तविक जीवन के मामलों से प्रेरित, यह शो पुलिस प्रक्रिया की सटीकता को भावनात्मक गहराई के साथ जोड़ता है.
हर सीजन एक अलग कहानी से निपटता है, इसलिए तीसरे सीजन को समझने के लिए आपको पिछले दो सीजन देखने की जरूरत नहीं है. यह न्याय की खोज में ईमानदारी और बहादुरी के साथ अपनी यात्रा जारी रखता है. शेफाली शाह और उनकी टीम की परफॉर्मेंस एक बार फिर दिल जीत लेती है.
‘कोस्टाओ’ एक ऐसी फिल्म है जिसने राजनीतिक साजिश और अपराध को एक कसकर बुनी हुई कहानी में पिरोया है. यह फिल्म कानून प्रवर्तन, राजनीति और संगठित अपराध के गंदे चौराहे की पड़ताल करती है. किशोर कुमार ने भ्रष्ट राजनेता और तस्कर ‘डिमेलो’ की भूमिका निभाई है, और मुखबिर के रूप में रवि शंकर जायसवाल ने अपनी छाप छोड़ी है. यह उन फिल्मों में से है जो खत्म होने के बाद भी आपके दिमाग पर गहरा असर छोड़ती हैं.
एक लंबे इंतजार के बाद, श्रीकांत तिवारी प्राइम वीडियो पर वापस आए और उन्होंने किसी को निराश नहीं किया. मनोज बाजपेयी हमेशा की तरह ‘रिलेटेबल’ श्रीकांत तिवारी के रूप में लौटे, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों को अपनी घरेलू अराजकता के साथ संतुलित कर रहे हैं. इस सीजन ने हमें यह एहसास दिलाया कि एक विलेन के भी भावनात्मक और कमजोर पक्ष होते हैं. विलेन का मानवीकरण इस सीजन की यूएसपी रही.
पिछले साल की सबसे बहुप्रतीक्षित वापसी में से एक, ‘पाताल लोक 2’ बढ़ी हुई तीव्रता और एक गहरे कथा कैनवास के साथ आया. अपराध, जाति और सत्ता की अपनी खोज का विस्तार करते हुए, नए सीजन ने अपने पात्रों को नैतिक ग्रे ज़ोन में और गहरा धकेल दिया. हाथीराम चौधरी की वापसी और कहानी का विस्तार इसे भारतीय ओटीटी क्राइम ड्रामा में एक बेंचमार्क के रूप में फिर से स्थापित करता है. यह सीजन पहले से कहीं ज्यादा डार्क और इंटेंस है.
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